Middle East impact: बाजार खुलते ही निवेशकों के डूबे ₹5 लाख करोड़, ऑटो-बैंकिंग शेयरों पर सबसे ज्यादा मार

punjabkesari.in Thursday, Mar 12, 2026 - 10:55 AM (IST)

बिजनेस डेस्कः पश्चिम एशिया में गहराते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। गुरुवार सुबह बाजार खुलते ही तेज बिकवाली देखने को मिली और कुछ ही सेकंड में निवेशकों के करीब ₹5 लाख करोड़ रुपए बाजार से साफ हो गए। भारी बिकवाली के दबाव में प्रमुख सूचकांक तेजी से नीचे फिसल गए और बाजार का माहौल पूरी तरह नकारात्मक हो गया।

BSE Sensex अपने पिछले बंद स्तर 76,863.71 के मुकाबले 494.06 अंक गिरकर 76,369.65 पर खुला। बाजार खुलने के बाद गिरावट और तेज हो गई और सुबह करीब 9:15 बजे सेंसेक्स 915.72 अंक (1.19%) लुढ़ककर 75,947.99 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं Nifty 50 भी दबाव में रहा। निफ्टी 192 अंकों की कमजोरी के साथ 23,674.85 पर खुला और शुरुआती कारोबार में यह 264.85 अंक (1.11%) गिरकर 23,602.00 के स्तर पर आ गया। बाजार के लगभग सभी सेक्टरों में बिकवाली का दबाव देखने को मिला और ज्यादातर शेयर लाल निशान में कारोबार करते नजर आए।

दिग्गज कंपनियों के शेयरों में भी गिरावट

बाजार की इस गिरावट में कई बड़ी कंपनियों के शेयर भी दबाव में आ गए।

  • Reliance Industries का शेयर करीब 0.51% गिरकर ₹1383.95 पर आ गया।
  • HDFC Bank 0.65% टूटकर ₹828.55 पर पहुंच गया, जबकि Bharti Airtel 0.58% गिरकर ₹1795.60 पर कारोबार करता दिखा।

इसके अलावा ITC, Infosys, Tata Consultancy Services और Asian Paints जैसे प्रमुख आईटी और एफएमसीजी शेयरों में भी कमजोरी देखी गई।

ऑटो, बैंकिंग और मेटल सेक्टर पर सबसे ज्यादा असर

Maruti Suzuki, State Bank of India, Kotak Mahindra Bank और Axis Bank के शेयरों में 1.5% से 1.74% तक की गिरावट दर्ज की गई। वहीं IndiGo का शेयर करीब 2.94% और Larsen & Toubro लगभग 2.56% तक टूट गया। हालांकि इस गिरावट के बीच Tech Mahindra और HCLTech जैसे कुछ आईटी शेयरों में मामूली तेजी देखने को मिली।

विदेशी बाजारों से भी नकारात्मक संकेत

गिरावट की एक बड़ी वजह वैश्विक बाजारों में आई कमजोरी भी रही। एशियाई बाजारों में भी भारी दबाव देखने को मिला। जापान का Nikkei 225 करीब 848 अंक (1.54%) गिर गया। वहीं हांगकांग का Hang Seng Index और दक्षिण कोरिया का KOSPI भी 1% से ज्यादा की गिरावट के साथ कारोबार करते दिखे।

वैश्विक तनाव और विदेशी बाजारों से मिले कमजोर संकेतों के चलते फिलहाल निवेशकों की नजर आगे आने वाले अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों और बाजार की दिशा पर टिकी हुई है।
 


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Content Writer

jyoti choudhary

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