क्या AAP छोड़ने वाले सांसदों की चली जाएगी सदस्यता? जानिए क्या कहता है दल बदल कानून
punjabkesari.in Saturday, Apr 25, 2026 - 02:51 PM (IST)
नेशनल डेस्क: राज्य सभा सांसद राघव चड्ढा के साथ आम आदमी पार्टी के सात सांसदों बीजेपी ज्वाइन कर ली है। इसके बाद देश की राजनीति में हलचल मच गई है। पार्टी छोड़ने के बाद सभी सांसदों ने अरविंद केजरीवाल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं आप सांसद आम आदमी पार्टी सांसद संजय सिंह इसे गैर संवैधानिक, गैर कानूनी बताया है। उन्होंने हा कि ये नियमों के विपरीत जाकर 7 लोगों ने भाजपा में जाने का ऐलान कर दिया।
यह कानूनी रूप से गलत है... 10वीं अनुसूची में साफ तौर पर लिखा है कि किसी भी प्रकार की फूट, भले ही वह 2/3 संख्या हो, उसकी कोई वैधानिक मान्यता नहीं है। आम आदमी पार्टी के 7 राज्यसभा सांसद टूटे हैं वह गैर संवैधानिक, गैर कानूनी है और संसदीय नियमों के विपरीत है। मैं आज राज्यसभा के सभापति व उपराष्ट्रपति को पत्र दूंगा कि इन सातों सांसदों की राज्यसभा सदस्यता समाप्त की जाए।
आप को बता दें कि दलबदल कानून (Anti-Defection Law) सांसदों (MPs) और विधायकों (MLAs) पर तब लागू होता है, जब वे अपने दल के खिलाफ जाकर राजनीतिक वफादारी बदलते हैं। यह कानून 1985 में 52वें संविधान संशोधन के जरिए लागू हुआ था और संविधान की दसवीं अनुसूची (Tenth Schedule) में शामिल है।
कब लागू होता है दलबदल कानून?
1. पार्टी छोड़ना या बदलना
अगर कोई सांसद अपनी पार्टी की सदस्यता छोड़ देता है या किसी दूसरी पार्टी में शामिल हो जाता है।
2. व्हिप के खिलाफ वोट देना
अगर सांसद अपनी पार्टी के निर्देश (व्हिप) के खिलाफ संसद में वोट करता है या वोटिंग से अनुपस्थित रहता है, बिना पार्टी की अनुमति के।
3. निर्दलीय सांसद का दल जॉइन करना
अगर कोई निर्दलीय (Independent) सांसद चुनाव जीतने के बाद किसी पार्टी में शामिल हो जाता है।
4. मनोनीत सदस्य का मामला
अगर कोई नामित (Nominated) सदस्य 6 महीने के भीतर किसी पार्टी में शामिल नहीं होता, लेकिन उसके बाद शामिल होता है, तो वह अयोग्य ठहराया जा सकता है।
कब सदस्यता समाप्त होती है?
जब इन नियमों का उल्लंघन होता है, तो मामला संसद के स्पीकर (लोकसभा) या चेयरमैन (राज्यसभा) के पास जाता है।
वही तय करते हैं कि सदस्य को अयोग्य (disqualify) किया जाए या नहीं।
अयोग्य घोषित होने पर सांसद की सदस्यता खत्म हो जाती है।
कब नहीं लागू होता?
पार्टी का विलय (Merger)
अगर किसी पार्टी के 2/3 सांसद मिलकर दूसरी पार्टी में विलय करते हैं, तो इसे दलबदल नहीं माना जाता। दलबदल कानून का मकसद है कि चुने गए जनप्रतिनिधि अपनी पार्टी के प्रति ईमानदार रहें और राजनीतिक स्थिरता बनी रहे। नियम तोड़ने पर उनकी सदस्यता खत्म की जा सकती है।
गौरतलब है कि शुक्रवार को राघव चड्ढा संदीप पाठक और अशोक मित्तल सहित सात राज्य सभा सांसदो ने आम आदमी पार्टी छोड़ बीजेपी में शामिल हो गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी अपने निजी हित में काम कर रही है और भ्रष्टाचर में लिप्त हो चुकी है।
