Rupee Down: डॉलर के सामने ढहता रुपया, ₹91 के पार निकला, जानिए गिरावट की वजह

punjabkesari.in Tuesday, Jan 20, 2026 - 11:54 AM (IST)

बिजनेस डेस्कः अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपए की कमजोरी थमने का नाम नहीं ले रही है। मंगलवार को रुपया 91 के अहम स्तर को पार कर गया और दिन के कारोबार में 91.01 प्रति डॉलर के निचले स्तर तक फिसल गया। घरेलू मुद्रा की शुरुआत 2 पैसे की गिरावट के साथ 90.93 प्रति डॉलर पर हुई थी, जबकि सोमवार को यह 90.90 पर बंद हुई थी।

सोमवार को ही रुपया 12 पैसे टूटकर 90.90 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था, जो इसके अब तक के रिकॉर्ड निचले बंद स्तर के बेहद करीब है। इससे पहले 16 दिसंबर 2025 को रुपया कारोबार के दौरान 91.14 प्रति डॉलर के अपने सबसे निचले स्तर तक पहुंच गया था।

घरेलू-वैश्विक फैक्टर्स का ‘परफेक्ट स्टॉर्म’

फॉरेक्स बाजार के जानकारों के मुताबिक रुपए पर दबाव घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारणों के मेल यानी ‘परफेक्ट स्टॉर्म’ का नतीजा है। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, मजबूत डॉलर और वैश्विक व्यापार तनाव ने रुपये को कमजोर किया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से दोबारा टैरिफ लगाने की धमकी, खासकर ग्रीनलैंड को लेकर यूरोपीय देशों से बढ़ते विवाद के कारण, वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने (Risk-off) का माहौल बन गया है।

सोना-चांदी में शिफ्ट हो रहा निवेश

फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के ट्रेजरी प्रमुख और कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार भंसाली के अनुसार, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ट्रंप के टैरिफ की वैधता पर फैसला देने वाला है, जिसका असर वैश्विक बाजारों पर पड़ सकता है। फिलहाल निवेशक जोखिम भरे एसेट्स से दूरी बनाकर सोना और चांदी जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।

मजबूत अमेरिकी डेटा से डॉलर को सपोर्ट

अमेरिका का श्रम बाजार बीते कुछ महीनों से मजबूत बना हुआ है, जिससे डॉलर को मजबूती मिली है। बाजारों को आशंका है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा बनाए रख सकता है, जिसका दबाव उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर पड़ रहा है।

FIIs की बिकवाली बना सबसे बड़ा घरेलू दबाव

देश के भीतर रुपए पर सबसे बड़ा दबाव विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली से आ रहा है। 2026 में अब तक विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार में 29,315 करोड़ रुपए से ज्यादा की शुद्ध बिकवाली कर चुके हैं। इसी वजह से रुपया एशियाई मुद्राओं में सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वालों में शामिल हो गया है।

आगे क्या संकेत?

सीआर फॉरेक्स एडवाइजर्स के मैनेजिंग डायरेक्टर अमित पाबरी के मुताबिक, अगर वैश्विक अनिश्चितता बनी रहती है और रुपया 91.07 के ऊपर टिकता है, तो यह 91.70 से 92.00 के स्तर की ओर बढ़ सकता है—जब तक कि रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया की ओर से हस्तक्षेप नहीं होता। वहीं, राहत की स्थिति में रुपए को 90.30–90.50 के स्तर पर सपोर्ट मिल सकता है।

 


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Writer

jyoti choudhary

Related News