Varuthini Ekadashi 2026 : वरुथिनी एकादशी पर इन 5 चीजों से बना लें दूरी, तभी पूरा होगा उपवास

punjabkesari.in Sunday, Apr 12, 2026 - 04:12 PM (IST)

Varuthini Ekadashi 2026 : हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है और जब बात वरुथिनी एकादशी की हो, तो इसका फल और भी बढ़ जाता है। वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की इस एकादशी के बारे में कहा जाता है कि इसका व्रत रखने से व्यक्ति के भीषण पापों का नाश होता है और उसे सौभाग्य की प्राप्ति होती है। वरुथिनी एकादशी का व्रत जितना फलदायी है, इसके नियम उतने ही कड़े हैं। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन कुछ विशेष चीजों का सेवन वर्जित माना गया है। यदि आप व्रत रख रहे हैं या व्रत का पूर्ण पुण्य लाभ उठाना चाहते हैं, तो इन 5 चीजों से दूरी बनाना बेहद जरूरी है। तो आइए जानते हैं कि वो कौन सी चीजें हैं, जिसका सेवन वरुथिनी एकादशी के दिन नहीं करना चाहिए। 

Varuthini Ekadashi 2026

चावल का परित्याग 
शास्त्रों में एकादशी के दिन चावल खाना सबसे वर्जित कर्म माना गया है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन चावल का सेवन 'महर्षि मेधा के अंश' (रक्त) के समान माना जाता है। माना जाता है कि एकादशी पर चावल खाने से व्यक्ति का मन चंचल होता है और व्रत का सात्विक फल नष्ट हो जाता है।

शहद से बनाएं दूरी 
वरुथिनी एकादशी के नियमों में शहद का सेवन पूरी तरह वर्जित है। अन्य एकादशियों की तुलना में इस दिन शहद को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। शहद को मांसाहार की श्रेणी के करीब माना जाता है, इसलिए व्रत की शुद्धता बनाए रखने के लिए इससे बचना चाहिए।

Varuthini Ekadashi 2026

मसूर की दाल
दालों में मसूर की दाल को तामसिक माना गया है। वरुथिनी एकादशी के दिन इसका सेवन करना व्रत को खंडित कर सकता है।
 यह मन में उत्तेजना पैदा करती है और एकाग्रता को प्रभावित करती है, जो भक्ति के मार्ग में बाधा है।

कांसे के बर्तन में भोजन
वरुथिनी एकादशी पर केवल भोजन ही नहीं, बल्कि बर्तन का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए। इस दिन कांसे के बर्तन में न तो खाना चाहिए और न ही पीना चाहिए। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, कांसे के बर्तन में भोजन करने से संचित पुण्य कम होते हैं। इसके बजाय मिट्टी, तांबे या पीतल के बर्तनों का उपयोग करना श्रेष्ठ है।

पराया अन्न या मांग कर खाना 
वरुथिनी एकादशी के दिन दूसरों के घर का बना भोजन या किसी का दिया हुआ अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए। शास्त्रों का मत है कि जिस व्यक्ति का अन्न हम ग्रहण करते हैं, उसके मानसिक विचार और कर्मों का प्रभाव हमारे ऊपर पड़ता है। व्रत के दौरान स्वयं के घर का शुद्ध भोजन या फलाहार ही ग्रहण करना चाहिए।

Varuthini Ekadashi 2026

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Content Editor

Sarita Thapa

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