‘दुनिया के पुलिसमैन’ के सामने झुका भारत
punjabkesari.in Sunday, Mar 08, 2026 - 03:01 AM (IST)
एक और युद्ध छिड़ गया है। इसराईल उकसाने वाला है, अमरीका जल्लाद है। इसराईल ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को विश्वास दिला दिया है कि ईरान के पास परमाणु हथियार हैं या उसने उन्हें विकसित करने का काम लगभग पूरा कर लिया है और उसने अमरीका को धमकाने की योजना बनाई है। हालांकि, ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ ने रिपोर्ट दी है कि वर्गीकृत जानकारी तक पहुंच रखने वाले अमरीकी अधिकारियों ने कथित खतरों को निराधार बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया। फिर भी, ट्रम्प ने इसराईल के साथ सांझेदारी में ईरान के खिलाफ पूर्ण पैमाने पर युद्ध शुरू कर दिया।
पुराने झूठ : ईरान के परमाणु हथियारों का कथित खतरा उसी तरह का झूठ है, जैसा ईराक के पास ‘विनाशकारी हथियारों’ का झूठ था, जिसका इस्तेमाल राष्ट्रपति बुश ने ईराक पर आक्रमण (2003) करने के लिए किया था। यह उस झूठ जैसा भी है कि मुअम्मर अल-गद्दाफी ने लीबिया में नागरिकों के नरसंहार की योजना बनाई थी, जिसे राष्ट्रपति ओबामा ने ‘मानवीय संकट को रोकने’ के लिए अमरीकी हस्तक्षेप को सही ठहराने के लिए प्रचारित किया था (2011)। ट्रम्प ने वेनेजुएला (2026) में ‘सत्ता परिवर्तन’ लाने के लिए मुनरो सिद्धांत को फिर से ईजाद किया और ईरान के खिलाफ युद्ध छेडऩे के लिए इस सिद्धांत का विस्तार किया है।
ये सैन्य हस्तक्षेप अवैध थे और हैं। अमरीका का राष्ट्रपति अमरीकी कांग्रेस के अधिकार के बिना किसी दूसरे देश के खिलाफ युद्ध की घोषणा नहीं कर सकता। ऐसे हस्तक्षेप संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के भी खिलाफ हैं। अवैध होने के अलावा, किसी भी देश के लिए दूसरे संप्रभु राष्ट्र की सत्ता बदलना नाजायज है। जिस तरह रूस द्वारा यूक्रेन के खिलाफ लड़ा जा रहा युद्ध नाजायज है, उसी तरह अमरीका द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो का अपहरण करना नाजायज था और अमरीका तथा इसराईल के लिए ईरान के अयातुल्ला खामेनेई और उनके साथी नेताओं को खत्म करना नाजायज है। भारत ने 6 दिनों के बाद ही इन मौतों पर शोक व्यक्त किया।
नेसेट (इसराईल की संसद) को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन इसराईली परिवारों के प्रति भारत की संवेदना व्यक्त की, ‘जिनकी दुनिया 7 अक्तूबर को हमास द्वारा किए गए बर्बर हमले में उजड़ गई थी।’ उन्होंने चौंकाने वाले अंदाज में आगे कहा, ‘‘भारत इस घड़ी में और इसके बाद भी, पूरी दृढ़ता और विश्वास के साथ इसराईल के साथ खड़ा है।’’ लेकिन उन्होंने गाजा में फिलिस्तीनी बस्तियों के वास्तविक विनाश के बारे में निंदा का एक शब्द भी नहीं बोला। हालांकि यह सच है कि हमास के अकारण हमले में 1,219 इसराईली मारे गए थे लेकिन यह भी सच है कि गाजा में इसराईल द्वारा 70,000 से अधिक फिलिस्तीनी मारे गए हैं।
श्री मोदी का भाषण 25 फरवरी, 2026 को दिया गया था। युद्ध 28 फरवरी को अमरीका और इसराईल द्वारा शुरू किया गया था। ईरान ने जवाबी कार्रवाई की और कई अरब देशों में अमरीकी सैन्य ठिकानों पर हमला किया। ट्रम्प ने कहा कि युद्ध 4 से 5 सप्ताह या उससे अधिक समय तक जारी रह सकता है। इसराईल को उनके समर्थन ने उन सभी संभावनाओं के दरवाजे बंद कर दिए हैं, जो भारत युद्ध को समाप्त करने या अन्य अरब देशों में इसके प्रसार को रोकने के लिए निभा सकता था। अपना नैतिक अधिकार खोकर, भारत एक अक्षम दर्शक बना हुआ है जबकि युद्ध पूरे क्षेत्र और उससे आगे, श्रीलंका के पास अंतर्राष्ट्रीय जलक्षेत्र तक फैल रहा है।
सत्ता परिवर्तन : मुख्य मुद्दा ‘सत्ता परिवर्तन’ है। किसी देश में शासन कितना भी बुरा क्यों न हो, बलपूर्वक शासन बदलना किसी दूसरे देश का काम नहीं है। उस मानक के अनुसार, 50 से अधिक देश ऐसे हैं, जहां वर्तमान सरकार बदले जाने के योग्य है। इनमें से कई तानाशाह, वास्तव में, अमरीका के मित्र और ग्राहक हैं। जून 2025 में, अमरीका ने इसराईल के उकसावे पर ‘मिडनाइट हैमर’ चलाया और 12 दिनों के बाद दावा किया कि ‘ईरान की प्रमुख परमाणु संवर्धन सुविधाएं पूरी तरह से नष्ट कर दी गई हैं।’ यदि वह दावा सच था, तो ईरान परमाणु हथियारों का भंडार कैसे कर सकता था या यूरेनियम को कैसे संवर्धित कर सकता था, जिससे अमरीका को खतरा हो? इसके अलावा, ओमान, जो ईरान और अमरीका के बीच मध्यस्थता कर रहा था, ने स्पष्ट रूप से कहा था कि ईरान ‘संवॢधत यूरेनियम के शून्य भंडारण और कभी भी परमाणु बम न रखने’ पर सहमत हो गया था। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने एक प्रासंगिक प्रश्न पूछा, ‘‘ईरान में परमाणु हथियारों के सबूत कहां हैं?’’ अतीत में अमरीका द्वारा शुरू किए गए कुछ अन्य युद्धों की तरह, ईरान के खिलाफ युद्ध भी एक असत्य पर आधारित है।
इसराईल ईरान का कट्टर दुश्मन है और इसका उल्टा भी सच है। अमरीका ने ईराक और लीबिया से इसराईल के खतरों को लगभग खत्म कर दिया है। इसराईल ने, कम से कम फिलहाल के लिए, सऊदी अरब के साथ शांति बना ली है। मध्य पूर्व में एकमात्र प्रमुख शक्ति बनने के इसराईल के रास्ते में केवल ईरान खड़ा था। इसराईल ने अमरीका को ईरान में सत्ता परिवर्तन लाने और ईरान को एक अधीनस्थ राज्य बनाने के लिए फुसलाया। यह एक घृणित सिद्धांत है। शासन कितना भी बुरा क्यों न हो, शासन बदलना उस देश के लोगों का एकमात्र अधिकार है। अमरीका और इसराईल द्वारा सफलता के बढ़ा-चढ़ाकर दावे किए जा रहे हैं। एक सम्मानित इसराईली संवाददाता एलन मिजराही का नजरिया अलग है। यह बिना सैनिकों वाला युद्ध है। मशीनें मशीनों से लड़ रही हैं। वे मशीनें जीतेंगी, जो सबसे घातक हैं और जिनकी आपूर्ति अंतहीन है।
भारत की गरिमा कम हुई : पूरे क्षेत्र में बढ़ती हिंसा और विनाश के बीच, भारत जिसके इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण हित-मानवीय, आर्थिक और राजनीतिक-हैं, अलग-थलग पड़ गया है। ईरान ने जॉर्डन, कुवैत, बहरीन, कतर, सऊदी अरब, यू.ए.ई. और ईराक में अमरीकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। इस क्षेत्र में 1 करोड़ भारतीय हैं। भारत के तेल, निर्यात और अन्य आॢथक हित जुड़े हैं। उसने ईरान के चाबहार बंदरगाह में 370 मिलियन अमरीकी डॉलर निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है। इन हितों के बावजूद, भारत बिना किसी आवाज या प्रभाव के है और यह सब इसराईल के उद्देश्यों के प्रति भारत के सिद्धांतहीन समर्थन के कारण है।-पी. चिदम्बरम
