गैस की कमी होने पर सबसे पहले किस सेक्टर को मिलेगा सिलेंडर? भारत सरकार ने जारी की प्रायोरिटी लिस्ट
punjabkesari.in Tuesday, Mar 10, 2026 - 01:47 PM (IST)
नेशनल डेस्क : जंग के कारण होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने के बाद भारत में LPG और नेचुरल गैस की सप्लाई पर बड़ा असर पड़ा है। युद्ध के कारण मिडिल ईस्ट से इंपोर्ट रुक गया है, जिससे पेट्रोलियम और गैस मंत्रालय ने आपात स्थिति में गैस वितरण के लिए प्रायोरिटी लिस्ट जारी की है। अब यह तय हो गया है कि गैस की कमी होने पर पहले किन सेक्टरों को कितना मिलेगा।
किन सेक्टर्स को 100% गैस मिलेगी
सरकार ने घरेलू और जरूरी सेक्टरों को टॉप प्रायोरिटी दी है। इन सेक्टरों में कोई कटौती नहीं होगी और इन्हें पूरी सप्लाई मिलेगी। इनमें शामिल हैं :
- घरेलू PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) : सीधे घरों में रसोई के लिए इस्तेमाल होने वाली गैस।
- CNG : वाहनों और पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए कम्प्रेस्ड नेचुरल गैस।
- LPG प्रोडक्शन : घरेलू रसोई गैस सिलेंडर बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली गैस।
- पाइपलाइंस के लिए जरूरी ईंधन : गैस ट्रांसपोर्ट के लिए आवश्यक।
इससे आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित नहीं होगी। खाना बनाने और गाड़ी चलाने में कोई दिक्कत नहीं आएगी।
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किन सेक्टरों में होगी गैस कटौती
सरकार ने इंडस्ट्री और कमर्शियल सेक्टरों में गैस की कटौती का निर्णय लिया है। इन सेक्टरों को पिछले औसत इस्तेमाल के आधार पर ही गैस मिलेगी।
- चाय उद्योग और अन्य मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर : पिछले 6 महीने की औसत खपत का केवल 80%।
- फर्टिलाइजर कंपनियां : 70% अलोकेशन।
- तेल रिफाइनरीज : 65% अलोकेशन।
होटल एसोसिएशन पहले ही चेतावनी दे चुकी है कि कमर्शियल गैस नहीं मिली तो बड़े शहरों में होटल बंद हो सकते हैं।
सरकार ने गैस डिस्ट्रिब्यूशन में कटौती क्यों की
भारत अपनी LPG जरूरत का बड़ा हिस्सा इंपोर्ट करता है, जो ज्यादातर मिडिल ईस्ट से होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते आता है। युद्ध के कारण इंपोर्ट रुक गया है, जिससे कमर्शियल LPG की कमी हो गई।
सरकार ने घरेलू LPG बचाने के लिए :
- रिफाइनरीज को ज्यादा प्रोडक्शन करने के आदेश दिए हैं।
- घरेलू सिलेंडर की बुकिंग अंतर को 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया है।
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, देश में LPG का स्टॉक अभी 40 दिनों के लिए पर्याप्त है। इसके अलावा अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से अल्टरनेटिव इंपोर्ट बढ़ाया जा रहा है।
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संभावित प्रभाव
अगर संकट लंबा चला तो इंडस्ट्री पर असर पड़ेगा :
- चाय बागानों में प्रोडक्शन कम हो सकता है।
- खाद (फर्टिलाइजर) कंपनियों का काम प्रभावित हो सकता है।
