Credit Card यूजर्स के लिए जरूरी खबर, RBI ने बदले 3 अहम नियम
punjabkesari.in Monday, Jan 19, 2026 - 05:08 PM (IST)
बिजनेस डेस्कः भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग और पर्सनल फाइनेंस से जुड़े तीन अहम नियमों में बदलाव किया है। इन बदलावों का सीधा असर आम लोगों के क्रेडिट स्कोर, लोन की शर्तों और बैंक अकाउंट की एक्टिविटी पर पड़ेगा। RBI का मकसद सिस्टम में पारदर्शिता बढ़ाना, ग्राहकों की सुरक्षा करना और फ्रॉड के जोखिम को कम करना है।
इन नए नियमों को समझने से पहले यह जानना जरूरी है कि क्रेडिट स्कोर और CIBIL स्कोर क्या होता है, क्योंकि लोन मिलने और ब्याज दर तय करने में यही सबसे अहम भूमिका निभाता है।
क्या होता है क्रेडिट स्कोर और CIBIL स्कोर
क्रेडिट स्कोर 300 से 900 के बीच का तीन अंकों का नंबर होता है, जो आपकी लोन और क्रेडिट कार्ड पेमेंट हिस्ट्री को दर्शाता है। स्कोर जितना बेहतर होता है, बैंक उतना ही ज्यादा भरोसेमंद मानते हैं। भारत में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला स्कोर CIBIL स्कोर है, जिसे TransUnion CIBIL तैयार करता है। इसमें आपके लोन, EMI, क्रेडिट कार्ड उपयोग और डिफॉल्ट का पूरा रिकॉर्ड शामिल होता है।
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अब हर हफ्ते अपडेट होगा क्रेडिट स्कोर
अब तक क्रेडिट स्कोर महीने में एक बार अपडेट होता था लेकिन नए नियम के तहत बैंकों और फाइनेंस कंपनियों को महीने में चार बार डेटा अपडेट करना होगा यानी अब क्रेडिट स्कोर लगभग हर हफ्ते बदलेगा। समय पर EMI और कार्ड बिल भरने से स्कोर जल्दी सुधरेगा, जबकि एक भी चूक का असर तुरंत दिखेगा।
फ्लोटिंग रेट लोन पर प्रीपेमेंट चार्ज खत्म
1 जनवरी 2026 से फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन, पर्सनल लोन और ऑटो लोन पर प्रीपेमेंट या फोरक्लोजर चार्ज नहीं लगेगा। इससे ग्राहक बिना किसी पेनल्टी के लोन जल्दी चुका सकेंगे या बेहतर ब्याज दर के लिए बैंक बदल सकेंगे। इससे बैंकों के बीच प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी।
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डॉर्मेंट बैंक अकाउंट पर कड़ी निगरानी
अगर किसी बैंक अकाउंट में 12 महीने तक कोई लेनदेन नहीं होता, तो वह इनएक्टिव माना जाएगा और 2 साल तक कोई एक्टिविटी न होने पर अकाउंट डॉर्मेंट कैटेगरी में चला जाएगा। नए नियमों के तहत ऐसे अकाउंट्स की नियमित जांच, KYC अपडेट और ग्राहक को सूचना देना जरूरी होगा। इसका मकसद फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग पर लगाम लगाना है।
आम लोगों के लिए क्या बदलेगा
अब लोगों को अपने क्रेडिट स्कोर पर नियमित नजर रखनी होगी। समय पर EMI और क्रेडिट कार्ड भुगतान पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है। लोन जल्दी चुकाने पर अतिरिक्त चार्ज नहीं लगेगा, जिससे ब्याज की बचत होगी। वहीं, पुराने बैंक अकाउंट्स में समय-समय पर ट्रांजेक्शन करना जरूरी होगा, ताकि अकाउंट डॉर्मेंट न हो।
