Job Cuts: Volkswagen ने किया अब तक की सबसे बड़ी छंटनी का ऐलान, 1,00,000 नौकरियों पर लटकी तलवार

punjabkesari.in Friday, Sep 04, 2026 - 03:51 PM (IST)

Job Cuts: दुनिया की प्रमुख ऑटो कंपनियों में शामिल Volkswagen ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिसका असर पूरी ऑटो इंडस्ट्री पर पड़ सकता है। कंपनी दशक के अंत तक दुनियाभर में करीब 1 लाख नौकरियों में कटौती की योजना बना रही है। इसे Volkswagen के इतिहास के सबसे बड़े पुनर्गठन में से एक माना जा रहा है।

कंपनी के मुताबिक, करीब 50,000 नौकरियों में कटौती का फैसला पहले ही किया जा चुका है। अब लगभग 50,000 और नौकरियों में कमी की योजना है। इस तरह कुल मिलाकर कर्मचारियों की संख्या में करीब 1 लाख की कमी हो सकती है, जो Volkswagen Group के वैश्विक वर्कफोर्स का लगभग 15 फीसदी है।

चीन और EV बाजार ने बढ़ाया दबाव

Volkswagen इस समय कई चुनौतियों से जूझ रही है। अमेरिका के टैरिफ, इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग में उतार-चढ़ाव और चीन के ऑटो बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने कंपनी पर दबाव बढ़ाया है। चीन दुनिया के सबसे बड़े ऑटो बाजारों में से एक है, जहां स्थानीय इलेक्ट्रिक कार कंपनियों से Volkswagen को कड़ी टक्कर मिल रही है। बदलती बाजार परिस्थितियों और बढ़ती लागत के बीच कंपनी खर्च घटाने और अपने कारोबार को ज्यादा प्रभावी बनाने पर जोर दे रही है।

चार जर्मन प्लांट के भविष्य पर भी सवाल

नौकरियों में कटौती की योजना के बीच Volkswagen के चार जर्मन प्लांट—हैनोवर, एम्डेन, ज्विकाऊ और नेकार्सुल्म—के भविष्य को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। कंपनी और यूनियनों ने माना है कि इन प्लांट्स का लंबे समय तक भविष्य पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। हालांकि, Volkswagen ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल किसी भी प्लांट को बंद करने की मंजूरी नहीं दी गई है। यूनियन IG Metall ने भी कहा है कि किसी प्लांट को बंद करने पर अभी कोई सहमति नहीं बनी है।

2009 के GM के आंकड़े से भी बड़ी कटौती

Volkswagen की प्रस्तावित करीब 1 लाख नौकरियों की कटौती वैश्विक ऑटो इंडस्ट्री के बड़े कॉरपोरेट पुनर्गठन में शामिल हो सकती है। यह संख्या 2009 में General Motors द्वारा की गई करीब 50,000 नौकरियों की कटौती की तुलना में लगभग दोगुनी है।

कंपनी का यह कदम ऐसे समय में आया है जब वैश्विक ऑटो बाजार तेजी से बदल रहा है और पारंपरिक वाहन निर्माता कंपनियों पर इलेक्ट्रिक वाहनों, चीन की बढ़ती प्रतिस्पर्धा और लागत के दबाव से निपटने की चुनौती बढ़ रही है।
 


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Content Writer

jyoti choudhary

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