टैक कंपनियों में छंटनी की रफ्तार बढ़ी, 2026 में 1.28 लाख हुए बेरोजगार

punjabkesari.in Friday, Sep 11, 2026 - 06:21 PM (IST)

नई दिल्ली: दुनिया की बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों में कर्मचारियों की छंटनी का सिलसिला एक बार फिर तेज होता दिख रहा है। वर्ष 2026 में अब तक दुनियाभर की 299 टैक कंपनियां 1.28 लाख से अधिक कर्मचारियों को नौकरी से हटा चुकी हैं यानी लोग बेरोजगार हो चुके है। सितंबर के पहले 10 दिनों में ही 6,300 से ज्यादा नौकरियों पर असर पड़ा है। कंपनियां लागत घटाने, संगठनात्मक ढांचे में बदलाव और कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर बढ़ते निवेश के बीच कर्मचारियों की संख्या कम कर रही हैं।

छंटनी पर नजर रखने वाले मंच लेऑफ्स डॉट एफवाईआई के अनुसार 10 सितंबर तक 299 कंपनियों में 1,28,536 कर्मचारियों की छंटनी हुई है। यह संख्या पूरे 2025 के आंकड़े से अधिक है। पिछले साल 278 टैक कंपनियों ने कुल 1,22,606 कर्मचारियों को बाहर किया था।

ओरेकल और एमेजॉन में बड़ी कटौती

इस साल अब तक सबसे अधिक छंटनी ओरेकल में हुई है, जहां करीब 21,000 कर्मचारियों की नौकरियां गई हैं। इसके बाद एमेजॉन में 17,267 और डैल में करीब 11,000 कर्मचारियों की छंटनी हुई। मेटा में 10,400, माइक्रोसॉफ्ट में 4,800 और पेपाल में 4,760 कर्मचारियों पर असर पड़ा है। ओरेकल एक ओर कर्मचारियों की संख्या घटा रही है, वहीं दूसरी ओर क्लाऊड और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े कारोबार में निवेश बढ़ा रही है।

सितंबर में उबर का बड़ा फैसला

सितंबर में छंटनी का सबसे बड़ा ऐलान उबर ने किया है। कंपनी करीब 3,300 पद समाप्त करने की तैयारी में है। उबर के मुताबिक प्रबंधन की परतें कम करके निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज करना इसका उद्देश्य है। कंपनी अपने सवारी, डिलीवरी और चालक-रहित वाहन कारोबार पर भी अधिक निवेश कर रही है।

भारत में पेपाल के 220 कर्मचारी प्रभावित

छंटनी की लहर भारत तक भी पहुंची है। पेपाल ने भारत में करीब 220 कर्मचारियों को हटाया है, जो देश में उसके कुल कार्यबल का लगभग 4 प्रतिशत है। कंपनी लागत कम करने और परिचालन दक्षता बढ़ाने पर जोर दे रही है। पेपाल इस साल के अंत तक करीब 40 करोड़ डॉलर की लागत बचाने का लक्ष्य लेकर चल रही है।

AI के साथ बदल रही नौकरियों की तस्वीर

विशेषज्ञों का कहना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता छंटनी की एक महत्वपूर्ण वजह है, लेकिन यह अकेली वजह नहीं है। टैलेंटीफाई-एक्स के संस्थापक चेतन मंगलवेधे के अनुसार मौजूदा छंटनी में करीब एक-चौथाई से एक-तिहाई नौकरियों पर ए.आई. और स्वचालन का सीधा असर माना जा सकता है। बाकी कटौती लागत घटाने, महामारी के दौरान जरूरत से अधिक भर्ती और कारोबारी ढांचे में बदलाव से जुड़ी है।

शुरूआती स्तर की सॉफ्टवेयर नौकरियों, ग्राहक सहायता और सामान्य आंकड़ा जांच जैसे कार्यों पर दबाव बढ़ रहा है। वहीं साइबर सुरक्षा, विशेष तकनीकी कौशल और उत्पाद विकास से जुड़ी नौकरियां खत्म होने के बजाय नए स्वरूप में बदल रही हैं।


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Content Writer

jyoti choudhary

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