EPFO New Rules: PF ट्रस्ट नियमों में अहम बदलाव, अब EPFO दर से 2% ज्यादा नहीं दे सकेंगे ब्याज
punjabkesari.in Friday, May 08, 2026 - 12:33 PM (IST)
EPFO New Rules: केंद्र सरकार ने प्राइवेट पीएफ ट्रस्ट चलाने वाली कंपनियों के लिए नियमों में अहम बदलाव किए हैं। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज ने नए प्रावधानों को मंजूरी दे दी है, जिनका उद्देश्य निगरानी को अधिक प्रभावी बनाना और कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। नए नियमों के अनुसार, कोई भी छूट प्राप्त पीएफ ट्रस्ट EPFO की ओर से घोषित वार्षिक ब्याज दर से 2 प्रतिशत से अधिक ब्याज नहीं दे सकेगा।
ऑडिट में छूट
नए नियमों के तहत अब सभी कंपनियों के लिए हर साल अनिवार्य ऑडिट जरूरी नहीं होगा। इसकी जगह रिस्क-आधारित निगरानी प्रणाली लागू की जाएगी यानी केवल उन्हीं ट्रस्टों की जांच होगी जिनमें नियमों के उल्लंघन या वित्तीय जोखिम की आशंका होगी। नियमों का पालन करने वाली कंपनियों को बार-बार ऑडिट से राहत मिलेगी।
सरकार ने पीएफ ट्रस्टों द्वारा दिए जाने वाले ब्याज पर भी सीमा तय कर दी है। अब कोई भी ट्रस्ट EPFO की घोषित ब्याज दर से 2 प्रतिशत से अधिक अतिरिक्त ब्याज नहीं दे सकेगा। अधिकारी ने बताया, यह फैसला पैसों की समझदारी बनाए रखने और बहुत ज्यादा रिटर्न देने से रोकने के लिए लिया गया है। कुछ मामलों में सदस्यों की संख्या कम होने पर ट्रस्ट अत्यधिक रिटर्न देने लगे थे, जिससे वित्तीय संतुलन बिगड़ने का खतरा बढ़ रहा था।
नए प्रावधानों में कंपनियों के विलय और अधिग्रहण (M&A) से जुड़े मामलों को भी शामिल किया गया है। अब किसी कंपनी के मर्जर या बिकने की स्थिति में उसका EPFO के तहत मिला ‘एग्जेंप्शन स्टेटस’ स्वतः समाप्त नहीं होगा। इससे कारोबार में स्थिरता और कर्मचारियों के PF प्रबंधन में निरंतरता बनी रहेगी।
कितनी कंपनियां चलाती हैं PF ट्रस्ट?
देश में लगभग 1,000 से 1,200 बड़ी कंपनियां, सार्वजनिक उपक्रम और निजी संस्थान ऐसे हैं जिन्हें EPFO से छूट मिली हुई है। ये संस्थान EPF एक्ट 1952 की धारा 17 के तहत अपना PF ट्रस्ट स्वयं संचालित करते हैं। हालांकि उन्हें कर्मचारियों को EPFO के बराबर या उससे बेहतर सुविधाएं देना अनिवार्य होता है।
ट्रस्ट बंद करने पर सार्वजनिक नोटिस जारी करना होगा
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई कंपनी अपना ट्रस्ट बंद करना चाहती है तो उसे सार्वजनिक नोटिस जारी करना होगा। साथ ही, निष्क्रिय या बिना केवाईसी वाले खातों को EPFO में ट्रांसफर करना अनिवार्य होगा। सरकार का कहना है कि इन बदलावों से पारदर्शिता बढ़ेगी, कारोबार सुगम होगा और कर्मचारियों के हित अधिक सुरक्षित रहेंगे।
