मुंबई हमला: 24 गवाहों को पाकिस्तान भेजने का इच्छुक नहीं भारत!

Wednesday, March 15, 2017 7:39 PM
मुंबई हमला: 24 गवाहों को पाकिस्तान भेजने का इच्छुक नहीं भारत!

लाहौर: मुंबई में 2008 में हुए आतंकवादी हमलों के मामले की सुनवाई कर रही आतंकवाद-निरोधी अदालत को अभियोजन पक्ष ने आज बताया कि भारत सरकार 24 गवाहों को बयान दर्ज कराने के लिए पाकिस्तान भेजने को ‘‘अनिइच्छुक’’ है। 4 महीने के अंतर पर आतंकवाद-निरोधी अदालत ने आज रावलपिंडी के आडियाला जेल में मामले की सुनवाई की। सुनवाई के बाद अदालत के एक अधिकारी ने बताया, ‘‘अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि भारत सरकार मामले में गयान दर्ज कराने के लिए 24 भारतीय गवाहों को पाकिस्तान भेजने पर अनिच्छुक है।’’ अदालत को यह भी सूचित किया कि भारत सरकार ने ना सिर्फ गवाहों को भेजने से इंकार कर दिया है, बल्कि मामले की फिर से जांच कराने की मांग की है। अभियोजन ने कहा कि मुंबई मामले को निपटाने के लिए भारतीय गवाहों का बयान दर्ज करना जरूरी है। यह मामला पिछले सात वर्षों से लंबित है।  

अभियोजन ने कहा, ‘‘भारतीय गवाहों के निचली अदालत में पेश होने तक संभवत: मामला निष्कर्ष तक ना पहुंचे।’’ अदालत ने मामले की सुनवाई 22 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी। मुंबई हमला मामले में 24 भारतीय गवाहों को बयान दर्ज कराने के लिए पाकिस्तान भेजने संबंधी पत्र के उत्तर में नई दिल्ली ने इस्लामाबाद से मामले की फिर से जांच करने और उसकी (भारत) ओर से मुहैया कराए गए साक्ष्यों के आधार पर जमात-उद-दावा प्रमुख हाफिज सईद और लश्कर-ए-तैयबा के ऑपरेशन कमांडर जकिउर रहमान लख्वी के खिलाफ मामला चलाने की मांग की है। गृहमंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि पाकिस्तान को मुंबई हमले के किसी भी संदिग्ध के खिलाफ मुकदमा चलाने में कोई गुरेज नहीं है, यदि उसके खिलाफ सबूत मौजूद हों। अधिकारी ने कहा, ‘‘यदि भारत मुंबई मामले में सईद के खिलाफ मजबूत सबूत मुहैया कराता है तो हम उसके खिलाफ मुकदमा जरूर चलाएंगे। लख्वी को उसके खिलाफ साक्ष्यों की कमी के कारण जमानत पर रिहा किया गया।’’ मुंबई हमले के बाद सईद को नवंबर 2008 में नजरबंद किया गया था लेकिन 2009 में अदालत ने उसे बरी कर दिया। सईद पर एक करोड़ डॉलर का इनाम है। 


 




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