दिल्ली सिख गुरुद्वारा कमेटी चुनाव : ‘भ्रष्टाचार ही भ्रष्टाचार’

2021-07-30T06:34:45.933

दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के आम चुनाव 22 अगस्त को होंगे, इस संबंधी गुरुद्वारा चुनाव निदेशालय ने बुधवार को सार्वजनिक सूचना प्रकाशित कर दी है। वार्ड 45 खुरैजी खास में शिरोमणि अकाली दल दिल्ली के उम्मीदवार का निधन होने के कारण इस सीट पर 4 अगस्त तक नामांकन होगा,जबकि 45 वार्डों में पुराने नामांकन के आधार पर ही चुनाव होगा। मतगणना 25 अगस्त को होगी। इससे पहले 25 अप्रैल को चुनाव होने वाले थे लेकिन कोरोना के चलते इसे दिल्ली के उपराज्यपाल ने स्थगित कर दिया था। 

चुनाव का बिगुल बजते ही सभी पार्टियों ने अपनी विजय के लिए ताकत लगानी शुरू कर दी है। हालांकि अभी तक सभी पाॢटयों की ओर से भ्रष्टाचार के मुद्दे को ही जोर-शोर से उठाया जा रहा है। अपने से दूसरी पार्टी के अध्यक्ष को ज्यादा भ्रष्टाचारी बताने की होड़ लगी है। वहीं मौजूदा कमेटी अध्यक्ष के खिलाफ लुकआऊट सर्कुलर जारी होने के बाद सकारात्मक मुद्दों की बजाय नकारात्मक मुद्दे हावी हो गए हैं।

विरोधी पार्टियां कमेटी अध्यक्ष से खुलकर इस्तीफा मांग रही हैं लेकिन वह अपने द्वारा पिछले दो साल में किए गए कार्यों को बेमिसाल बताकर अपने खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के आरोपों पर बोलने को तैयार ही नहीं हैं। इसी को लेकर  शिरोमणि अकाली दल (दिल्ली) के अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना और जागो पार्टी के अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह को कमेटी अध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई करने पर जोर दे रहे हैं। 

इस वजह से लगता है कि चुनाव में भ्रष्टाचार मुख्य मुद्दा बना रहेगा। हालांकि, इसको लेकर जागरूक सिख संगत और बुद्धिजीवी वर्ग में असंतोष भी है और कुछ लोगों का मानना है कि नकारात्मक राजनीति नहीं होनी चाहिए। संगत इसलिए भी ज्यादा आहत है कि एक पार्टी के नेता दूसरी पार्टी के नेता को खुलेआम मंच से चोर की संज्ञा दे रहे हैं। चुनाव में सिखों की भलाई, गुरुद्वारों की संभाल, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे अहम मुद्दे गायब हो सकते हैैं। 

गुरुद्वारा एक्ट-1971 में कई खामियां : सिख विशेषज्ञों का आमतौर पर मानना है कि दिल्ली गुरुद्वारा एक्ट-1971 में कई खामियां हैं, जिसकी वजह से भ्रष्टाचार पैदा होता है। उनके अनुसार गुरुद्वारा एक्ट में दलबदल कानून न होने का फायदा अक्सर विजयी सदस्य उठाते हैं और अपनी वफादारी बेचने के बदले पैसे से लेकर चेयरमैनी तक का सौदा करते हैं। इसके अलावा कमेटी एक्ट मेें अध्यक्ष को 1500 रुपए और महासचिव को 500 रुपए तक का बिल पास करने की छूट है। इससे अधिक के खर्चे के लिए कार्यकारिणी की सहमति से बिल पास करवाना जरूरी है। कमेटी एक्ट के अनुसार हर 15 दिन में कार्यकारिणी की बैठक होनी चाहिए लेकिन अभी मौजूदा समय में कई महीनों से कार्यकारिणी की बैठक हुई ही नहीं है। इस वजह से प्रबंधन को अपनी मनमर्जी करने का मौका मिल जाता है। 

इसके अलावा एस.जी.पी.सी. की तर्ज पर कानूनी मामलों के निपटारे के लिए यहां कोई व्यवस्था नहीं है। एस.जी.पी.सी. में हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में गुरुद्वारा ज्यूडिशियल बोर्ड बना है, जो सभी मामलों को देखता है, जबकि दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी में किसी भी विवाद के लिए जिला जज के पास जाना जरूरी है। इस वजह से मुकद्दमेबाजी में लंबा समय और धन खर्च होता है। सिख विशेषज्ञ बताते हैं कि दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी का जो प्रधान होता है उसका वास्ता मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक होता है। चाहे दिल्ली नगर निगम का चुनाव हो या विधानसभा-लोकसभा का, माना जाता है कि सिख वोट प्रधान के कहने पर चलता है। इसलिए इसका राजनीतिक महत्व भी बहुत है। यही कारण है कि जो भी प्रधान बनता है वह नहीं चाहता कि चुनाव हो और वह लंबे समय तक बना रहे। 

एक अनोखा अभियान : राज्यसभा सांसद सुखदेव सिंह ढींडसा की नवगठित पार्टी शिरोमणि अकाली दल (संयुक्त) दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का चुनाव तो नहीं लड़ रही लेकिन कमेटी में कथित भ्रष्टाचार को लेकर इसने एक अनोखा अभियान जरूर छेड़ दिया है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव हरप्रीत सिंह बन्नी जॉली ने दिल्ली से लेकर पंजाब सहित देश और दुनिया भर के पंथक दलों से अपील की है कि दिल्ली कमेटी के चुनाव के मद्देनजर पवित्र संस्थानों के प्रबंधन से बादल और उनके साथियों को हटाने के बारे में संगत को जागरूक करें। साथ ही अपनी विरासत को बहाल करने और अकालियों के स्वॢणम युग के इतिहास को एक बार फिर दोहराने के लिए डी.एस.जी.एम.सी. चुनाव में करो या मरो स्थिति को समझते हुए अथक प्रयास करें। 

श्री पटना साहिब में अकाली दल का फिर कब्जा, हित दोबारा बने अध्यक्ष : त त श्रीहरिमंदिर जी पटना साहिब प्रबंधक समिति के पदाधिकारियों के चुनाव रविवार को हो गए। प्रबंधक समिति के 9 सदस्यों ने बैठक कर 5 पदाधिकारियों का मध्यावधि चयन किया। नवगठित प्रबंधक समिति में फिर से दिल्ली के अवतार सिंह हित को अध्यक्ष चुना गया है। 

हित का कार्यकाल अढ़ाई साल का होगा। इसके अलावा जगजोत सिंह को वरिष्ठ उपाध्यक्ष, लखविंद्र सिंह को कनिष्ठ उपाध्यक्ष, झारखंड के इंद्रजीत सिंह को महासचिव और हरवंश सिंह को सचिव चुना गया है। 6 सदस्यों का समर्थन मिलने से प्रबंधक समिति पर शिरोमणि अकाली दल का फिर कब्जा हो गया। पिछली प्रबंधक समिति का गठन 14 अक्तूबर, 2018 को हुआ था। 

...और अंत में : दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के चुनाव में अब महज 25 दिन बचे हैं लेकिन किसी भी धार्मिक दल का जमीन पर करंट नजर नहीं आ रहा। कुछ सियासी दल अति-आत्मविश्वास में हैं कि उनकी जीत सुनिश्चित है, जबकि कुछ दल जमीन की बजाय सोशल मीडिया पर प्रचार में मस्त हैं। पढ़ी-लिखी संगत एवं वोटर बड़ी दुविधा में हैं कि किसे वोट डालें क्योंकि हर किसी के खिलाफ तो थाने में एफ.आई.आर. दर्ज हो चुकी है। उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि कौन है गुरु की गोलक का असली रखवाला...।-दिल्ली की सिख सियासत सुनील पांडेय  


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Content Writer

Pardeep

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