Acharya Narendra Dev : पद और प्रतिष्ठा के बावजूद नहीं छोड़ी सादगी, आचार्य नरेन्द्र देव से सीखें जीवन का मूल्य

punjabkesari.in Friday, May 08, 2026 - 03:51 PM (IST)

Acharya Narendra Dev : शिक्षाविद् व बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य नरेन्द्र देव काशी में रिक्शा पर बैठकर कहीं जा रहे थे। रास्ते में उन्हें उनके एक परिचित मिले। उन्होंने आचार्य को रिक्शा पर जाते देख उन्हें रुकने का संकेत किया। संकेत पाकर उन्होंने रिक्शा रुकवाया। परिचित उनके पास आया और बोला, “कैसे हैं आचार्य जी?” आचार्य जी बोले, “ठीक हूं, आप बताएं।”

Acharya Narendra Dev

इसके बाद परिचित हैरानी से उन्हें देखकर बोला, “आचार्य जी, आप इतने बड़े व्यक्ति होकर भी रिक्शा से क्यों जा रहे हैं?” 

परिचित की बात पर आचार्य जी बोले, 'अरे भाई, मैं बड़ा आदमी कहां हूं। मैं तो साधारण परिवार का व्यक्ति हूं। अब मैं रिक्शा से नहीं जाऊंगा तो भला और किस साधन से जाऊंगा?"

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उनकी यह बात सुनकर परिचित बोला, 'आचार्य जी, आप देश के अत्यंत प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय के कुलपति हैं। इतने बड़े पद पर होने के कारण आपको कार तो मिली ही होगी। आचार्य बोले, 'कार तो है, लेकिन मैं उसका खर्च वहन नहीं कर सकता।' यह सुनकर परिचित बोले, 'आप यह क्यों कह रहे हैं कि आप कार का खर्च वहन नहीं कर सकते।'

यह सुनकर आचार्य बोले, 'मैं मानता हूं कि मेरे पास कार है, लेकिन पहली बात तो उस कार पर मेरा अधिकार नहीं है, वह सरकारी है और मुझे विश्वविद्यालय के कार्य से आने-जाने के लिए मिली है। आज मैं अपने एक बीमार संबंधी को देखने के लिए अस्पताल जा रहा हूं। यह मेरा निजी कार्य है। ऐसे में मैं अपने निजी कार्य के लिए उस कार का इस्तेमाल कैसे कर सकता हूं।' आचार्य  की सादगी देख कर परिचित दंग रह गया।

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Content Editor

Sarita Thapa

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