भारत-ई.यू. के बीच ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’
punjabkesari.in Thursday, Jan 29, 2026 - 05:39 AM (IST)
भारत -यूरोपीय संघ (ई.यू.) संबंधों में एक ऐतिहासिक मोड़ तब आया, जब नई दिल्ली में हुई भारत-ई.यू. सम्मिट के दौरान दोनों पक्षों के बीच एक अहम फ्री ट्रेड एग्रीमैंट (एफ.टी.ए.) पर बातचीत पूरी होने की औपचारिक घोषणा की गई, जिसमें यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंतोनियो कोस्टा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। यह पूरा घटनाक्रम इस बात को साफ तौर पर दिखाता है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत और दुनिया के सबसे बड़े एकल बाजार यूरोपीय संघ के बीच रणनीतिक सांझेदारी अब पहले से कहीं ज्यादा मजबूत और गहरी हो चुकी है।
प्रधानमंत्री मोदी ने एफ.टी.ए. को एक संतुलित और भविष्य को ध्यान में रखकर किया गया समझौता बताया, जो व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को नई रफ्तार देगा। उन्होंने इसे भारत के युवाओं के लिए नए अवसरों से जोड़ा, खासतौर पर व्यापार और मोबिलिटी से जुड़े समझौतों के जरिए और कहा कि आज दुनिया में भारत पर बढ़ते भरोसे के चलते ऐसे समझौते नई संभावनाएं खोल रहे हैं। यह समझौता मोदी सरकार के उस विजन के अनुरूप है, जिसमें भारत को आत्मनिर्भर बनाते हुए भी वैश्विक अर्थव्यवस्था से मजबूती से जोड़ा गया है। इस एफ.टी.ए. को वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा और यही बात यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भी दोहराई। यह समझौता मुख्य रूप से वस्तुओं, सेवाओं और व्यापार नियमों पर केंद्रित है, जबकि निवेश संरक्षण और भौगोलिक संकेतकों (ज्योग्राफिकल इंडीकेशंस) के लिए अलग-अलग ढांचे तय किए गए हैं।
इस समझौते के तहत भारत और ई.यू. के बीच होने वाले 90 प्रतिशत से अधिक व्यापारिक सामानों पर टैरिफ को कम करने या पूरी तरह खत्म करने का प्रावधान है। भारत के लिए यह समझौता खास तौर पर उन श्रम-आधारित निर्यात क्षेत्रों को बड़ा फायदा देगा, जिनमें कपड़ा, रैडीमेड गारमैंट्स, कैमिकल्स, रत्न एवं आभूषण, चमड़ा, जूते-चप्पल, फार्मास्यूटिकल्स और इलैक्ट्रिकल मशीनरी शामिल हैं-इन उत्पादों को ई.यू. बाजार में शुल्क-मुक्त या रियायती पहुंच मिलेगी। वहीं यूरोपीय संघ के लिए, इस समझौते के तहत ऑटोमोबाइल्स, वाइन, स्पिरिट्स और अन्य उत्पादों पर चरणबद्ध तरीके से टैरिफ कम किए जाएंगे। भारत की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को इस समझौते में संरक्षण दिया गया है। सेवाओं के क्षेत्र में टैलीकम्युनिकेशन, परिवहन, अकाऊंटिंग और ऑडिटिंग जैसे सैक्टर्स को खोलने का प्रावधान है।
भारत के लिए, यह समझौता वैश्विक स्तर पर बढ़ते संरक्षणवाद और अन्य देशों द्वारा लगाए जा रहे ऊंचे टैरिफ के दबाव को भी संतुलित करेगा। इस समझौते से भारत के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा, निवेश आकॢषत होगा, भारत यूरोपीय सप्लाई चेन का और मजबूत हिस्सा बनेगा और मेक इन इंडिया के तहत मैन्युफैक्चरिंग को नई ताकत मिलेगी। वहीं यूरोपीय संघ के लिए यह 1.4 अरब उपभोक्ताओं वाले विशाल भारतीय बाजार के दरवाजे खोलता है। मौजूदा भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के दौर में यह ई.यू. को कुछ चुनिंदा देशों पर अत्यधिक निर्भरता से बाहर निकलने में मदद करेगा। यह समझौता लगभग 2 अरब लोगों को कवर करने वाला एक विशाल फ्री ट्रेड एरिया बनाता है, जिसमें भारत की 1.4 अरब आबादी और यूरोपीय संघ के लगभग 45 करोड़ लोग शामिल हैं। दोनों को मिलाकर यह आर्थिक क्षेत्र वैश्विक जी.डी.पी. के करीब एक-चौथाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। फिलहाल भारत और ई.यू. के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार लगभग 124 से 136 अरब यूरो के बीच है, जिसमें भारत को व्यापारिक बढ़त हासिल है। यह एफ.टी.ए. इस व्यापार को कई गुना बढ़ाने की क्षमता रखता है।
अनुमान है कि इस समझौते से 10 लाख से अधिक नौकरियां बन सकती हैं। इसके साथ ही, यह भारत को वैश्विक व्यापार में आने वाले झटकों से निपटने के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच भी प्रदान करेगा। आॢथक लाभों से आगे बढ़कर, यह एफ.टी.ए. एक रणनीतिक पुनर्संतुलन का प्रतीक है, जो लोकतंत्र, नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था और कानून के शासन जैसी सांझी सोच पर आधारित है। संरक्षणवाद से पैदा हो रही वैश्विक अस्थिरता के बीच भारत और ई.यू. मिलकर अपनी रणनीतिक स्वायत्तता और भरोसेमंद सांझेदारी को मजबूत कर रहे हैं। इस बड़ी उपलब्धि के पीछे वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की भूमिका बेहद अहम रही। उनके नेतृत्व में भारत ने बीते 3-4 वर्षों में आक्रामक रूप से एफ.टी.ए. नीति अपनाई और लगभग 9 बड़े मुक्त व्यापार समझौते पूरे किए हैं, इनमें ई.यू. के साथ हुआ यह समझौता अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। जैसा कि वॉन डेर लेयेन ने कहा- भारत-ई.यू. संबंधों की सफलता सभी के लिए फायदेमंद है। फिलहाल कानूनी प्रक्रियाएं चल रही हैं और जल्द ही इस समझौते पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है।-शहजाद पूनावाला (राष्ट्रीय प्रवक्ता, भाजपा)
