भारत में आंकड़ों को एकत्र करने का नया माध्यम: नई सीपीआई सीरीज़
punjabkesari.in Friday, Mar 13, 2026 - 12:16 AM (IST)
(वेब डेस्क): उपभोक्ता मूल्य सूचकांक का मकसद लोगों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली उत्पादों और सेवाओं की कीमत में बदलाव पर करीब से नजर रखना है। इसलिए, आम उपयोग में आने वाले उत्पादों, उनका वज़न, बाजार का दायरा, मूल्यों के आंकड़ एकत्र करने के सही स्त्रोत और सूचकांक बनाने में इस्तेमाल किया जाने वाला तरीका, ये सभी ज़रूरी हैं। जनवरी के नंबर के लिए 12 फरवरी को जारी नई सीपीआई सीरीज़, नए 2023-24 घरेलू खपत एवं खर्च सर्वेक्षण के अनुसार उत्पाद और वज़न पर आधारित है। 2024 मूल्य संदर्भ अवधि है, जिसका मतलब है कि 2024 में मासिक मूल्य सूचकांक का औसत 100 के बराबर होगा। श्रीजीत बालासुब्रमण्यम, वाइस प्रेसिडेंट और इकोनॉमिस्ट- फिक्स्ड इनकम, बंधन एएमसी के अनुसार एक, नई सीपीआई सीरीज़ इस्तेमाल की गई चीज़ों और सर्विसज और उनके महत्व यानि अधिमान को संशोधित करती है ताकि नवीनतम खपत रूझानों को बेहतर ढंग से दिखाया जा सके।
उदाहरण के लिए, सीपीआई के दायरे में कुल उत्पाद अब 358 होंगे (पहले 299 थे), खाने पीने के सामान अधिमान (वेटेज) कम होगा जबकि आवासीय और दूसरी सर्विसेज का अधिमान ज़्यादा होगा। खाने में, अनाज, सब्ज़ियों और दालों का अधिमान कम होगा जबकि फलों का अधिमान ज़्यादा होगा। दो, मूल्य आंकड़े इकट्ठा करने के लिए बाज़ार बढ़ाए गए हैं। 280 से अधिक गांव, 280 से अधिक शहरी बाजार और 12 ऑनलाइन मार्केट जोड़े गए हैं।
तीन, प्राथमिक स्तर पर सूचकांकों को इकट्ठा करने, छूटे हुए मूल्य आंकड़ों को जोड़ने और एचआरए की गणना करने के तरीके में सुधार किया गया है। चार, अखिल भारतीय और राज्य- स्तरीय उत्पाद-स्तर सीपीआई अब ग्रामीण, शहरी और मिले-जुले सेक्टर के लिए भी उपलब्ध होगा। पांच, उत्पाद अब दुनिया भर में माने जाने वाले सीओआईसीओपी 2018 सिस्टम (यानी मकसद के हिसाब से अलग-अलग खपत का वर्गीकरण) के अनुसार मापे और वर्गीकृत किए जाते हैं, जो दूसरे देशों के साथ हमारे सीपीआई मानकीकरण और तुलना को बढ़ाता है।
जिन दो बातों पर बहुत ज़्यादा चर्चा हुई, वे थे आवासीय मूल्य सूचकांकों को इकट्ठा करना और सावर्जनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत बांटे जाने वाले उत्पादों का वर्गीकरण। आवासीय पर, मूल्य आंकड़ा संग्रहण के लिए दायरा बढ़ाने के अलावा, अब ग्रामीण इलाकों को शामिल किया गया है और नियोक्ता द्वारा दिए गए आवास (सरकार द्वारा दिए गए आवास सहित) को बाहर रखा गया है। अब हर महीने हर घर का सर्वे किया जाएगा, जिसका अधिमान 2011 की जनगणना पर आधारित होगा, और संग्रहण का तरीका एक जैसा होगा।
यह सब आवासीय हिस्से को ज़्यादा प्रतिनिधत्व प्रदान करेगा और आंकड़ों में अचानक किसी भी बदलाव से बचने में मदद करेगा। आखिरकार यह भी तय किया गया कि खाने, स्वास्थ्य सेवाओं, बिजली, शिक्षा वगैरह के किसी भी निशुल्क सामाजिक हस्तांतरण को बाहर रखा जाए क्योंकि यह वैश्विक प्रक्रिया है और ये खर्च उपभोक्ताओं के असल जेब से किए गए खर्च को नहीं दिखाते हैं। हालांकि, सब्सिडी वाले सामान और सर्विस (कम लेकिन नॉन-ज़ीरो प्राइस) को शामिल किया जाना जारी रहेगा।
नई सीरीज़ के अनुसार जनवरी का हेडलाइन सीपीआई 2.7% था। हमारी गणना पुरानी सीरीज़ के अनुसार 2.5% बताता है, जिसका मतलब है कि केवल 20 बेसिस पॉइंट्स (बीपीएस) का अंतर है। हालांकि दोनों सीरीज़ असल में बहुत अलग हैं, एक जैसे गणना से पता चलता है कि नई सीरीज़ में खाद्य मुद्रास्फीती शायद 120बीपीएस ज़्यादा थी। हालांकि एक वर्ग के तौर पर खाने की चीज़ों का अधिमान कम हुआ है, लेकिन खाने की चीज़ों में जिन चीज़ों की जनवरी में प्राइस रीडिंग ज़्यादा थी, उनका अधिमान ज़्यादा है (फल, मीट और मछली), जबकि जिन चीज़ों की रीडिंग कम थी, उनका अधिमान कम है (अनाज, सब्ज़ियां)।
दूसरी ओर, मुख्य मुद्रास्फीती (खाना, बिजली, गैस और दूसरे ईंधनों को छोड़कर हेडलाइन) ~90 बीपीएस कम थी। अगर हम पेट्रोल, डीज़ल, सोने और चांदी की ज्वेलरी को भी हटा दें, तो अंतर सिर्फ़ ~30 बीपीएस है। हालांकि, 2025 में हेडलाइन और ग्रुप स्तर पर पुरानी और नई सीरीज़ के बीच औसत अंतर बहुत कम है, जिसका मतलब है कि समय के साथ कोई एकतरफ़ा अंतर नहीं है। बाकी चीज़ें एक जैसी रहने पर, इस साल औसत ज़्यादा रीडिंग से अगले साल औसत कम रीडिंग होनी चाहिए। इस तरह, जबकि तुरंत सीपीआई रीडिंग थोड़ी ज़्यादा हो सकती हैं, इससे मॉनेटरी पॉलिसी में कोई बदलाव नहीं होता है। मुद्रास्फीती का बैकग्राउंड मॉडरेट बना हुआ है, लेकिन जैसे-जैसे खाद्य मुद्रास्फीती और आधार प्रभाव सामान्य हो रहे हैं, यह धीरे-धीरे बढ़ रहा है।
