Ahilyabai Holkar story: जब कर्तव्य के नाम पर कांप उठा मातृत्व, जानें अहिल्याबाई की कहानी
punjabkesari.in Thursday, Mar 27, 2025 - 12:24 PM (IST)

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
Ahilyabai Holkar story: महारानी देवी अहिल्याबाई होल्कर के पुत्र मालोजीराव का रथ निकला तो उनके रास्ते में एक नवजात बछड़ा आ गया। गाय वहीं सड़क के किनारे बछड़े से कुछ दूर खड़ी थी। बछड़ा मालोजीराव के रथ की चपेट में आकर बुरी तरह जख्मी हो गया और वहीं उसकी मौत हो गई। मालोजीराव का रथ आगे निकल गया। गाय वहीं सड़क पर बछड़े के पास आकर बैठ गई।
थोड़ी देर बाद अहिल्याबाई वहां से गुजरीं। उन्होंने मृत बछड़े के पास बैठी गाय को देखा तो उन्हें समझते देर न लगी कि किसी दुर्घटना में बछड़े की मौत हुई है। उन्होंने पता करवाया। सारा घटनाक्रम जानने पर अहिल्याबाई ने दरबार में मालोजी की पत्नी
मेनावाई से पूछा, “यदि कोई व्यक्ति किसी मां के सामने उसके बेटे की हत्या कर दे, तो उसे क्या दंड मिलना चाहिए?”
मालीजी की पत्नी ने जवाब दिया, “उसे प्राणदंड मिलना चाहिए।”
अहिल्याबाई ने मालो-जी-राव को हाथ-पैर बांधकर सड़क पर डालने को कहा और फिर उन्होंने आदेश दिया कि मालोजी को रथ से टकराकर मृत्यु दंड दिया जाए। कोई भी सारथी यह कार्य करने को तैयार न था। अहिल्याबाई न्यायप्रिय थीं। कहते हैं जब कोई सारथी आगे नहीं आया तो वह स्वयं इस कार्य के लिए रथ पर सवार हो गई।
वह रथ को लेकर आगे बढ़ी ही थीं कि एक अप्रत्याशित घटना घटी। वही गाय रथ के सामने आकर खड़ी हो गई। उसे बार-बार हटाया जाता लेकिन वह फिर रथ के सामने आकर खड़ी हो जाती।
यह देखकर मंत्री ने महारानी से कहा, “शायद यह बेजुबान गाय भी नहीं चाहती कि किसी और मां के बेटे के साथ ऐसा हो। वह आपसे मालोजी के लिए दया की भीख मांग रही है।”
इंदौर में जिस जगह यह घटना घटी थी, वह स्थान आज भी ‘आडा बाजार’ के नाम से जाना जाता है।