नीतियां सुनने में अच्छी लेकिन अमल में फिसड्डी

punjabkesari.in Wednesday, Feb 16, 2022 - 06:32 AM (IST)

देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने चुनाव प्रचार के दौरान सैंकड़ों बार कहा है कि प्रधानमंत्री की आयुष्मान भारत योजना के तहत राज्य के करोड़ों लोगों, जिसमें गरीबों के लिए 5 लाख रुपए तक का स्वास्थ्य बीमा मुफ्त है, को कार्ड दिया गया, लेकिन एक बार भी उन्होंने यह नहीं बताया कि 2 साल से दुनिया को हिला देने वाले कोरोना काल में इस योजना के तहत कितने गरीबों का इलाज किया गया। पांच में से उत्तर भारत के तीन राज्यों- यू.पी., पंजाब और उत्तराखंड में चुनाव हो रहे हैं। इनमें से एक के भी मुख्यमंत्री ने यह आंकड़ा नहीं दिया कि कोरोना में कितने लोगों का इलाज इस योजना के तहत किया गया। 

आखिर इसकी वजह क्या है कि देश में आईं तमाम स्कीमें, जिनके नाम हिंदी व्याकरण के अलंकारों से ऐसे सजे थे, लिहाजा सुनने में अच्छे लगे, जैसे ‘मेक इन इंडिया’, ‘स्टार्टअप इंडिया’,  ‘स्किल इंडिया’, ‘जन-धन योजना’, ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’, ‘प्रधानमंत्री श्रमयोगी मानधन योजना’, ‘पी.एम. केयर्स’, ‘आरोग्य सेतु’, ‘आयुष्मान भारत’, ‘स्वच्छ भारत’, अंग्रेजी योजना के हर शब्द के प्रथम अक्षर को मिला कर खास कुशलता से बनाई गई योजना-उमंग (यूनिफाइड एप्लीकेशन फॉर न्यू एज गवर्नैंस), प्रसाद (पिल्ग्रिमेज रेजूवेनेशन एंड स्प्रिचुएलिटी आगमैंटेशन ड्राइव), आत्मनिर्भर भारत अभियान और फिर आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत अभियान आदि। सूची बहुत ल बी है, पर इन 7 वर्षों के मोदी शासन काल में इनका हश्र क्या हुआ?    

कोरोना और आयुष्मान : दो साल की कोरोना महामारी में केंद्र सरकार की लैगशिप योजना ‘आयुष्मान भारत’, जिसमें 12 करोड़ परिवारों के 56 करोड़ लोगों को 5 लाख रुपए तक के मुफ्त स्वास्थ्य बीमा का वादा था, उत्तर भारतीय राज्यों की अक्षमता के कारण असफल हो रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार कोरोना की तीन लहरों में देश में 4 करोड़ मरीज थे, लेकिन इस योजना के तहत विगत जनवरी तक केवल 8.25 लाख (0.5 प्रतिशत) लोगों का इलाज हुआ। इनमें 5 लाख मरीज दक्षिण व पश्चिम भारत के केवल तीन राज्यों-कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र के थे, जबकि उत्तर भारत के 10 राज्य ऐसे हैं, जिन्होंने जून 2021 तक एक भी व्यक्ति का इस योजना के तहत मुफ्त इलाज नहीं किया। सबसे बड़ी आबादी वाले यू.पी. में केवल 875 और तीसरे सबसे बड़े राज्य लेकिन सबसे गरीब बिहार में केवल 18 लोगों का इलाज ही इस योजना के तहत हुआ। 

इन आंकड़ों के मुताबिक अगर इस योजना में उपरोक्त 3 राज्यों के इलाज वाले मरीजों को घटा दिया जाए तो  90 करोड़ से ज्यादा आबादी वाले उत्तर भारत में केवल 3 लाख कोरोना रोगियों को इस योजना का लाभ मिला। यानी देश में हर 200 कोरोना रोगियों में केवल एक को ही योजना के तहत मुफ्त इलाज मिल सका। इसका सीधा मतलब है कि राज्यों की अक्षम सरकारें अच्छी और कल्याणकारी योजनाओं को भी अमल में लाने में कोताही बरतती हैं।  इसके उलट इन तीन दक्षिण भारतीय राज्यों में आयुष्मान कार्ड धारक रोगियों पर औसत 50,000 रुपए खर्च किए गए। 

इसका मतलब है कि उत्तर भारत के करोड़ों गरीबों को मजबूर किया गया कि वे या तो इलाज के बिना मौत का सामना करें या फिर घर-द्वार और खेत बेच कर इलाज करवाएं। इस योजना को अब करीब 4 साल होने को हैं, लेकिन अभी तक केवल कुल 56 करोड़ सुपात्र लोगों में 22 करोड़ के ही कार्ड बन सके हैं। ताजा खबर है कि लोग कार्ड बनवाने से परहेज कर रहे हैं क्योंकि सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा सुविधा घटिया है और निजी अस्पताल कार्ड देखते ही रोगियों को गंभीर बीमारी के नाम पर बड़े मैडीकल कॉलेज रैफर कर देते हैं। 

नीतियां जमीन पर कारगर क्यों नहीं : केंद्र ने बजट में ताजा ‘जीरो बजट खेती’ की नीति पर फिर जोर दिया है। लैगशिप योजनाओं की घोषणा अच्छी लगती है, लेकिन जमीनी स्तर पर उनके अमल के हर पहलू पर नजर न रखने और अमल में कोताही के कारण वे दम तोड़ रही हैं। ‘जीरो बजट कृषि’ नीति पर केंद्र की ही आई.सी.ए.आर. की विशेषज्ञ समिति का कहना है कि पूरे देश में इसे लागू करने से पैदावार में भारी कमी होगी, लिहाजा इसे केवल असिंचित क्षेत्रों में पहले प्रायोगिक और संस्थागत स्तर पर किया जाना चाहिए। अनेक गैर-सरकारी कृषि विशेषज्ञ मानते हैं कि बगैर जैनेटिकली मॉडिफाइड (जी.एम.) बीजों के जीरो बजट या प्राकृतिक खेती असंभव है, जबकि भारत  में जी.एम. बीजों का प्रयोग गैर-कानूनी है। 

फसल बीमा योजना भी सरकार के कृषि क्षेत्र के लिए क्रांतिकारी योजना थी, लेकिन यह राज्य सरकारों की अकर्मण्यता और भ्रष्टाचार के कारण दम तोड़ रही है और बीमित किसानों की सं या लगातार घटती जा रही है। स्किल इंडिया 7 साल बाद भी न तो लक्षित नौजवानों की ट्रेनिंग कर सका, न ही अल्पकालिक प्रशिक्षण के बाद उन्हें रोजगार मिल सका। घोषणाएं तभी की जाएं, जब उनके अमल के हर पहलू पर पूरी तरह गौर किया गया हो, अन्यथा सरकार की विश्वसनीयता घटती है।-एन.के.सिंह
 


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