2022 के बाद कच्चे तेल में तेज उछाल, कीमतें 125 डॉलर के पार, सताने लगा महंगाई का डर
punjabkesari.in Thursday, Apr 30, 2026 - 01:37 PM (IST)
बिजनेस डेस्कः वैश्विक बाजार में गुरुवार को कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव तथा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में नाकेबंदी जैसी स्थिति के कारण सप्लाई बाधित हुई, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें करीब 7% तक बढ़ गईं। इसके चलते कच्चा तेल 125 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जो 2022 के मध्य के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। आइए जानतें हैं क्यों आ रहा है कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और भारत पर क्या होगा असर?
तेल की कीमतों में तेज उछाल
ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) जून डिलीवरी के लिए 7% बढ़कर 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। वहीं WTI 3.3% की तेजी के साथ 110 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा। सुबह के सत्र में भी दोनों बेंचमार्क मजबूत बने रहे।
क्यों बढ़ रही हैं कीमतें?
1. भू-राजनीतिक तनाव
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने और होर्मुज जलडमरूमध्य में नाकेबंदी की आशंका से सप्लाई बाधित हुई है।
2. वार्ता में विफलता
दोनों देशों के बीच परमाणु समझौते को लेकर बातचीत में कोई प्रगति नहीं हुई, जिससे अनिश्चितता और बढ़ गई है।
3. सख्त बयानबाजी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए सख्त रुख अपनाया है, जिससे वैश्विक बाजारों में घबराहट बढ़ी है।
भारत पर असर
भारत अपनी जरूरत का 80% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में कीमतों में यह तेजी देश पर सीधा असर डालेगी। इससे पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं, महंगाई पर दबाव बढ़ेगा और विदेशी मुद्रा भंडार पर भी असर पड़ सकता है।
आगे क्या हो सकता है?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तनाव जारी रहता है तो कच्चा तेल और महंगा हो सकता है। अनुमान के अनुसार कीमतें निकट भविष्य में 110 डॉलर से 150 डॉलर प्रति बैरल के बीच रह सकती हैं।
