देश में उच्च शिक्षा की नुहार बदल देगी कृत्रिम बुद्धिमत्ता

punjabkesari.in Saturday, Mar 14, 2026 - 05:20 AM (IST)

देश के अनेक राज्यों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आॢटफिशियल इंटैलीजैंस) के ज्ञान और इस्तेमाल को उच्च शिक्षा के छात्रों के सिलेबस में शामिल किया जा रहा है, यह एक अच्छी पहल है। आज उच्च शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता एक क्रांतिकारी बदलाव ला रही है, जो शिक्षण, सीखने और प्रशासनिक कार्यों को अधिक स्मार्ट और सक्षम बना रही है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता केवल एक तकनीकी उपकरण नहीं, बल्कि सीखने की प्रक्रिया को बढ़ाने वाला एक सहायक औजार बन गई है।

आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता  छात्र की सीखने की गति और शैली को समझकर पाठ्यक्रम को अनुकूलित  कर सकती है। यह पिछड़े छात्रों की पहचान करने और उनके लिए विशेष ट्यूटोरियल प्रदान करने में मदद करती है। चैटबॉट और वर्चुअल ट्यूटर छात्रों को 24&7 सहायता प्रदान करते हैं, जिससे उनके सवालों के तुरंत जवाब मिल जाते हैं और वे अपनी पढ़ाई को बेहतर ढंग से प्रबंधित कर पाते हैं। परीक्षा, ग्रेङ्क्षडग और अन्य प्रशासनिक कार्यों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग समय और संसाधनों की बचत करता है, जिससे शिक्षक अपना ध्यान पढ़ाने और शोध पर लगा पाते हैं।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े टूल डाटा का विश्लेषण करने, जटिल पैटर्न की पहचान करने और शोध पत्रों के सारांश तैयार करने में शोधकत्र्ताओं की मदद करते हैं, जो अकादमिक अनुसंधान की गुणवत्ता बढ़ाते हैं।  ए.आई.-आधारित टूल्स (जैसे टैक्स्ट-टू-स्पीच और रीयल-टाइम अनुवाद) दिव्यांग छात्रों के लिए अध्ययन सामग्री को सुलभ बनाकर समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देते हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से उन छात्रों की पहचान पहले ही की जा सकती है, जो पढ़ाई में पीछे रह रहे हैं या जिनका स्कूल छोडऩे का जोखिम है, जिससे समय पर सुधारात्मक उपाय किए जा सकते हैं। डाटा पर प्रशिक्षित किया जाता है, तो यह अनुचित निर्णय ले सकता है, जिससे सामाजिक असमानता बढ़ सकती है। उच्च शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आज एक शक्तिशाली उपकरण है, जो सही तरीके से उपयोग किए जाने पर सीखने की प्रक्रिया को सरल, सुगम और अधिक प्रभावशाली बना सकता है। हालांकि, इसे लागू करते समय नैतिक मानकों और मानवीय हस्तक्षेप को बनाए रखना आवश्यक है।

उच्च शिक्षा में शिक्षकों और छात्रों के लिए आॢटफिशियल इंटैलीजैंस (ए.आई.) महत्वपूर्ण है, क्योंकि ऐसी तकनीकों का उपयोग छात्रों के लिए बिना किसी सीमा के सीखने के अधिक लचीले समाधानों को बढ़ावा देता है। आॢटफिशियल इंटैलीजैंस की मदद से दुनिया भर के विश्वविद्यालय बढ़े हुई लचीलेपन और गति के कारण अधिक संख्या में छात्रों का नामांकन कर रहे हैं। विकसित देशों ने आर्टिफिशियल इंटैलिजैंस की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक लागू किया है, जबकि विकासशील देश आॢटफिशियल इंटैलिजैंस के कार्यान्वयन के मामले में विकसित देशों की तुलना में अभी भी प्रारंभिक चरण में हैं। इसलिए, उच्च शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की उपयोगिता से संबंधित इस अंतर को कम करने के लिए इसको अपनाने की आवश्यकता है।

आज कमजोर बुनियादी ढांचा, सूचना तक खराब पहुंच, संस्थानों से समर्थन की कमी, आवश्यक संसाधनों की अपर्याप्तता और खराब तकनीकी कौशल इत्यादि, ये सभी विकासशील देशों के लिए विभिन्न बाधाएं हैं, जो उच्च शिक्षा में एक उपकरण के रूप में आर्टिफिशियल इंटैलीजैंस को लागू करना चाहते हैं। इसमें हम लोग भी शामिल हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता अपने देश में उच्च शिक्षा की नुहार बदलने में सक्षम है, क्यों न इसके उच्च शिक्षा में उपयोग को बढ़ाने के लिए एक कारगर रणनीति रेखांकित की जाए? सागर मंथन में अमृत और जहर दोनों प्राप्त होते हैं। इसी प्रकार कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उच्च शिक्षा में इस्तेमाल से कुछ विपरीत प्रभाव हो सकते हैं, क्योंकि भारत को दुनिया में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में पीछे नहीं रहना है, इसलिए इन विपरीत प्रभावों को ठीक तरीके से हल करते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता को सिर्फ उच्च शिक्षा ही नहीं और स्कूल शिक्षा के भी विकास का जोड़ीदार बनाना जरूरी है।-डा. वरिन्द्र भाटिया 
 


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