सरकार को युवाओं में बढ़ती निराशा पर ध्यान देना होगा

punjabkesari.in Thursday, May 28, 2026 - 03:24 AM (IST)

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत द्वारा अपनी अदालत में बिना सोचे-विचारे की गई टिप्पणियां, जिसमें उन्होंने युवा भारतीयों को कॉकरोच के रूप में वर्णित किया जो नौकरियां न मिलने पर ‘व्यवस्था पर हमला’ करने के लिए सोशल मीडिया, पत्रकारिता और आर.टी.आई. सक्रियता की ओर रुख करते हैं, वास्तव में अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण थीं।

उनकी टिप्पणियों के कारण युवाओं में भारी आक्रोश पैदा हुआ जिसके परिणामस्वरूप सोशल मीडिया पर ‘जनता कॉकरोच पार्टी’ नामक एक ऑनलाइन व्यंग्यात्मक राजनीतिक दल का गठन हुआ, जिसने सोशल मीडिया पर लाखों फॉलोअर्स को आकर्षित किया। जस्टिस सूर्यकांत ने बाद में एक ‘स्पष्टीकरण’ जारी करते हुए कहा कि मीडिया के एक वर्ग ने उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया है और उन्होंने भारतीय युवाओं को विकसित भारत के स्तंभ कहा था।

‘‘मुझे यह पढ़कर दुख हुआ है कि कैसे मीडिया के एक वर्ग ने कल एक तुच्छ मामले की सुनवाई के दौरान की गई मेरी मौखिक टिप्पणियों को गलत तरीके से पेश किया है। मैंने विशेष रूप से उन लोगों की आलोचना की थी जिन्होंने फर्जी और जाली डिग्रियों के सहारे बार ‘कानूनी पेशे’ जैसे व्यवसायों में प्रवेश किया है। इसी तरह के लोग मीडिया, सोशल मीडिया और अन्य प्रतिष्ठित व्यवसायों में भी घुस आए हैं और इसलिए वे परजीवियों की तरह हैं। यह सुझाव देना पूरी तरह से निराधार है कि मैंने हमारे देश के युवाओं की आलोचना की। मैं न केवल हमारे वर्तमान और भविष्य के मानव संसाधन पर गर्व करता हूं, बल्कि भारत का हर युवा मुझे प्रेरित करता है’’ उन्होंने कहा। हालांकि, इस डिजिटल युग में, जो पहले से रिकॉर्ड हो चुका है उसे नकारना  बहुत कठिन है। यह मामला हो सकता है कि उन्होंने वे टिप्पणियां आवेश में आकर की थीं और उन्हें बिना शर्त स्वीकार कर लेना चाहिए था कि उनसे गलती हुई थी और वे खेद व्यक्त करते।

टिप्पणियों पर ऑनलाइन प्रतिक्रिया ने निश्चित रूप से सरकार को हिलाकर रख दिया होगा, जिसने तथाकथित पार्टी के सोशल मीडिया खातों को ब्लॉक करने का आदेश दे दिया। पार्टी के फॉलोअर्स ने वैकल्पिक खाते स्थापित करने में बहुत कम समय लिया, जिसका नाम था ‘कॉकरोचेस आर बैक’ (कॉकरोच वापस आ गए हैं)। इस पूरे घटनाक्रम से जो समझने की जरूरत है, वह युवाओं के बीच पैदा हो रही अंतर्निहित हताशा का प्रतिबिंब है जिसे सरकार देखने से इंकार कर रही है। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने वास्तव में रिकॉर्ड पर आकर कहा कि वे युवाओं के साथ बातचीत कर रहे हैं और उन्हें उनके बीच कोई हताशा नहीं मिली है! उनके विचारों के खरीदार बहुत कम होंगे।

बढ़ती बेरोजगारी या अल्प बढ़ती जीवन यापन की लागत को देखते हुए,  इसमें बिल्कुल कोई संदेह नहीं है कि युवाओं में मोहभंग बढ़ रहा है। इसके दोष का एक बड़ा हिस्सा हमारी शिक्षा प्रणाली को भी सांझा करना होगा जो जीवन कौशल और सोच पैदा करने के बजाय अंक प्राप्त करने को प्राथमिकता देना जारी रखती है। हर साल लाखों युवा कॉलेजों से बाहर आते हैं लेकिन अधिकांश एक उपयुक्त नौकरी पाने में विफल रहते हैं क्योंकि उनमें आवश्यक कौशल की कमी होती है और इसलिए भी क्योंकि आर्टिफिशियल इंटैलीजैंस के आगमन से नौकरियों का नुकसान हुआ है। एक विशेष प्रकार की नौकरियां जो कुकुरमुत्ते की तरह बढ़ रही हैं वे हैं गिग वर्कर्स जो डिलीवरी ब्वॉय के रूप में काम करते हैं। दुर्भाग्य से इन श्रमिकों के पास कोई नौकरी की सुरक्षा नहीं है और पारिश्रमिक कम है। इसके ऊपर, प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने की रिपोर्टें और बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार, बढ़ती हताशा के लिए एकदम सही नुस्खा हैं।

मुख्य न्यायाधीश द्वारा की गई टिप्पणी पर मिली व्यापक प्रतिक्रिया से सरकार को सबक लेना चाहिए। सोशल मीडिया हैंडल को प्रतिबंधित करना इस मुद्दे से निपटने का कोई तरीका नहीं है। आवाजों को दबाने से अधिक गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इसे युवाओं को कौशल प्रदान करने और रोजगार के अवसर पैदा करने पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है, साथ ही भ्रष्टाचार के लिए जीरो टॉलरैंस (शून्य सहिष्णुता) की नीति का पालन करना चाहिए। ऐसा करने में सरकार को न्यायसंगत दिखना चाहिए और उन लोगों को संरक्षण नहीं देना चाहिए जो सत्ताधारी दल में शामिल होते हैं और अपनी एजैंसियों को अपनी विचारधारा के विरोधियों के खिलाफ नहीं उतारना चाहिए। यह केवल हताशा को बढ़ाएगा और एक विस्फोटक स्थिति की ओर ले जाएगा।-विपिन पब्बी
 


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