होली के शुभ अवसर पर पढ़ें, कथा होलिका की

Monday, March 13, 2017 12:51 PM
होली के शुभ अवसर पर पढ़ें, कथा होलिका की

जब फाल्गुन का महीना आता है तो टेसू के फूल खिलते हैं, हर मन में उमंग भरती है हर ओर रंग बिखरते हैं, दुश्मनी भूल कर सब लोग दोस्त बनते हैं और दिलों से दिल मिलते हैं, तब होली का पावन त्यौहार आता है। कितने ही रंगों को अपने में समेटे यह त्यौहार जब आता है तो हर ओर छोटों से लेकर बड़ों तक में खुशियां ही खुशियां बिखर जाती हैं। भारत में मनाए जाने वाले सभी त्यौहार समाज में मानवीय गुणों को स्थापित करके लोगों में प्रेम, एकता एवं सद्भावना को बढ़ाते हैं। यही कारण है कि भारत में मनाए जाने वाले त्यौहारों एवं उत्सवों को सभी धर्मों के लोग आदर के साथ मिल जुल कर मनाते हैं। 


होली के विभिन्न रूप
होली को लेकर देश के विभिन्न क्षेत्रों में भिन्न मान्यताएं हैं और शायद यही विविधता हमें सांस्कृतिक एकता के बंधन में बांधती है। ऐसा माना जाता है कि होली के दिन लोग पुरानी कटुता एवं दुश्मनी भूल कर एक-दूसरे के गले मिलकर फिर से दोस्त बन जाते हैं। 


कथा होलिका की
होलिका दहन समाज की समस्त बुराइयों के अंत का प्रतीक है। प्राचीन काल में हिरण्यकशिपु नामक एक अत्यंत बलशाली एवं घमंडी राक्षस खुद को ही ईश्वर मानने लगा था। उसने अपने राज्य में ईश्वर का नाम लेने पर पाबंदी लगा दी थी। उसका पुत्र प्रह्लाद ईश्वर का परम भक्त था। प्रह्लाद की ईश्वर भक्ति से क्रुद्ध होकर हिरण्यकशिपु ने उसे अनेक कठोर दंड दिए परंतु भक्त प्रह्लाद ने ईश्वर की भक्ति का मार्ग न छोड़ा। 


हिरण्यकशिपु की बहन होलिका को वरदान प्राप्त था कि वह आग में भस्म नहीं हो सकती। हिरण्यकशिपु के आदेश पर होलिका प्रह्लाद को मारने के उद्देश्य से उसे अपनी गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई, किन्तु आग में बैठने पर होलिका तो जल गई परंतु ईश्वर भक्त प्रह्लाद बच गए। तब से ही होलिका दहन का प्रचलन शुरू हुआ और होली का त्यौहार मनाया जाने लगा।


आधुनिक होने लगी होली 
अन्य त्यौहारों की तरह होली का त्यौहार भी आधुनिक होने लगा है। रंगों का त्यौहार होने के कारण अब प्राकृतिक रंगों की जगह रासायनिक रंगों का प्रचलन बढ़ गया है। भांग-ठंडाई और दूसरे नशे प्रयोग किए जाने लगे हैं और लोक संगीत की जगह अश्लिल औण दोहरे अर्थों वाले फिल्मी गानों का प्रचलन दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है। 


होली का असली उद्देश्य 
होली केवल मस्ती और हुड़दंग से भरपूर त्यौहार ही नहीं है, बल्कि इस त्यौहार के पीछे अनेक धार्मिक मान्यताएं, परंपराएं और ऐतिहासिक घटनाएं छुपी हैं। लोक संगीत, नृत्य, नाट्य, लोक कथाओं, किस्से-कहानियों और यहां तक कि मुहावरों में भी होली के पीछे खूबसूरत संस्कार एवं पहलू देखने को मिलते हैं। 


होली को आपसी प्रेम एवं एकता का प्रतीक माना जाता है। यह सभी मतभेदों को भुला कर एक-दूसरे को गले लगाने की प्रेरणा देती है। इस त्यौहार पर हमें ईर्ष्या, द्वेष एवं कलह आदि बुराइयों को दूर भगाना होगा तभी होली का त्यौहार मनाना सार्थक होगा। 



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