HDFC Bank पर 54,315 करोड़ का डिफॉल्ट बोझ, 4,900 से ज्यादा केस लंबित

punjabkesari.in Thursday, Apr 09, 2026 - 01:36 PM (IST)

बिजनेस डेस्कः देश के प्रमुख निजी बैंकों में शामिल HDFC Bank पर बड़े डिफॉल्ट का बोझ बढ़ता नजर आ रहा है। TransUnion CIBIL के आंकड़ों के अनुसार, फरवरी 2026 तक बैंक पर 54,315 करोड़ रुपए के बड़े डिफॉल्टर का बकाया है, जबकि 4,914 रिकवरी मामले अभी भी लंबित हैं।

कौन हैं सबसे बड़े डिफॉल्टर?

HDFC बैंक का सबसे बड़ा डिफॉल्टर दिल्ली की Feedback Energy Distribution और उससे जुड़ी कंपनी Feedback Infra है, जिन पर कुल 1,876 करोड़ रुपए का कर्ज बकाया है। इन कंपनियों ने बैंक से 17 लोन लिए थे और फिलहाल दिवालिया प्रक्रिया का सामना कर रही हैं।

दूसरे स्थान पर तमिलनाडु की Sree Rengaraj Ispat Industries है, जिस पर 1,764 करोड़ रुपए का बकाया है।

इसके अलावा प्रमुख डिफॉल्टर्स में शामिल हैं.....

  • Riverbank Developers (1,572 करोड़ रुपए)
  • Karvy Stock Broking (1,558 करोड़ रुपए)
  • Tycoons Avanti Projects (1,085 करोड़ रुपए)
  • Indian Technomac (1,024 करोड़ रुपए)
  • Daewoo Motors India Limited (1,023 करोड़ रुपए)

600–1000 करोड़ के बीच भी कई बड़े डिफॉल्टर

600 से 1,000 करोड़ रुपए के दायरे में भी कई कंपनियां डिफॉल्ट कर चुकी हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • Gupta Power Infrastructure (976 करोड़ रुपए)
  • Tridhaatu Ventures (903 करोड़ रुपए)
  • Camson Bio Technologies (854 करोड़ रुपए)
  • CMI Limited (758 करोड़ रुपए)

ये सभी कंपनियां फिलहाल दिवालिया या लिक्विडेशन प्रक्रिया में हैं।

ICICI और Axis Bank से तुलना

बड़े निजी बैंकों में तुलना करें तो ICICI Bank के पास सबसे ज्यादा 2.78 लाख करोड़ रुपए का डिफॉल्टर एक्सपोजर है। वहीं Axis Bank के पास 66,338 करोड़ रुपए और HDFC बैंक के पास 54,315 करोड़ रुपए का बड़ा डिफॉल्ट लोड है।

हजार करोड़ से ज्यादा डिफॉल्ट वाली कंपनियां

ICICI बैंक के पास 1,000 करोड़ रुपए से अधिक डिफॉल्ट करने वाली 42 कंपनियां हैं, जबकि Axis बैंक के पास 10 और HDFC बैंक के पास 7 ऐसी कंपनियां हैं।

क्या होता है बड़ा डिफॉल्टर?

बड़े डिफॉल्टर वे होते हैं, जिन पर 1 करोड़ रुपए से अधिक का कर्ज बकाया होता है और जिनके खिलाफ बैंक विभिन्न अदालतों में सिविल मुकदमे चला रहे होते हैं।

यह आंकड़े दिखाते हैं कि बैंकिंग सेक्टर में डिफॉल्ट की समस्या अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, हालांकि निजी बैंकों ने अपने जोखिम को कुछ हद तक नियंत्रित रखा है।
 


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Content Writer

jyoti choudhary

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