‘नैटफ्लिक्स’ ने बदल दी स्ट्रीमिंग की दुनिया
punjabkesari.in Sunday, Jan 11, 2026 - 05:45 AM (IST)
इस सप्ताह नैटफ्लिक्स भारत में 10 साल पूरे कर रहा है। ऐसे में वैश्विक स्तर पर और भारत में मीडिया के मानचित्र के पतन और उसके बाद हुए पुनॢनर्धारण पर फिर से विचार करने का यह एक उपयुक्त समय है। 1990 के दशक में नैटफ्लिक्स डी.वी.डी. किराए पर देता था। इसने यूट्यूब के 5 साल बाद, 2010 में स्ट्रीमिंग शुरू की। हालांकि, ‘हाऊस ऑफ काड्र्स’ के निर्माण ने सब कुछ बदल दिया। पहले दो सीजन के 26 एपिसोड बनाने में 10 करोड़ डॉलर का खर्च आया, जो एक पूरी फिल्म के बजट के बराबर था। एक सीजन के सभी एपिसोड एक साथ रिलीज किए गए और इसकी कीमत 8 से 12 डॉलर प्रति माह थी, जबकि केबल टी.वी. की कीमत 50 डॉलर या उससे अधिक थी। यह मनोरंजन जगत में अब तक का सबसे बड़ा बदलाव था, जब से एम.पी.3 जैसी कंप्रैशन तकनीकों ने 90 के दशक के उत्तरार्ध में संगीत उद्योग को तबाह कर दिया था।
नैटफ्लिक्स ने ऑन-डिमांड, भुगतान-आधारित स्ट्रीमिंग की संभावनाओं को प्रदर्शित किया, जो एक ही समय में लीनियर टैलीविजन, थिएटर रिलीज और समाचार चैनलों को प्रतिस्थापित कर सकती थी और इसने उस क्षमता को साकार भी किया। 39 बिलियन डॉलर के साथ राजस्व और 300 मिलियन से अधिक सब्सक्राइबरों के मामले में, यह दुनिया की सबसे बड़ी पेड स्ट्रीमिंग सेवा है। ये वे दर्शक थे, जिनके लिए दूसरे भी तरस रहे थे। चाहे बात ज्यादा उत्पाद बेचने की हो (अमेजन की) या लोगों को ज्यादा खोज करने के लिए प्रेरित करने की (गूगल की), कई बड़ी तकनीकी कंपनियों को भौगोलिक क्षेत्रों, तकनीकों और उपकरणों में फैले विशाल दर्शकों की जरूरत थी। इनमें से ज्यादातर, जैसे अमेजन और एप्पल, फॉक्स, डिज्नी, वार्नर जैसी पुरानी मीडिया कंपनियों के साथ, वीडियो स्ट्रीमिंग में हाथ आजमा रहे थे। लेकिन नैटफ्लिक्स के आने के बाद, स्ट्रीमिंग एक गंभीर क्षेत्र बन गया और अमेजन प्राइम वीडियो, एप्पल और कई अन्य कंपनियों ने भी अपनी पकड़ मजबूत कर ली। जल्द ही यह स्पष्ट हो गया कि जिनके पास सबसे ज्यादा संसाधन और प्लेटफॉर्म होंगे, उनकी सौदेबाजी की शक्ति सबसे ज्यादा होगी।
टैक्नोलॉजी और मीडिया क्षेत्र की बड़ी कंपनियों का कुल राजस्व 160 अरब डॉलर से लेकर 600 अरब डॉलर तक है। सबसे बड़े पारंपरिक स्टूडियो का राजस्व 30 अरब डॉलर से 80 अरब डॉलर के बीच है। यही कारण है कि 2017 में रूपर्ट मर्डोक ने ट्वंटी-फस्र्ट सैंचुरी फॉक्स की मनोरंजन संपत्तियों, जिनमें स्टार इंडिया भी शामिल थी, को वॉल्ट डिज्नी कंपनी को बेचने का फैसला किया। लगभग उसी समय, जी कंपनी प्रोमोटरों द्वारा उत्पन्न ऋण संकट से जूझ रही थी, उसने अपने हिस्से की बिक्री करने का निर्णय लिया। सोनी-जी का विलय तो नहीं हो पाया लेकिन पी.वी.आर.-इनॉक्स और जियोस्टार (स्टार इंडिया और वायाकॉम 18) जैसे अन्य विलय हो गए। जिस तरह वैश्विक मानचित्र में बदलाव आया, उसी तरह भारतीय मानचित्र में भी बदलाव आया। दस साल पहले किसी आइसलैंडिक शो को ढूंढना, उसका आनंद लेना और फिर और भी देखने की इच्छा रखना कितना संभव था? स्ट्रीमिंग वीडियो या ओ.टी.टी. द्वारा दुनिया भर से पेश की जाने वाली कहानियों का भंडार असाधारण है और नैटफ्लिक्स ने हमें इनसे परिचित कराया, जिसके बाद अन्य चैनल भी जुड़ गए।
जिस तरह आप और मैं कोलंबियाई, स्पैनिश, जर्मन, तुर्की या कोरियाई शो और फिल्में खोज रहे हैं, उसी तरह दुनिया भर में लाखों लोग कोहरा, पाताल लोक, मिर्जापुर, फैमिली मैन या दिल्ली क्राइम जैसी भारतीय फिल्मों और शोज को खोज रहे हैं। ये स्थानीय कहानियां हैं, जिन्हें भारतीय कहानीकारों ने भारतीय भाषाओं में सुनाया है। स्ट्रीमिंग के जरिए इन्हें वैश्विक स्तर पर पहुंचाया जा रहा है, जिसकी हमने कल्पना भी नहीं की थी। नैटफ्लिक्स या अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज होने वाला हर भारतीय शो 200 देशों में उपलब्ध है। इनमें से कई शो की समीक्षा दुनिया भर के कुछ प्रमुख समाचार पत्रों, पत्रिकाओं और टी.वी. चैनलों में की जाती है। विदेशों में रिलीज हुई कुछ सबसे बड़ी भारतीय फिल्में-फॉक्स स्टूडियो की ‘माई नेम इज खान’ (2010) या डिज्नी की ‘दंगल’ (2016)-को यह लोकप्रियता नहीं मिली।
दशकों से ‘क्रॉसओवर फिल्म’ की चर्चा के बाद, भारतीय कहानियां आखिरकार क्रॉसओवर कर रही हैं। उन्हें नियमित रूप से अंतर्राष्ट्रीय एमी पुरस्कारों के लिए नामांकित किया जा रहा है। 2020 में ‘दिल्ली क्राइम’ और 2023 में ‘वीर दास’ की लैंङ्क्षडग ने पुरस्कार जीते। दोनों फिल्में नैटफ्लिक्स पर थीं। दुनिया का सबसे बड़ा फिल्म निर्माण उद्योग अब अपनी कहानी कहने की कला को दुनिया के सामने प्रदॢशत कर रहा है। नैटफ्लिक्स (और स्ट्रीमिंग) के 10 वर्षों ने भारत को जो सबसे अच्छी चीजें दी हैं, उनमें से यह एक है।(‘बी.एस.’ से साभार)-वनीता कोहली-खांडेकर
