भारत के बैंकिंग सेक्टर को मिलेगी मजबूती, जापान के SMBC को सब्सिडियरी खोलने की मंजूरी
punjabkesari.in Thursday, Jan 15, 2026 - 01:29 PM (IST)
बिजनेस डेस्कः देश के बैंकिंग सेक्टर के लिए आने वाला समय और मजबूत होने वाला है। इस बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक बड़ा फैसला लेते हुए जापान के सुमितोमो मित्सुई बैंकिंग कॉरपोरेशन (SMBC) को भारत में पूरी तरह से अपनी कंपनी यानी Wholly Owned Subsidiary (WOS) खोलने के लिए शुरुआती मंजूरी दे दी है। यह जानकारी आरबीआई ने 14 जनवरी को दी।
केंद्रीय बैंक ने बताया कि यह मंजूरी वर्ष 2025 के नियमों के तहत दी गई है, जिनके तहत विदेशी बैंकों को भारत में पूरी तरह से स्वामित्व वाली सब्सिडियरी खोलने की अनुमति है। फिलहाल SMBC भारत में ब्रांच मोड के जरिए काम कर रहा है और नई दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और बेंगलुरु में इसकी चार शाखाएं हैं। अब इन शाखाओं को WOS में बदलने की शुरुआती अनुमति दे दी गई है।
कब मिलेगा बैंकिंग लाइसेंस
RBI ने स्पष्ट किया है कि बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 22(1) के तहत SMBC को WOS के रूप में बैंकिंग कारोबार शुरू करने का अंतिम लाइसेंस बाद में दिया जाएगा। यह लाइसेंस तभी मिलेगा जब बैंक आरबीआई द्वारा तय की गई सभी शर्तों और नियमों का पूरी तरह पालन करेगा।
भारत में सब्सिडियरी बैंक बनने से SMBC को अपने कारोबार में ज्यादा लचीलापन और स्वतंत्रता मिलेगी, जिससे वह भारतीय बाजार में अपनी सेवाओं का विस्तार कर सकेगा।
भारत को होंगे कई बड़े फायदे
SMBC जैसी बड़ी जापानी बैंक की भारत में मौजूदगी से जापान से निवेश और पूंजी प्रवाह को बढ़ावा मिलेगा। भारत-जापान के बीच कारोबार करने वाली कंपनियों को बेहतर फाइनेंस, लोन और ट्रेजरी सेवाएं मिलेंगी।
इसके अलावा विदेशी बैंक के लोकल सब्सिडियरी बनने से बैंकिंग सेक्टर में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, जिससे सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा। नई शाखाओं के खुलने से बैंकिंग और उससे जुड़े क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। WOS मॉडल से विदेशी बैंक भारत में ज्यादा जवाबदेह होंगे, जिससे बैंकिंग सिस्टम और अधिक सुरक्षित बनेगा। साथ ही जापानी कंपनियों के भारत में चल रहे और आने वाले प्रोजेक्ट्स को फंडिंग भी आसान होगी।
क्या होती है WOS?
Wholly Owned Subsidiary (WOS) वह कंपनी या बैंक होता है, जिसकी 100 प्रतिशत हिस्सेदारी उसकी मूल कंपनी के पास होती है। भारत में यह एक अलग कानूनी इकाई के रूप में काम करती है और देश के सभी कानूनों और नियमों का पालन करती है। WOS मॉडल के तहत कंपनी को कारोबार बढ़ाने, शाखाएं खोलने और फैसले लेने की ज्यादा आजादी मिलती है, जबकि जोखिम सीमित दायरे में रहता है।
