महाशिवरात्रि: त्रिपुरारी के 12 ज्योतिर्लिंगों का करें Live दर्शन

Monday, February 12, 2018 11:42 AM

भगवान शिव का नाम का जपने मात्र से ही सारे कष्टों का निवारण हो जाता है। कहते हैं कि सदि व्यक्ति की श्रद्धा-भावना सच्ची हो तो भगवान शंकर व्यक्ति के सभी कष्टों को हर लते हैं। जिस पर देवों के देव महादेव की कृपा होती है उसे कभी भी किसी भी तरह का कष्ट नहीं होता। ऐसे में यदि शिव जी के ज्योतिर्लिंग के दर्शन से व्यक्ति की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं व पापों से मुक्ति मिलती है। ये 12 ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के वो स्थान जहां भगवान शिव स्वयं ज्योति के रूप में विद्यमान हैं। इन एकादश शिवा के ज्योतिर्लिंगों के संबंध में शिव पुराण में एक श्लोक दिया गया है, जिससे स्पष्ट पता चलता है कि भारत की धरती पर शिव की कितनी कृपा रही है। शिव के इन ज्योतिर्लिंगों के दर्शनों के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं। इन सभी 12 ज्योतिर्लिंगों की अपनी धार्मिक निष्ठां एवं अलग-अलग महत्व है।

श्लोक
सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्।
उज्जयिन्यां महाकालं ओंकारं ममलेश्वरम्।।
हिमालये च केदारं डाकिन्यां भीमशंकरम्।
वाराणस्यां च विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमी तटे।।
वैद्यनाथं चिताभूमौ नागेशं दारूकावने।
सेतुबन्धे च रामेशं घुश्मेशं च शिवालये।।
ऐतानि ज्योतिर्लिंगानि सायं प्रातः पठेन्नरः।
सप्तजन्मकृतम पापम् स्मरनिणां विनस्यति।।


कहा जाता है जो भी मनुष्य प्रतिदिन प्रातः काल उठकर इन ज्योतिर्लिंगों का नाम जपता है अर्थात उपर्युक्त श्लोकों को पढ़ता हुआ, इन शिवलिंगों का मन से ध्यान करता है, उसके सातों जन्म तक के पाप नष्ट हो जाते हैं। जिस कामना की पूर्ति के लिए मनुष्य नित्य इन नामों का पाठ करता है, शीघ्र ही उस फल की प्राप्ति हो जाती है। इन लिंगो के दर्शन मात्र से सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है, यही भगवान शिव की विशेषता है।


शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव शंकर प्राणियों के कल्याण हेतु जगह-जगह तीर्थों में भ्रमण करते रहते हैं तथा लिंग के रूप में वहां निवास भी करते हैं। पृथ्वी पर स्थित सभी शिवलिंगों की गणना तो नहीं की जा सकती, परंतु उनमें से कुछ प्रमुख शिवलिंग हैं जो प्रमुख हैं। शिव पुराण के अनुसार प्रमुख द्वादश ज्योतिर्लिंग इस प्रकार हैं,


सोमनाथ ज्योतिर्लिंग (गुजरात)
पहला ज्योतिर्लिंग सोमनाथ मंदिर गुजरात के (सौराष्ट्र) प्रांत के काठियावाड़ क्षेत्र के अंतर्गत प्रभास में विराजमान हैं। पौराणिक मान्यता अनुसार इस क्षेत्र में भगवान श्रीकृष्णचन्द्र ने यदु वंश का संहार कराने के बाद अपनी नर लीला समाप्त कर ली थी। यहां इस शिवलिंग की स्थापना स्वयं चंद्रदेव ने ही की थी। ऋग्वेद में इसका उल्लेख किया गया है।

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मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग (आंध्र प्रदेश)
आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले में कृष्णा नदी के तट पर श्रीशैल पर्वत पर श्रीमल्लिकार्जुन विराजमान हैं। इसे दक्षिण का कैलाश कहते हैं। महाभारत के अनुसार श्रीशैल पर्वत पर भगवान शिव का पूजन करने से अश्वमेध यज्ञ करने के समान फल प्राप्त होता है। कुछ ग्रंथ्रों में तो यहां तक लिखा है कि श्रीशैल के शिखर के दर्शन मात्र करने से लोगों के सभी प्रकार के कष्ट दूर हो जाते हैं, उसे अनंत सुखों की प्राप्ति होती है और आवागमन के चक्कर से मुक्त हो जाता है।

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महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग (उज्जैन, मध्य प्रदेश)
तृतीय ज्योतिर्लिंग महाकाल या ‘महाकालेश्वर’ के नाम से प्रसिद्ध है। यह स्थान मध्य प्रदेश के उज्जैन में है, जिसे प्राचीन साहित्य में अवंतिका पुरी के नाम से भी जाना जाता है। यहां पर भगवान महाकालेश्वर का भव्य ज्योतिर्लिंग विद्यमान है।

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ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग (उत्तरी भारत)
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के साथ ही अमलेश्वर ज्योतिर्लिंग भी है। इन दोनों शिवलिंगों की गणना एक ही ज्योतिर्लिंग में की गई है। ओंकारेश्वर स्थान भी मालवा क्षेत्र में ही पड़ता है।

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केदारनाथ ज्योतिर्लिंग (उत्तराखंड)
यह ज्योतिर्लिंग हिमालय की चोटी पर विराजमान श्री ‘केदारनाथ’ जी का है। श्री केदारनाथ को ‘केदारेश्वर’ भी कहा जाता है, जो केदार नामक शिखर पर विराजमान है। इस शिखर से पूरब दिशा में अलकनंदा नदी के किनारे भगवान श्री बद्री विशाल का मंदिर है। केदारनाथ दर्शन के संबंध में लिखा है कि जो कोई व्यक्ति बिना केदारनाथ भगवान का दर्शन किए यदि बद्रीनाथ क्षेत्र की यात्रा करता है, तो उसकी यात्रा निष्फल अर्थात व्यर्थ हो जाती है।

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भीमशंकर ज्योतिर्लिंग (डाकिनी, महाराष्ट्र)
इस ज्योतिर्लिंग का नाम ‘भीमशंकर’ है, जो डाकिनी पर अवस्थित है। यह स्थान महाराष्ट्र में मुम्बई से पूरब तथा पूना से उत्तर की ओर स्थित है, जो भीमा नदी के किनारे सहयाद्रि पर्वत पर हैं। भीमा नदी भी इस ही पर्वत से निकलती है। भारतवर्ष में प्रकट हुए भगवान शंकर के बारह ज्योतिर्लिंग में श्री भीमशंकर ज्योतिर्लिंग का छठा स्थान हैं।

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विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग (काशी, उत्तर प्रदेश)
सप्तम ज्योतिर्लिंग काशी में विराजमान ‘विश्वनाथ’ को सप्तम ज्योतिर्लिंग कहा गया है। कहते हैं, काशी तीनों लोकों में न्यारी नगरी है, जो भगवान शिव के त्रिशूल पर विराजती है। विश्वेश्वर ज्योतिर्लिंग उत्तर प्रदेश के वाराणसी जनपद के काशी नगर में अवस्थित है। इसे आनंदवन, आनंदकानन, अविमुक्त क्षेत्र तथा काशी आदि अनेक नामों से जाना जाता है।

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त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग (नासिक, महाराष्ट्र)
अष्टम ज्योतिर्लिंग को ‘त्र्यम्बक’ के नाम से भी जाना जाता है। यह नासिक जिले में पंचवटी से लगभग अठारह मील की दूरी पर है। यह मंदिर ब्रह्मगिरि के पास गोदावरी नदी कें किनारे स्थित है। इसे त्र्यम्बक ज्योतिर्लिंग, त्र्यम्बकेश्वर शिव मंदिर भी कहते है। यहां समीप में ही ब्रह्मगिरि नामक पर्वत से गोदावरी नदी निकलती है। जिस प्रकार उत्तर भारत में प्रवाहित होने वाली पवित्र नदी गंगा का विशेष आध्यात्मिक महत्त्व है, उसी प्रकार दक्षिण में प्रवाहित होने वाली इस पवित्र नदी गोदावरी का विशेष महत्त्व है। 

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वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग (झारखण्ड)
नवंम ज्योतिर्लिंग ‘वैद्यनाथ’ हैं। यह स्थान झारखण्ड प्रांत के संथाल परगना में जसीडीह रेलवे स्टेशन के समीप में है। पुराणों में इस जगह को चिताभूमि कहा गया है। भगवान श्री वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग का मंदिर जिस स्थान पर अवस्थित है, उसे ‘वैद्यनाथधाम’ कहा जाता है।

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नागेश्वर ज्योतिर्लिंग (बड़ौदा, गुजरात)
नागेश नामक ज्योतिर्लिंग जो गुजरात के बड़ौदा क्षेत्र में गोमती द्वारका के समीप है। इस स्थान को दारूकावन भी कहा जाता है। कुछ लोग दक्षिण हैदराबाद के औढ़ा ग्राम में स्थित शिवलिंग का नागेश्वर ज्योतिर्लिंग मानते हैं, तो कोई-कोई उत्तराखण्ड के अल्मोड़ा जिले में स्थित जागेश्वर शिवलिंग को ज्योतिर्लिंग कहते हैं। नागेश्वर ज्योतिर्लिंग गुजरात प्रांत के द्वारकापुरी से लगभग 25 किलोमीटर की दूरी पर अवस्थित है।

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रामेश्वर ज्योतिर्लिंग (तमिलनाडु)
दशम ज्योतिर्लिंग ‘रामेश्वर’ हैं। रामेश्वरतीर्थ को ही सेतुबंध तीर्थ कहा जाता है। यह स्थान तमिलनाडु के रामनाथम जनपद में स्थित है। यहां समुद्र के किनारे भगवान रामेश्वरम का विशाल मंदिर शोभित है। यह हिंदुओं के चार धामों में से एक धाम है। यह तमिलनाडु राज्य के रामनाथपुरम जिले में स्थित है। मन्नार की खाड़ी में स्थित द्वीप जहां भगवान राम का लोक प्रसिद्ध विशाल मंदिर है।

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घृश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग (महाराष्ट्र)
एकादशवां ज्योतिर्लिंग ‘घृश्मेश्वर’ है। इन्हें कोई ‘घृष्णेश्वर’ तो कोई ‘घुसृणेश्वर’ के नाम से पुकारता हैं। यह स्थान महाराष्ट्र क्षेत्र के अन्तर्गत दौलताबाद से लगभग अठारह किलोमीटर दूर ‘बेरूलठ गांव के पास है। इस स्थान को ‘शिवालय’ भी कहा जाता है। घुश्मेश्वर को लोग घुसृणेश्वर और घृष्णेश्वर भी कहते हैं। घृष्णेश्वर से लगभग आठ किलोमीटर दूर दक्षिण में एक पहाड़ की चोटी पर दौलताबाद का किला मौजूद है।
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