Jewellery Stocks: PM मोदी की सोना न खरीदने की अपील, गिर गए ज्वेलरी कंपनियों के शेयर
punjabkesari.in Tuesday, Sep 01, 2026 - 03:58 PM (IST)
नई दिल्लीः घरेलू शेयर बाजार में मंगलवार (1 सितंबर, 2026) को कई प्रमुख ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों में दबाव देखने को मिला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से सोने की खरीदारी को लेकर की गई अपील के बाद ज्वेलरी शेयरों में शुरुआती कारोबार से ही कमजोरी नजर आई।
प्रधानमंत्री ने लोगों से अपील की है कि जब तक बेहद जरूरी न हो, तब तक सोना खरीदने से बचें। इसके बाद निवेशकों की नजर ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों पर रही और कई प्रमुख स्टॉक्स में गिरावट दर्ज की गई।
Kalyan Jewellers में सबसे ज्यादा गिरावट
ज्वेलरी शेयरों में Kalyan Jewellers में सबसे ज्यादा कमजोरी देखी गई। कंपनी का शेयर 6.63 प्रतिशत गिरकर 573.65 रुपए पर बंद हुआ।
- Titan Company: 1.58 प्रतिशत गिरकर 5035 रुपए
- Thangamayil Jewellery: 1.47 प्रतिशत की गिरावट के साथ 5,331.85 रुपए
- Sky Gold & Diamonds: 3.16 प्रतिशत गिरकर 781 रुपए
- PC Jeweller: करीब 6.36 प्रतिशत नीचे बंद हुआ।
ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों में इस गिरावट के पीछे बाजार में सोने की मांग और भविष्य की बिक्री को लेकर बनी चिंताओं को भी एक कारण माना जा रहा है।
PM मोदी ने Instagram पर किया पोस्ट
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Instagram पर एक पोस्ट के जरिए लोगों से 'स्वदेशी' और 'वोकल फॉर लोकल' को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने लोगों से विदेश में केवल घूमने या शादी समारोह आयोजित करने के लिए जाने से बचने और भारत में ही शादी समारोह आयोजित करने का आग्रह किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में बने उत्पादों को प्राथमिकता देने और आत्मनिर्भरता पर जोर देने से भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी।
भारत सरकार ने 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने का लक्ष्य रखा है। यह वही वर्ष होगा जब देश की आजादी के 100 साल पूरे होंगे।
पहले भी विदेशी मुद्रा बचाने की अपील कर चुके हैं PM मोदी
प्रधानमंत्री मोदी इससे पहले भी लोगों से विदेशी मुद्रा की बचत करने और देश में उपलब्ध विकल्पों को प्राथमिकता देने की अपील कर चुके हैं।
10 मई को मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच उन्होंने लोगों से ऐसे कई उपाय अपनाने को कहा था, जिनसे देश की विदेशी मुद्रा की बचत हो सके। इनमें सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल को बढ़ावा देना भी शामिल था। इसका उद्देश्य पेट्रोलियम ईंधन की खपत कम करना था, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात के जरिए पूरा करता है।
