2026 में क्यों होगा 13 महीनों का साल? जानें अध‍िक मास का धार्मिक महत्व

punjabkesari.in Wednesday, Dec 03, 2025 - 11:34 AM (IST)

Adhik Maas 2026: हिंदू पंचांग के अनुयायियों के लिए साल 2026 एक विशेष और बेहद महत्वपूर्ण वर्ष होने वाला है। इस साल का कैलेंडर सामान्य 12 महीनों के चक्र से हटकर 13 महीनों का होगा। यह अद्भुत संयोग ज्योतिषीय गणनाओं के चलते हर तीसरे साल बनता है, जिसे अधिक मास या पुरुषोत्तम मास के नाम से जाना जाता है। यह वह अवधि है जब हिंदू कैलेंडर में एक महीना दोहराया जाता है, जिससे साल की अवधि बढ़ जाती है। तो आइए जानते हैं कि 2026 में कौन सा महीना रिपीट होकर साल को 13 महीने का बना देगा। 

Adhik Maas 2026

अधिक मास क्यों आता है?
यह अनोखा संयोग हर तीसरे साल बनता है और इसके पीछे का कारण हिंदू पंचांग और सौर कैलेंडर की गणना का अंतर है। हिंदू पंचांग चंद्रमा की गति पर आधारित होता है, जबकि अंग्रेजी कैलेंडर सूर्य की गति पर। चंद्रमा का मासिक चक्र सूर्य की तुलना में लगभग 11 दिन छोटा होता है। यह 11 दिनों का अंतर हर साल बढ़ता जाता है और लगभग 32 महीनों के बाद यह अंतर एक पूरे महीने के बराबर हो जाता है।

इसी बढ़े हुए अंतर को संतुलित करने और त्योहारों को सही ऋतुओं में बनाए रखने के लिए, हिंदू पंचांग में हर तीसरे साल एक अतिरिक्त महीना जोड़ दिया जाता है। इसी अतिरिक्त महीने को अधिक मास कहा जाता है। सनातन धर्म में इसका विशेष धार्मिक महत्व है।

Adhik Maas 2026

2026 में अधिक मास कब से कब तक रहेगा?
पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में यह अधिक मास 17 मई से शुरू होकर 15 जून तक चलेगा।

कौन सा महीना होगा रिपीट?
2026 में अधिक मास ज्येष्ठ महीने के बाद लगेगा, इसलिए इसे ज्येष्ठ अधिकमास कहा जाएगा। इसका अर्थ है कि नए साल में दो ज्येष्ठ महीने होंगे एक सामान्य ज्येष्ठ और दूसरा अधिक मास वाला ज्येष्ठ। इस कारण ज्येष्ठ महीने की अवधि लगभग 58 से 59 दिन तक रहेगी और विक्रम संवत 2083 में कुल 13 महीने होंगे।

अधिक मास का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अधिक मास में किए गए पूजा-पाठ, दान और पुण्य का फल कई गुना अधिक मिलता है। चूंकि यह महीना सभी सामान्य मास से अलग होता है, इसलिए इसे भगवान विष्णु को समर्पित किया गया है और इसे पुरुषोत्तम मास  भी कहा जाता है। हालांकि यह महीना अत्यधिक पवित्र माना जाता है, पर इस दौरान आमतौर पर विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश और नए व्यापार की शुरुआत जैसे शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। यह समय भक्ति, तप और साधना के लिए आरक्षित होता है।

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Content Editor

Sarita Thapa

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