Ahoi ashtami 2019: इस कथा के बिना अधूरा है अहोई अष्टमी का व्रत

10/21/2019 9:03:27 AM

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
हिंदू पंचांग के अनुसार अहोई अष्टमी का व्रत कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है और इस साल ये आज यानि 21 अक्टूबर को मनाया जा रहा है। कहते हैं कि ये व्रत महिलाएं अपने बच्चों की लम्बी आयु के लिए रखती हैं। लेकिन जिन औरतों के बच्चे नहीं होते हैं, वे महिलाएं भी इस व्रत को कर सकती हैं। कहते हैं कि व्रत के प्रभाव से उन्हें संतान प्राप्ति होती है। इस दिन निर्जल रहकर रात में चांद को देखकर ही व्रत खोला जाता है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि अगर कोई महिला किसी कारण वश व्रत नहीं कर पाली तो अगर वे केवल कथा के ही सुन लें तो अहोई माता उसकी इच्छा को पूरा कर देती है। 
PunjabKesari, अहोई अष्टमी
प्राचीन काल में एक साहूकार था, जिसके सात बेटे और सात बहुएं थी। इस साहूकार की एक बेटी भी थी जो दीपावली में ससुराल से मायके आई थी। दीपावली पर घर को लीपने के लिए सातों बहुएं मिट्टी लाने जंगल में गई तो ननद भी उनके साथ चली गई। साहूकार की बेटी जहां मिट्टी काट रही थी, उस स्थान पर स्याहु (साही) अपने साथ बच्चों से साथ रहती थी। मिट्टी काटते हुए गलती से साहूकार की बेटी की खुरपी के चोट से स्याहु का एक बच्चा मर गया। जिसेक कारण साही उस पर क्रोधित हो गई और बोली कि मैं तुम्हारी कोख बांधूंगी। साहूकार की बेटी यह बात सुन कर डर गई और अपनी सातों भाभियों से एक-एक कर विनती करती हैं कि वह उसके बदले अपनी कोख बंधवा लें। सबसे छोटी भाभी ननद के बदले अपनी कोख बंधवाने के लिए तैयार हो जाती है। इसके बाद छोटी भाभी के जो भी बच्चे होते हैं वे सात दिन बाद मर जाते हैं। सात पुत्रों की इस प्रकार मृत्यु होने के बाद उसने पंडित को बुलवाकर इसका कारण पूछा। पंडित ने सुरही गाय की सेवा करने की सलाह दी।
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सुरही गाय सेवा से प्रसन्न होती है और उसे साही के पास ले जाती है। रास्ते में थक जाने पर दोनों आराम करने लगते हैं। अचानक साहूकार की छोटी बहू की नजर एक ओर जाती हैं, वह देखती है कि एक सांप गरूड़ पंखनी के बच्चे को डंसने जा रहा है और वह सांप को मार देती है। इतने में गरूड़ पंखनी वहां आ जाती है और खून बिखरा हुआ देखकर उसे लगता है कि छोटी बहू ने उसके बच्चे को मार दिया है इस पर वह छोटी बहू को चोंच मारना शुरू कर देती है।छोटी बहू इस पर कहती है कि उसने तो उसके बच्चे की जान बचाई है। गरूड़ पंखनी इस पर खुश होती है और सुरही सहित उन्हें साही के पास पहुंचा देती है। वहां साही छोटी बहू की सेवा से प्रसन्न होकर उसे सात पुत्र और सात बहू होने का आशीर्वाद देती है। साही के आशीर्वाद से छोटी बहू का घर पुत्र और पुत्र वधुओं से हरा भरा हो जाता है और सभी हंसी -खुशी रहने लगते है।


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