Black Monday: शेयर बाजार धड़ाम, 719 अंक टूटा सेंसेक्स, क्यों आई बाजार में गिरावट?
punjabkesari.in Monday, Jun 08, 2026 - 03:33 PM (IST)
बिजनेस डेस्कः सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में कोहराम मच गया। दिनभर लाल निशान पर कारोबार करते सेंसेक्स-निफ्टी गिरावट के साथ बंद हुए। सेंसेक्स 719.08 अंक लुढ़क कर 73,524.26 के स्तर पर पहुंच गया। निफ्टी में भी 243.70 अंकों की गिरावट आई, ये 23,123 के लेवल पर बंद हुआ। इस गिरावट से निवेशकों के लाखों करोड़ रुपए डूब गए।
इस बड़ी गिरावट के पीछे कारण...
अमेरिका-ईरान में बढ़ता सैन्य तनाव
शेयर बाजार में गिरावट का सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव है। ईरान द्वारा इजरायल पर दागी गई मिसाइलों और बदले में इजरायल की सैन्य कार्रवाई ने अमेरिका और ईरान के बीच सीधे टकराव की स्थिति पैदा कर दी है। इस युद्ध जैसी स्थिति से वैश्विक निवेशकों में डर का माहौल है, जिस कारण निवेशक भारत से अपना पैसा निकाल रहे हैं।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी
युद्ध की आशंका के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 3.29% उछलकर 96.15 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है, महंगे तेल का सीधा मतलब है, भारत का बढ़ता चालू खाता घाटा, सरकारी कंपनियों पर सब्सिडी का बोझ और देश में महंगाई का बढ़ना है।
विदेशी बाजारों में भी भारी गिरावट
एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी, जापान का निक्की 225, चीन का एसएसई कम्पोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग गिरावट के साथ कारोबार कर रहे हैं। अमेरिकी बाजार शुक्रवार को भारी गिरावट के साथ बंद हुए थे। दक्षिण कोरिया का बाजार 9 फीसदी से अधिक लुढ़क गया जिसके बाद 20 मिनट तक ट्रेडिंग रोकनी पड़ी। जापान के निक्केई में 5 फीसदी और हॉन्ग कॉन्ग के हेंग सेंग में और चीन के शंघाई कंपोजिट में एक फीसदी से ज्यादा गिरावट आई।
अमेरिकी जॉब डेटा में अप्रत्याशित उछाल
हाल ही में जारी हुए अमेरिकी नॉन-फार्म पेरोल डेटा ने बाजार को चौंका दिया है। अनुमान से कहीं ज्यादा नौकरियां पैदा होने के कारण अमेरिकी लेबर मार्केट बेहद मजबूत नजर आ रहा है। सामान्य तौर पर मजबूत इकोनॉमी अच्छी बात है लेकिन शेयर बाजार के लिए यह बुरी खबर बनकर आई है, क्योंकि मजबूत अर्थव्यवस्था महंगाई को कम नहीं होने देगी।
फेड रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें खत्म
यूएस फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावना न के बराबर रह गई, बल्कि डर यह है कि फेड रिजर्व साल के अंत तक ब्याज दरें और बढ़ा सकता है। उच्च ब्याज दरों के कारण विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारतीय बाजार से लगातार बिकवाली कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें अपने देश में ही बिना रिस्क के अच्छा रिटर्न मिल रहा है।
