Budget 2026: चमड़ा सस्ता हुआ, अब कितने में मिलेगा Woodland का ₹5000 वाला जूता?
punjabkesari.in Tuesday, Feb 03, 2026 - 10:34 AM (IST)
नेशनल डेस्क: बजट 2026 के पिटारे से इस बार आम आदमी के लिए एक ऐसी राहत निकली है, जिसका सीधा कनेक्शन आपकी पदचापों से है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बजट में केवल बड़े बुनियादी ढांचों की ही बात नहीं की, बल्कि जूतों और चमड़े के सामानों पर टैक्स कटौती का बड़ा दांव खेलकर मिडिल क्लास के चेहरे पर मुस्कान बिखेर दी है। अब सवाल यह उठता है कि क्या आपके पसंदीदा 'वुडलैंड' (Woodland) या अन्य ब्रांडेड जूते वाकई आपकी जेब के लिए हल्के होने वाले हैं?
ब्रांडेड जूतों पर बजट का 'डिस्काउंट'
सरकार ने फुटवियर इंडस्ट्री को रफ्तार देने के लिए चमड़े और जूतों से जुड़े कच्चे माल पर कस्टम ड्यूटी (आयात शुल्क) को कम करने और नियमों को सरल बनाने का फैसला किया है। इस कदम का सीधा असर उत्पादन लागत पर पड़ेगा। अगर आप 5,000 रुपये वाले वुडलैंड जूते खरीदने की सोच रहे हैं, तो एक्सपर्ट्स का मानना है कि टैक्स में इस रियायत के बाद कीमतों में 5% से 15% तक की गिरावट देखी जा सकती है। हालांकि, यह उम्मीद करना जल्दबाजी होगी कि 5,000 का जूता सीधे 3,000 का हो जाएगा, क्योंकि ब्रांड्स को अपने मार्केटिंग और डिस्ट्रीब्यूशन खर्चों को भी मैनेज करना होता है।
उद्योग को संजीवनी और ग्राहकों को फायदा
बजट के इन प्रावधानों का मुख्य उद्देश्य देश के चमड़ा उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है। सरकार ने कुछ इनपुट्स के 'ड्यूटी-फ्री' आयात की अनुमति दी है, जिससे छोटे और मंझोले जूता निर्माताओं को बड़ी राहत मिलेगी। जब कंपनियों को कच्चा माल सस्ता मिलेगा, तो वे इसका लाभ धीरे-धीरे ग्राहकों तक पहुंचाएंगी। इससे न केवल स्थानीय बाजार में जूतों के दाम गिरेंगे, बल्कि भारत से होने वाले निर्यात को भी मजबूती मिलेगी।
कब दिखेगा कीमतों में बदलाव?
बजट के ऐलान का असर रातों-रात दुकानों पर नजर नहीं आएगा। पहले कंपनियां अपनी पुरानी इन्वेंट्री (Stock) को क्लियर करेंगी और फिर नए टैक्स ढांचे के हिसाब से उत्पादन की लागत का आकलन किया जाएगा। उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले कुछ महीनों में बाजार में नए स्टॉक के साथ कीमतों में कमी का सिलसिला शुरू होगा। शुरुआत में चुनिंदा मॉडल्स पर 5-10% की कटौती देखने को मिल सकती है, जिससे महंगे ब्रांड्स के जूते अब पहले के मुकाबले थोड़े किफायती हो जाएंगे।
