बिजली की बढ़ती खपत और बर्बादी : चिंता का विषय

punjabkesari.in Friday, Jul 10, 2026 - 04:30 AM (IST)

गत कुछ वर्षों से भीषण गर्मी पड़ रही है और इसका प्रकोप हर साल बढ़ता जा रहा है। गर्मियों में कई इलाकों में तो तापमान 47 डिग्री सैल्सियस से भी ऊपर चला जाता है। अधिक गर्मी के कारण बिजली की खपत और डिमांड लगातार बढ़ रही है। यह बात भी सही है कि औद्योगिक क्रांति जरूरी है, क्योंकि जैसे-जैसे उद्योग अधिक लगेंगे, लोगों को रोजगार मिलेगा। जमीन का भी दाम बढ़ेगा। पर कहा जाता है कि जब कोई विकास होता है तो कुछ नुकसान भी होता है।

अगर गर्मियों में अब बिजली कुछ देर के लिए चली जाए तो बच्चे तो क्या, हम बड़े भी गर्मी सहन नहीं कर पाते क्योंकि पहले समय ऐसा होता था कि अगर गर्मियों में बिजली चली जाए तो लोग इकट्ठे होकर गलियों और बाग-बगीचों में जाकर बैठ जाते थे, मगर आज ऐसा बहुत कम है। जब बिजली कट लगते हैं तो बहुत सारे कारखानों में काम बंद हो जाता है, जिसका सारा बोझ कारखाने के मालिक पर पड़ता है। बहुत-सी दुकानें इस प्रकार के कारोबार की हैं, जिनका काम बिजली के बिना चलता ही नहीं। बिजली के कट लगने से किसानों को भी बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है।

आजकल हम सभी अपना सामाजिक स्तर ऊंचा करना या उच्च स्तर से भी और आगे का करना चाहते हैं। पहले घरों में ए.सी. नहीं होते थे, मगर अब एक कमरे में ए.सी. तो दूसरे कमरे में क्यों नहीं, को लेकर घरों और दफ्तरों में कई बार तल्खबाजी भी होती है। कोई समय था कि घर में एक ‘टेबल फैन’ आता था तो मोहल्ले के घरों में कुछ न कुछ मिठाई बांटी जाती थी और बच्चे ‘टेबल फैन’ के सामने एक लाइन में चारपाइयां लगा कर सोते थे। कई बार बच्चे ‘फैन’ के सबसे पहले वाली चारपाई पर लेटने के लिए लड़ पड़ते थे। मगर आज घरों में लगातार ए.सी. लग रहे हैं। दफ्तरों में ए.सी. की भरमार है। 

कहने का तात्पर्य यह है कि हम आजकल बिजली पर काफी निर्भर हैं। बिजली के जो कट लगते हैं, उनके लिए केवल बिजली विभाग, बिजली बोर्ड, बिजली कम्पनियों वाले या सरकार नहीं, बल्कि हम उपभोक्ता भी जिम्मेदार हैं। कई स्थानों पर तो एक स्विच से ही 2-2 पंखे या 2-2 बल्ब-ट्यूब लाइट्स आदि इकट्ठे चलते होते हैं। कई बार एक पंखे या एक ही ट्यूब लाइट की जरूरत होती है, पर बिना जरूरत के अधिक यंत्र चलने पर बिजली बर्बाद होती है। कोशिश करें कि एक स्विच से एक ही उपकरण चलाया जाए। हमें चाहिए कि बिना जरूरत बिजली बर्बाद न करें। हमें बिजली बचत हेतु आगे आना पड़ेगा। कभी भी गर्म पानी, गर्म दूध या कोई अन्य खाने वाला पदार्थ बिना ठंडा किए फ्रिज में न रखें और न ही फ्रिज में से कोई खाने वाला ठंडा पदार्थ एकदम गर्म करने के लिए गैस आदि पर रखें। कोशिश करें कि जब घर में सभी उपस्थित हों, तब इकट्ठे बैठ कर खाना खाएं। 

कई बार सॢदयों में कुछ लोग सुबह लेट उठते हैं और अगर पानी की सप्लाई समय अनुसार है, तो उठते समय तक पानी नहीं होता, तो लोग पानी गर्म करने के लिए बिजली के गीजर का इस्तेमाल करते हैं जिससे बिजली का अधिक इस्तेमाल होता है। अगर कुछ समय पहले उठते तो ताजे पानी से नहाया जा सकता था। बिजली बचत के लिए अभी बहुत कम संस्थाएं आगे आ रही हैं। बिजली विभाग आदि से संबंधित अधिकारियों द्वारा कभी-कभी ‘बिजली की बचत’ विषय पर शैक्षणिक प्रतियोगिताएं जरूर करवाई जाती हैं। मेरा बिजली की बचत का आह्वान करने का मतलब है कि हम अपने आप कुछ न कुछ बिजली अपने-अपने ढंग से जरूर बचाएं। इससे हम देश के विकास में और बिजली बचत में योगदान डालने के अलावा अपने आप में खुशी महसूस करेंगे।

कई शहरों में स्ट्रीट लाइट्स दिन में सूर्य के प्रकाश में भी जलती रहती हैं, जिससे बहुत बिजली बर्बाद होती हैं। हम जहां भी काम करते हैं वहां काम समाप्ति पर यह सुनिश्चित करें कि आखिर में जाने वाला कर्मचारी या अधिकारी बिजली के सभी उपकरणों के बंद करे। कई बार बिजली नहीं होती और काम की समाप्ति पर सभी को जाने की जल्दी होती हैं और कोई भी स्विच बंद करके नहीं जाता और बिजली आने पर कई-कई घंटे बर्बाद होती रहती हैं, जिससे कई बार उपकरण भी खराब हो जाते हैं। ऐसी लापरवाही से कई बार दुर्घटनाएं भी हो जाती हैं। घरों में भी कई बार हम लोग बिजली स्विच बंद करना भूल जाते हैं। ऐसा न करें, जागरूक नागरिक बनें। बिजली बचत की शुरुआत पहले ‘मैं’ करूंगा का संकल्प लें।-राजन शर्मा   
 


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