सरकार ने क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में 670 करोड़ रुपये की पूंजी डालने को मंजूरी दी

2020-03-25T20:04:37.963

नयी दिल्ली, 25 मार्च (भाषा) सरकार ने बुधवार को क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) में 670 करोड़ रुपये की पूंजी डाले जाने की योजना को मंजूरी दे दी। अगले वित्त वर्ष में दी जाने वाली इस पूंजी से इन बैंकों को नियामकीय पूंजी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) की बैठक में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में पूंजी डाले जाने का काम एक साल और 2020-21 में भी जारी रखने को मंजूरी दी गयी। यह पूंजी उन आरआरबी में डाली जाएगी जो भारांकित जोखिम संपत्ति अनुपात (सीआरएआर) के रूप में न्यूनतम पूंजी 9 प्रतिशत बनाये रखने सक्षम नहीं हैं। रिजर्व बैंक के नियामकीय शर्तों के तहत यह अनुपात तय किया गया है।

एक आधिकारिक बयान में कहा गया है, ‘‘सीसीईए ने आरआरबी में पूंजी डाले जाने की योजना के तहत केंद्र सरकार की हिस्सेदारी के लिये 670 करोड़ रुपये के उपयोग को भी मंजूरी दी। यानी कुल डाली जाने वाली पूंजी में से 50 प्रतिशत केंद्र सरकार देगी। यह प्रायोजक बैंकों द्वारा आनुपातिक आधार पर जारी होने वाली हिस्सेदारी पर निर्भर करेगा।’’
कानून के तहत केंद्र आरआरबी में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है और 35 प्रतिशत संबंधित प्रायोजक बैंक और 15 प्रतिशत हिस्सेदारी राज्य सरकारों के पास है।
इन बैंकों का गठन आरआरबी कानून, 1976 के तहत किया गया। इसका मकसद गांवों में छोटे किसानों को, खेतिहर मजदूरों तथा दस्तकारों को कर्ज देना है।

बयान में कहा गया है कि सीआरएआर में सुधार के साथ वित्तीय रूप से मजबूत और सुदृढ़ आरआरबी से ग्रामीण क्षेत्रों में कर्ज जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।
आरबीआई दिशानिर्देश के अनुसार आरआरबी को कुल कर्ज का 75 प्रतिशत प्राथमिक क्षेत्र को देना होता है। आरआरबी ग्रामीण क्षेत्रों में सूक्ष्/लघु उद्यमों तथा छोटे कारोबारियों को भी कर्ज देते हैं।



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PTI News Agency

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