वैश्विक तनाव के बीच मालभाड़ा दरों में उछाल इस्पात क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौती: टाटा स्टील

punjabkesari.in Thursday, May 21, 2026 - 02:42 PM (IST)

बिजनेस डेस्कः पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और लंबे समय से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध का असर अब भारतीय इस्पात उद्योग पर भी साफ दिखाई देने लगा है। बढ़ती वैश्विक शिपिंग लागत स्टील कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। Tata Steel के उपाध्यक्ष D B Sundara Ramam ने कहा कि मालभाड़ा दरों में 28-30% तक की बढ़ोतरी हुई है, जिससे आयातित कच्चे माल की लागत काफी बढ़ गई है।

उन्होंने बताया कि रूस-यूक्रेन संघर्ष और पश्चिम एशिया की अस्थिरता का असर वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ रहा है। खासकर आयातित कोकिंग कोयले पर निर्भर भारतीय स्टील कंपनियों की लॉजिस्टिक्स लागत तेजी से बढ़ी है।

आयातित कोयले पर निर्भरता बनी चुनौती

टाटा स्टील अपनी कोकिंग कोयले की जरूरत का करीब 78% हिस्सा आयात करती है, जो मुख्य रूप से ऑस्ट्रेलिया से आता है। बाकी 22% आपूर्ति पश्चिम बोकारो और झरिया की घरेलू खदानों से होती है। कंपनी ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया से सप्लाई फिलहाल स्थिर है लेकिन बढ़े हुए मालभाड़े से इनपुट लागत पर दबाव बना हुआ है।

होर्मुज तनाव का सीमित असर

Strait of Hormuz में तनाव के बावजूद कंपनी ने कहा कि लौह अयस्क को लेकर भारत काफी हद तक आत्मनिर्भर है, इसलिए बड़ा खतरा नहीं है। हालांकि खाड़ी देशों से चूना पत्थर आयात में दिक्कत आने के बाद वैकल्पिक स्रोतों का सहारा लेना पड़ा है।

रामम ने कहा कि मौजूदा हालात घरेलू खनिज आत्मनिर्भरता बढ़ाने की जरूरत को दर्शाते हैं। उनके अनुसार भारत के पास संसाधन तो हैं, लेकिन उन्हें इस्पात निर्माण के अनुकूल बनाने के लिए तकनीकी सुधार जरूरी हैं।

मजबूत घरेलू मांग से उद्योग को सहारा

कंपनी के मुताबिक सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च, निर्माण गतिविधियों, रेलवे और ऑटो सेक्टर की मजबूत मांग के चलते घरेलू स्टील खपत में तेजी बनी हुई है। वित्त वर्ष 2025-26 में तैयार स्टील की घरेलू खपत 7-8% बढ़कर 16.4 करोड़ टन तक पहुंच गई।

इसी दौरान भारत का कच्चा इस्पात उत्पादन भी 10.7% बढ़कर लगभग 16.84 करोड़ टन हो गया। टाटा स्टील इंडिया ने FY26 में 2.34 करोड़ टन उत्पादन और 2.25 करोड़ टन आपूर्ति दर्ज की।

भविष्य को लेकर चेतावनी

कंपनी ने कहा कि फिलहाल उत्पादन और संचालन स्थिर हैं लेकिन यदि भू-राजनीतिक तनाव और शिपिंग बाधाएं लंबे समय तक जारी रहती हैं, तो वित्त वर्ष 2026-27 में सप्लाई चेन और निर्यात पर दबाव और बढ़ सकता है।
 


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Content Writer

jyoti choudhary

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