Sone-Chandi ka Bhav: एक हफ्ते में ₹12,700 से ज्यादा टूटा सोने का भाव, चांदी में ₹29645 की गिरावट

punjabkesari.in Saturday, Mar 21, 2026 - 04:15 PM (IST)

बिजनेस डेस्कः वैश्विक आर्थिक संकेतों और भू-राजनीतिक तनाव के बीच सोने और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई है। बीते कई महीनों में पहली बार बुलियन बाजार में इतनी बड़ी कमजोरी देखने को मिली है। विशेषज्ञों के मुताबिक, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और मध्यपूर्व में बढ़ते तनाव ने सोने-चांदी पर दबाव बढ़ाया है। साथ ही, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख ने ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों को झटका दिया है, जिससे निवेशकों का रुझान कीमती धातुओं से कम हुआ है।

जनवरी के बाद सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट

शुक्रवार को सोने का भाव गिरकर करीब 1,45,570 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। इस हफ्ते अब तक सोने की कीमतों में लगभग 12,766 रुपए की गिरावट दर्ज की गई है, जो जनवरी 2026 के बाद सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट है।

मार्च महीने में अब तक सोना करीब 15,330 रुपए तक टूट चुका है। यदि महीने के अंत तक यह गिरावट जारी रहती है, तो यह पिछले 15 महीनों में पहला ऐसा मौका होगा जब पूरे महीने सोने में लगातार गिरावट दर्ज होगी।

चांदी भी दबाव में, हजारों रुपए की गिरावट

सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी बड़ी गिरावट देखने को मिली है। शुक्रवार को चांदी का भाव करीब 2,28,871 रुपए प्रति किलोग्राम रहा। इस हफ्ते चांदी की कीमतों में लगभग 29,645 रुपए की गिरावट आई है। इससे पहले जनवरी के आखिरी हफ्ते में चांदी में 69,047 रुपए की बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी, जो हाल के समय की सबसे बड़ी गिरावटों में से एक थी।

क्यों कमजोर पड़ा सोना-चांदी?

विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी डॉलर और ट्रेजरी यील्ड में तेजी ने सोने और चांदी की मांग को प्रभावित किया है। मजबूत डॉलर के कारण अन्य मुद्राओं में सोना-चांदी खरीदना महंगा हो जाता है, जिससे इनकी कीमतों पर दबाव बनता है।

इसके अलावा, कच्चे तेल की कीमतें चार साल के उच्च स्तर पर पहुंच चुकी हैं, जिससे वैश्विक महंगाई बढ़ने की आशंका है। महंगाई को नियंत्रित करने के लिए दुनिया भर के केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में सख्ती बरत रहे हैं।

ग्लोबल सेंट्रल बैंकों का सख्त रुख

ऑस्ट्रेलिया के रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी की है, जबकि यूरोपियन सेंट्रल बैंक, स्विस नेशनल बैंक और बैंक ऑफ जापान ने भी दरों में कटौती की संभावनाओं को कम बताया है। इससे बाजार में लिक्विडिटी घटने और निवेशकों के रुख में बदलाव देखने को मिल रहा है।
 


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Content Writer

jyoti choudhary

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