तेल संकट के बीच बदला अमेरिका का रुख, रूसी तेल की बिक्री को दी मंजूरी

punjabkesari.in Friday, Mar 13, 2026 - 11:25 AM (IST)

बिजनेस डेस्कः कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज उछाल और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर मंडरा रहे संकट के बीच अमेरिका ने अपने रुख में नरमी दिखाई है। कुछ समय पहले तक रूसी तेल के कारोबार पर सख्ती बरतने वाला अमेरिका अब सीमित स्तर पर उसकी बिक्री की अनुमति दे रहा है। अमेरिकी प्रशासन ने समुद्र में पहले से मौजूद कुछ रूसी तेल खेपों की अस्थायी बिक्री को मंजूरी दी है।

अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने गुरुवार को जारी नोटिस में कहा कि यह अनुमति उन रूसी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों पर लागू होगी जिन्हें 12 मार्च की रात 12:01 बजे तक जहाजों पर लाद दिया गया था। इन खेपों को विशेष लाइसेंस के तहत 11 अप्रैल तक बेचा जा सकेगा। इससे पहले अमेरिका ने कई देशों, खासकर भारत को भी रूसी तेल खरीदने में कुछ छूट दी थी।

दरअसल, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल मची हुई है। United States और Iran के बीच बढ़ते सैन्य टकराव के बाद तेल की आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ गई है। Israel के साथ मिलकर 28 फरवरी को ईरान पर शुरू हुए हमलों के बाद से वैश्विक बेंचमार्क कच्चे तेल की कीमतों में करीब 40 से 50 प्रतिशत तक उछाल आ चुका है।

इस बीच International Energy Agency (IEA) ने चेतावनी दी है कि अगर युद्ध और फैलता है या समुद्री मार्ग बंद हो जाते हैं तो दुनिया को तेल आपूर्ति में इतिहास की सबसे बड़ी बाधा का सामना करना पड़ सकता है।

हालांकि इन चिंताओं के बावजूद Donald Trump ने संकेत दिया है कि ईरान के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि ईरान के “दुष्ट साम्राज्य” को हराना तेल की कीमतों से ज्यादा अहम है। लेकिन युद्ध के कारण अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे असर को लेकर अमेरिका के अंदर राजनीतिक दबाव भी बढ़ रहा है।

उधर, ईरान का रुख भी कड़ा होता जा रहा है। देश के नए सर्वोच्च नेता Mojtaba Khamenei ने संकेत दिया है कि तेहरान रणनीतिक दबाव बनाने के लिए Strait of Hormuz को निशाना बनाता रह सकता है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने का विकल्प इस्तेमाल किया जा सकता है।

गौरतलब है कि इसी समुद्री मार्ग से दुनिया के समुद्री रास्ते से होने वाले करीब एक-चौथाई तेल व्यापार और बड़ी मात्रा में एलएनजी की आपूर्ति होती है, इसलिए यहां किसी भी तरह का व्यवधान वैश्विक ऊर्जा बाजार पर बड़ा असर डाल सकता है।


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Content Writer

jyoti choudhary

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