Night Drinking: रात में ही क्यों छलकते हैं जाम? जानें क्या अंधेरे में वाकई चढ़ता है ज्यादा नशा?
punjabkesari.in Tuesday, Apr 21, 2026 - 12:47 PM (IST)
Night Drinking Psychology : क्या आपने कभी सोचा है कि जैसे ही शाम ढलती है दुनिया भर के बार और पब गुलजार क्यों हो जाते हैं? दोपहर की कड़कती धूप में शराब पीना भले ही कुछ लोगों को पसंद हो लेकिन समाज में इसे अक्सर एक अजीब नजरिए से देखा जाता है। शराब और रात के बीच का यह अटूट रिश्ता महज एक इत्तेफाक नहीं बल्कि इसके पीछे सामाजिक शर्म, थकान और हमारे शरीर की जैविक बनावट का एक जटिल मेल छिपा है।
रात का अंधेरा एक सुरक्षा कवच
हमारे समाज में शराब पीना आज भी एक वर्जित कार्य माना जाता है। दिन के उजाले में या परिवार के बड़ों के सामने शराब पीना मर्यादा के खिलाफ और अपमानजनक माना जाता है। रात का अंधेरा एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। यह व्यक्ति को समाज और परिवार की सीधी नजरों से बचाकर अपनी आदतों को पूरा करने की प्राइवेसी प्रदान करता है।

दिन भर की थकान के बाद रिलैक्सेशन
आधुनिक जीवनशैली में शराब को दिन भर की कड़ी मेहनत और मानसिक तनाव से मुक्ति का साधन मान लिया गया है। सुबह से शाम तक दफ्तर की भागदौड़ और काम के भारी बोझ के बाद रात का समय खुद की थकान उतारने का जरिया बन जाता है। अधिकतर कामकाजी लोग शराब को दिन भर के संघर्ष के बाद मिलने वाले पुरस्कार के रूप में देखते हैं जो केवल काम खत्म होने के बाद (यानी रात में) ही संभव है।
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ब्रिटिश काल और Evening Rituals का इतिहास
शराब पीने को एक शाम की रस्म में बदलने के पीछे दिलचस्प ऐतिहासिक कारण भी हैं। ब्रिटिश काल के दौरान जब पहली बार कोलकाता में व्यावसायिक शराब की दुकानें और क्लब खुले तो वहां 'इवनिंग ड्रिंकिंग' का कल्चर शुरू हुआ। अंग्रेजों ने शराब को क्लब लाइफ और काम के बाद के मनोरंजन से जोड़ा। धीरे-धीरे भारतीयों ने भी इसे एक जिम्मेदार और पेशेवर छवि के साथ अपना लिया जहां दिन में काम और रात में जाम को एक सामाजिक रस्म बना दिया गया।

वहीं आज के दौर में रात को शराब पीना केवल एक नशा नहीं रह गया है बल्कि यह आधुनिक कामकाजी संस्कृति (Work Culture) का एक अनिवार्य अंग बन चुका है। लोग इसे प्रोफेशनल स्ट्रेस से मुक्ति पाने और सोशल बॉन्डिंग बढ़ाने के एक प्रभावी तरीके के रूप में देखते हैं। दिन भर की भागदौड़ के बाद रात का सन्नाटा और शराब का साथ एक ऐसा रिलैक्सेशन देता है जो दिन के उजाले में संभव नहीं है।
