LPG rate Cut: जुलाई के पहले दिन बड़ी राहत, सस्ता हुआ 19 किलो वाला सिलेंडर, छोटू सिलेंडर के भी घटे दाम
punjabkesari.in Wednesday, Jul 01, 2026 - 10:30 AM (IST)
बिजनेस डेस्कः पश्चिम एशिया में तनाव कम होते ही कच्चे तेल की कीमत में गिरावट आई है। इसका असर अब भारतीय बाजार में भी दिखाई देने लगा है। जुलाई के पहले दिन सरकारी तेल कंपनियों ने 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर और 5 किलो वाले छोटू सिलेंडर की कीमतों में कटौती की है। वहीं, देश की प्रमुख निजी ईंधन रिटेलर नयारा एनर्जी ने भी पेट्रोल और डीजल की कीमतें घटा दी हैं। इसके अलावा एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) की कीमत में 5 रुपए प्रति लीटर की कमी की गई है, जिससे इसकी कीमत करीब 110 रुपए प्रति लीटर रह गई है। वहीं, 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में इस बार कोई बदलाव नहीं किया गया है।
सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 183.50 रुपए तक की कटौती की है। दिल्ली में अब इसकी नई कीमत 2,930 रुपए हो गई है। यह साल 2026 में पहली बार है जब कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम घटाए गए हैं। वहीं, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) के अनुसार 5 किलो वाले छोटू सिलेंडर की कीमत में 13 रुपए की कमी की गई है, जिसके बाद दिल्ली में इसकी कीमत 808.50 रुपए रह गई है। इससे पहले 1 जून को इस सिलेंडर के दाम 11 रुपए बढ़ाए गए थे।
प्रमुख शहरों में 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर के नए दाम
दिल्ली: ₹2,930 (₹183.50 की कमी)
मुंबई: ₹2,884 (₹183.50 की कमी)
कोलकाता: ₹3,072 (₹183.50 की कमी)
चेन्नई: ₹3,099.50 (₹183.50 की कमी)
किसे मिलेगा फायदा?
5 किलो वाले छोटू सिलेंडर की कीमत घटने से प्रवासी मजदूरों, किराए पर रहने वाले लोगों और घर से दूर पढ़ाई कर रहे छात्रों को राहत मिलेगी। यह सिलेंडर फ्री ट्रेड एलपीजी श्रेणी में आता है और इसे खरीदने के लिए केवल पहचान पत्र की जरूरत होती है, जबकि पता प्रमाण देना अनिवार्य नहीं है।
इसके अलावा, इस सिलेंडर को रिफिल कराने के लिए किसी एक निर्धारित डिस्ट्रीब्यूटर पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं होती। उपभोक्ता इसे किसी भी अधिकृत इंडेन डिस्ट्रीब्यूटर, ऑथराइज्ड आउटलेट या चुनिंदा किराना स्टोर से आसानी से रिफिल करा सकते हैं।
होटल, रेस्टोरेंट और छोटे कारोबारियों को राहत
19 किलो वाला कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर मुख्य रूप से होटल, रेस्टोरेंट, कैटरिंग सर्विस, बेकरी और अन्य खाद्य व्यवसायों में इस्तेमाल होता है। ऐसे में कीमतों में आई इस कमी से इन कारोबारों की ईंधन लागत घटेगी और परिचालन खर्च में राहत मिलेगी। हालांकि इसका फायदा ग्राहकों तक किस हद तक पहुंचेगा, यह अलग-अलग कारोबारों की मूल्य निर्धारण नीति पर निर्भर करेगा।
