Share Market Crash Reasons: खुलते ही शेयर बाजार में मचा कोहराम, इन 7 कारण से औंधे मुंह गिरी मार्केट, डूबे ₹14 लाख करोड़

punjabkesari.in Monday, Mar 09, 2026 - 11:06 AM (IST)

बिजनेस डेस्कः सोमवार (9 मार्च) को बाजार खुलते ही कोहराम मच गया। शेयर बाजार खुलते ही तेज बिकवाली देखने को मिली और निवेशकों के करीब 14 लाख करोड़ रुपए डूब गए। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण घटकर करीब 437 लाख करोड़ रुपए रह गया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 2,400 अंक लुढ़ककर 76,424 के आसपास पहुंच गया, जबकि निफ्टी 50 लगभग 700 अंक गिरकर 23,750 के स्तर पर आ गया।

बाजार में लगभग हर सेक्टर में दबाव देखने को मिला। कई दिग्गज कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई। इंडिगो के शेयर करीब 8% तक टूट गए, जबकि टाटा स्टील, एलएंडटी, एसबीआई और मारुति सुजुकी के शेयरों में करीब 5% तक की गिरावट देखी गई। सरकारी बैंकों के शेयरों में भी भारी दबाव रहा और PSU बैंक इंडेक्स 5% से ज्यादा गिर गया।

 

       गिरावट की बड़ी वजहें.....

 

1. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण सप्लाई बाधित होने की आशंका है। ब्रेंट और WTI कच्चे तेल की कीमतें उछलकर 118 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं।

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2. मिडिल ईस्ट में बढ़ता युद्ध

पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने निवेशकों को जोखिम से दूर रहने के लिए मजबूर किया है।

3. रुपए पर दबाव

कच्चे तेल के महंगे होने से भारतीय रुपए पर भी दबाव बढ़ा है। डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होकर करीब 92.19 के स्तर तक पहुंच गया, जिससे आयात महंगा होने की चिंता बढ़ गई है।

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4. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी

अमेरिका में 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड बढ़कर करीब 4.2% के आसपास पहुंच गई है। सुरक्षित निवेश विकल्पों पर बेहतर रिटर्न मिलने से निवेशक शेयर बाजार से पैसा निकाल रहे हैं।

5. विदेशी निवेशकों की बिकवाली

विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भी लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। मार्च के शुरुआती दिनों में ही हजारों करोड़ रुपए की बिकवाली दर्ज की गई है, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ा है।

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6. वैश्विक बाजारों में गिरावट

तेल की कीमतों में उछाल का असर वैश्विक बाजारों पर भी पड़ा है। एशिया के कई प्रमुख बाजारों में भारी गिरावट देखी गई, जिससे भारतीय बाजार की धारणा भी कमजोर हुई।

7. महंगाई बढ़ने की आशंका

कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से महंगाई बढ़ने का खतरा भी बढ़ गया है। अगर तेल लंबे समय तक महंगा रहता है तो परिवहन और अन्य लागत बढ़ सकती है, जिससे अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ सकता है।
 
 


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Content Writer

jyoti choudhary

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