देश में बढ़ी खुदरा महंगाई दर, खाने-पीने की वस्तुएं हुईं महंगी

2020-01-13T19:22:14.58

बिजनेस डेस्क: सब्जियों और दालों की आसमान छूती कीमतों के बीच दिसंबर 2019 में खुदरा महँगाई दर साढ़े पाँच साल के उच्चतम स्तर 7.35 प्रतिशत पर पहुँच गयी जबकि खाद्य पदार्थों की खुदरा महँगाई दर छह साल से ज्यादा के उच्चतम स्तर 14.12 फीसदी पर रही। ओवरऑल खुदरा महँगाई दर लगातार पाँचवें महीने बढ़ी है। गत दिसंबर का इसका स्तर जुलाई 2014 के बाद सर्वाधिक है। खाद्य खुदरा महँगाई की दर लगातार 10वें महीने बढ़ी है जबकि फरवरी 2019 में यह ऋणात्मक थी। यह नवंबर 2013 के बाद उच्चतम स्तर पर पहुँच चुकी है। देश में आर्थिक सुस्ती की बात स्वीकार चुकी सरकार के लिए महँगाई के आँकड़े चिंताजनक हैं।
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मोदी सरकार के कार्यकाल में यह पहला मौका है जब खाने-पीने की चीजों के दाम इस कदर बढ़े हैं। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा सोमवार को जारी आँकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2019 में सब्जियों की महँगाई दर 60.50 प्रतिशत पर रही। इसका मतलब यह है कि दिसंबर 2018 की तुलना में पिछले महीने सब्जियों के दाम 60.50 फीसदी बढ़े। दालों एवं इनसे बने उत्पादों की महँगाई दर 15.44 प्रतिशत रही। यह लगातार दूसरा महीना है जब खाद्य पदार्थों की महँगाई दर दहाई अंक में रही है। नवंबर 2019 में खाद्य खुदरा महँगाई दर 10.01 प्रतिशत रही थी।
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एक साल पहले दिसंबर 2018 में यह दर 2.65 प्रतिशत ऋणात्मक रही थी। खाद्य महँगाई दर को सम्मिलित करते हुये ओवरऑल खुदरा महँगाई दर नवंबर 2019 में 5.54 प्रतिशत और दिसंबर 2018 में 2.11 प्रतिशत रही थी। ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में दिसंबर 2018 में लोग महँगाई से एक समान परेशान रहे। खुदरा महँगाई की दर ग्रामीण इलाकों में 7.26 प्रतिशत और शहरी इलाकों में 7.46 प्रतिशत रही। खाद्य खुदरा महँगाई दर ग्रामीण इलाकों में 12.97 प्रतिशत और शहरी इलाकों में 16.12 प्रतिशत रही।
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