चांदी में 15 साल की सबसे बड़ी गिरावट, 2013 के बाद गोल्ड के लिए का सबसे खराब दिन
punjabkesari.in Saturday, Jan 31, 2026 - 10:14 AM (IST)
बिजनेस डेस्कः शुक्रवार को कीमती धातुओं के बाजार में पिछले एक दशक से भी ज्यादा की सबसे जबरदस्त बिकवाली देखने को मिली। रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के ठीक अगले दिन निवेशकों में मुनाफावसूली हावी हो गई, जिससे चांदी एक ही सत्र में 15% से ज्यादा टूट गई— यह 2011 के बाद की सबसे बड़ी गिरावट है। वहीं सोना 7% से ज्यादा फिसला, जो 2013 के बाद का सबसे खराब दिन रहा।
MCX पर मार्च डिलीवरी वाली चांदी 17% तक लुढ़ककर ₹3,32,002 पर आ गई, जबकि MCX गोल्ड फ्यूचर्स 9% गिरकर ₹1,54,157 के स्तर पर बंद हुए। ETF निवेशकों के लिए नुकसान और गहरा रहा। SBI सिल्वर ETF में 22.4%, ICICI प्रूडेंशियल सिल्वर ETF में 21% और निप्पॉन इंडिया सिल्वर ETF में 19.5% की भारी गिरावट दर्ज की गई। गोल्ड ETF भी दबाव में रहे—निप्पॉन गोल्ड ETF 10% और ICICI प्रूडेंशियल गोल्ड ETF 9.5% टूट गया।
कोटक सिक्योरिटीज के मुताबिक, MCX गोल्ड में यह गिरावट 15 मार्च 2013 के बाद सबसे बड़ी है, जबकि चांदी के लिए 23 सितंबर 2011 के बाद का यह सबसे खराब कारोबारी दिन रहा।
‘वार्श इफेक्ट’ से टूटा बाजार
बाजार की इस तेज गिरावट की बड़ी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा केविन वार्श को अगला फेड चेयर नामित किया जाना बताया जा रहा है। वार्श को महंगाई पर सख्त रुख अपनाने वाला माना जाता है। इससे डॉलर मजबूत हुआ और सोना-चांदी पर दबाव बढ़ गया।
विदेशी बाजारों में भी हाहाकार
अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी 15% से ज्यादा टूटकर $98.07 प्रति औंस पर आ गई और $100 का अहम स्तर भी टूट गया। सोना भी 7% से ज्यादा गिरकर $5,000 से नीचे फिसल गया, हालांकि मासिक आधार पर अब भी मजबूती बनी हुई है।
चांदी में गिरावट ज्यादा क्यों?
विश्लेषकों के मुताबिक चांदी की वोलैटिलिटी सोने से ज्यादा होती है। इंडस्ट्रियल डिमांड से जुड़ी होने के कारण तेज रैली के बाद इसमें करेक्शन आम तौर पर ज्यादा तेज होता है।
