Cyber Fraud पर RBI का बड़ा कदम, अब 60 दिन से ज्यादा फ्रीज नहीं होगा बैंक अकाउंट
punjabkesari.in Monday, Sep 14, 2026 - 06:03 PM (IST)
नई दिल्लीः साइबर फ्रॉड के मामलों में जांच के दौरान बैंक अकाउंट पर रोक लगने से आम ग्राहकों और कारोबारियों को कई बार बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ता है। खासकर तब, जब किसी व्यक्ति के खाते में गलती से ऐसे अकाउंट से पैसा आ जाता है, जो बाद में साइबर फ्रॉड से जुड़ा पाया जाता है। ऐसी स्थिति में कई बार खाताधारक का अपना पैसा भी अटक जाता है।
ग्राहकों की इसी परेशानी को कम करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) एक नया फ्रेमवर्क प्रस्तावित कर रहा है। प्रस्ताव के तहत साइबर फ्रॉड की जांच के दौरान लगाए गए अस्थायी अकाउंट होल्ड को अधिकतम 60 दिनों तक सीमित करने की बात कही गई है। अगर इस अवधि के भीतर सक्षम अदालत से आगे रोक जारी रखने का औपचारिक आदेश नहीं मिलता है, तो बैंक को अस्थायी होल्ड हटाना होगा और ग्राहक को खाते का इस्तेमाल करने की अनुमति देनी होगी।
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पूरे बैंक अकाउंट को फ्रीज करने के बजाय विवादित रकम पर रोक
प्रस्तावित व्यवस्था का एक अहम पहलू यह है कि साइबर फ्रॉड की जांच में पूरे बैंक अकाउंट को ब्लॉक करने के बजाय सिर्फ संदिग्ध या विवादित रकम पर लियन लगाया जाए।
उदाहरण के तौर पर, अगर किसी खाते में 2 लाख रुपए हैं और जांच में सिर्फ 30 हजार रुपए के लेनदेन पर संदेह है, तो पूरे 2 लाख रुपए को फ्रीज करने के बजाय सिर्फ 30 हजार रुपए पर रोक लगाई जा सकती है। बाकी रकम का इस्तेमाल ग्राहक सामान्य तरीके से कर सकेगा।
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60 दिन के बाद जरूरी होगी न्यायिक निगरानी
प्रस्ताव के मुताबिक, जांच एजेंसी को अस्थायी होल्ड की अवधि के दौरान जरूरी कार्रवाई करनी होगी। यदि 60 दिनों के भीतर अदालत से आगे रोक जारी रखने का आदेश नहीं मिलता है, तो बैंक को होल्ड हटाना होगा। इसका मतलब यह होगा कि केवल जांच लंबी चलने के कारण किसी ग्राहक का बैंक अकाउंट अनिश्चित अवधि तक बंद नहीं रखा जा सकेगा। 60 दिन के बाद रोक जारी रखने के लिए न्यायिक आदेश जरूरी होगा।
निर्दोष ग्राहकों को मिलेगी राहत
साइबर फ्रॉड में रकम अक्सर कई बैंक खातों के जरिए एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर होती है। ऐसे में फ्रॉड की मूल रकम से जुड़े कई खातों की जांच हो सकती है। इनमें ऐसे ग्राहक और कारोबारी भी शामिल हो सकते हैं, जिन्हें लेनदेन के पीछे चल रहे फ्रॉड की जानकारी नहीं होती। पूरे अकाउंट को फ्रीज करने के बजाय केवल संदिग्ध रकम पर रोक लगाने से ऐसे ग्राहकों को राहत मिल सकती है। वे अपनी बाकी रकम से रोजमर्रा के खर्च और कारोबार से जुड़े भुगतान जारी रख सकेंगे।
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बैंकों और जांच एजेंसियों के लिए एक समान व्यवस्था
प्रस्तावित फ्रेमवर्क में बैंकों, साइबर क्राइम पोर्टल और जांच एजेंसियों के बीच डिजिटल तरीके से जानकारी साझा करने की प्रक्रिया को भी व्यवस्थित करने पर जोर दिया जा सकता है। इसका उद्देश्य साइबर फ्रॉड से जुड़े मामलों में कार्रवाई को तेज और ज्यादा एकरूप बनाना है।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि फिलहाल यह RBI का प्रस्तावित फ्रेमवर्क है। इसे अंतिम नियम नहीं माना जा सकता। प्रस्ताव लागू होने के बाद ही इसकी अंतिम शर्तें, समयसीमा और प्रक्रिया स्पष्ट होंगी।
