RBI Monetary Policy: महंगाई के बीच RBI का बड़ा फैसला, रेपो रेट में नहीं किया कोई बदलाव

punjabkesari.in Friday, Apr 08, 2022 - 10:44 AM (IST)

बिजनेस डेस्कः भारतीय रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक 6 अप्रैल को शुरू हुई थी। इसके बाद RBI की तरफ से रेपो रेट को लेकर बड़ा ऐलान किया गया है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को मॉनिटरी पॉलिसी का ऐलान किया। MPC ने पॉलिसी दरों में कोई बदलाव नहीं किया है।आरबीआई ने लगातार 11वीं बार रेपो रेट 4 फीसदी पर बरकरार रखने का फैसला किया है। एमएसएफ रेट और बैंक रेट बिना किसी बदलाव के साथ 4.25% रहेगा। रिवर्स रेपो रेट में 0.40% की बढ़ोतरी की गई है, अब यह बढ़कर 3.75% हो गया है। हालांकि आरबीआई गवर्नर ने महंगाई को लेकर चिंता जरूर व्यक्त की।

रिजर्व बैंक गर्वनर ने कहा कि मार्च तक महंगाई लोगों को सताती रहेगी। इसके बाद कीमतों में गिरावट आ सकती है। रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2022 के लिए 5.3 प्रतिशत महंगाई का अनुमान, वहीं 2023 में 5 प्रतिशत महंगाई का अनुमान लगाया गया है। 

आरबीआई गवर्नर ने कहा कि भारत दुनिया के अन्य देशों के मुकाबले अलग रास्ते पर चल रहा है। आईएमएफ के अनुमानों के अनुसार भारत प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में साल-दर-साल सबसे तेज गति से बढ़ने की ओर अग्रसर है। यह रिकवरी बड़े पैमाने पर टीकाकरण और निरंतर वित्तीय और मौद्रिक सहायता के चलते प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2022-23 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि 7.8% अनुमानित है। 

कच्चे तेल में तेजी गंभीर चिंता का विषय
रिजर्व बैंक के सामने इस समय तमाम चुनौतियां हैं। महंगाई लगातार बढ़ रही है, रूस-यूक्रेन क्राइसिस के कारण कच्चे तेल की कीमत में तेजी जारी है जो चिंता का विषय है, ग्रोथ रेट पर दबाव बना हुआ है, अमेरिकी फेडरल रिजर्व महंगाई को कंट्रोल में करने के लिए अग्रेसिव रुख अपना चुका है और इंट्रेस्ट रेट में बढ़ोतरी को लेकर आतुर है। इसके अलावा इंपोर्ट बिल बढ़ने से डॉलर के मुकाबले रुपए में गिरावट देखी जा रही है। इन तमाम कारणों को ध्यान में रखते हुए रिजर्व बैंक को मॉनिटरी पॉलिसी को लेकर फैसला लेना होता है।

मई 2020 से इंट्रेस्ट रेट में कोई बदलाव नहीं
कोरोना महामारी के सामने आने के बाद रिजर्व बैंक ने मार्च 2020 के बाद रेपो रेट में 1.15 फीसदी की कटौती की। इंट्रेस्ट रेट में आखिरी कटौती मई 2020 को की गई थी। उसके बाद से इसमें किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है। इस समय रेपो रेट 4 फीसदी है जो 19 सालों के न्यूनतम स्तर पर है।  

महंगाई आठ महीने के उच्चतम स्तर पर
रिजर्व बैंक के लिए महंगाई का रेंज 2-6 फीसदी तक है। महंगाई की दर इससे नीचे या ऊपर होने से रिजर्व बैंक की चिंता बढ़ जाती है। जनवरी और फरवरी महीने में महंगाई की दर 6 फीसदी के अपर लिमिट को क्रॉस कर गया था। ऐसे में रिजर्व बैंक पर दबाव बना हुआ है। फरवरी महीने में खुदरा महंगाई की दर 6.07 फीसदी रही जो आठ महीने का उच्चतम स्तर है।

 


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Content Writer

jyoti choudhary

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