बजट 2026 से मिडिल क्लास को राहत की उम्मीद, स्टैंडर्ड डिडक्शन पर टिकी निगाहें

punjabkesari.in Saturday, Jan 24, 2026 - 12:33 PM (IST)

बिजनेस डेस्कः वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को केंद्रीय बजट पेश करेंगी। इस बजट पर खास तौर पर मिडिल क्लास की निगाहें टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि सरकार आयकर में कुछ राहत दे सकती है, जिसमें स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाने का ऐलान अहम हो सकता है।

स्टैंडर्ड डिडक्शन एक सीधी और तय कटौती होती है, जो कुल आय (Gross Income) से सीधे घटाई जाती है। इसका फायदा नौकरीपेशा लोगों और पेंशनभोगियों को हर साल टैक्स का बोझ कम करने में मिलता है। बजट से पहले चर्चा है कि सरकार स्टैंडर्ड डिडक्शन की सीमा बढ़ाकर 1 लाख रुपये से 1.25 लाख रुपये तक कर सकती है, जिससे मिडिल क्लास को बड़ी राहत मिल सकती है।

टैक्स एक्सपर्ट्स ने क्या कहा?

इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक, ओस्गन कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर मानस चुग का कहना है कि बजट 2026 में पर्सनल फाइनेंस से जुड़े अहम बदलाव होने चाहिए और स्टैंडर्ड डिडक्शन इसमें सबसे जरूरी है। उनका मानना है कि नए टैक्स रिजीम में स्टैंडर्ड डिडक्शन को 75,000 रुपये से बढ़ाकर कम से कम 1,00,000 रुपये किया जाना चाहिए।

वहीं दिल्ली हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की वकील नूपुर महाराज का कहना है कि मिडिल क्लास को वास्तविक राहत देने के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन को बढ़ाकर 1 लाख रुपये किया जाना चाहिए।

अभी कितना मिलता है स्टैंडर्ड डिडक्शन?

फिलहाल इनकम टैक्स की दो व्यवस्थाएं लागू हैं—पुरानी और नई।

  • पुराने टैक्स सिस्टम में स्टैंडर्ड डिडक्शन 50,000 रुपए है।
  • नए टैक्स सिस्टम में साल 2024 में इसे बढ़ाकर 75,000 रुपए कर दिया गया था।

सरकार लगातार नए टैक्स रिजीम को बढ़ावा दे रही है, इसलिए माना जा रहा है कि स्टैंडर्ड डिडक्शन से जुड़ा कोई भी बड़ा ऐलान नई व्यवस्था में ही किया जा सकता है।

नए टैक्स रिजीम में मिल सकता है ज्यादा फायदा

सरकार ने पिछले साल नए टैक्स रिजीम में 12 लाख रुपए तक की इनकम को टैक्स फ्री किया था। नौकरीपेशा लोगों को इसमें 75,000 रुपए के स्टैंडर्ड डिडक्शन का फायदा मिलाकर 12.75 लाख रुपए तक की इनकम पर टैक्स नहीं देना पड़ता। अगर इस बजट में स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाया जाता है, तो इसका सीधा फायदा सैलरी क्लास को नए टैक्स सिस्टम के तहत मिल सकता है।

क्यों जरूरी है स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाना?

टैक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि नए टैक्स सिस्टम में ज्यादातर छूट और कटौतियां नहीं मिलतीं, जो पुराने सिस्टम में उपलब्ध थीं। ऐसे में अगर स्टैंडर्ड डिडक्शन की सीमा बढ़ाई जाती है, तो ज्यादा लोग इस सरल और झंझट-मुक्त टैक्स सिस्टम को अपनाएंगे।

कुछ विशेषज्ञों का यह भी सुझाव है कि स्टैंडर्ड डिडक्शन को महंगाई से जोड़ा जाना चाहिए, ताकि बढ़ती महंगाई के साथ इसकी राशि अपने आप बढ़ती रहे।

 


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Content Writer

jyoti choudhary

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