हमें महिलाओं से किए गए सामूहिक वादे को निभाना होगा: रीजीजू ने खरगे से कहा
punjabkesari.in Sunday, Apr 12, 2026 - 11:43 PM (IST)
नेशनल डेस्क : केंद्रीय मंत्री किरेन रीजीजू ने रविवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से कहा कि महिला आरक्षण अधिनियम के कार्यान्वयन में देरी करना करोड़ों महिलाओं के साथ न्याय में देरी करने के अलावा और कुछ नहीं है। उन्होंने प्रमुख विपक्षी दल से राजनीति से ऊपर उठकर 'नारी शक्ति' के लिए 2029 तक इसके कार्यान्वयन का समर्थन करने का आग्रह किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लिखे गए खरगे के पत्र के जवाब में संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि यह राजनीति का विषय नहीं है, बल्कि भारत की बेटियों से किए गए 'वादे को निभाने' का विषय है। कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने पत्र में सरकार पर 'राजनीतिक लाभ' के लिए महिला आरक्षण कानून को जल्दबाजी में लागू करने का आरोप लगाया था।
रीजीजू ने कहा कि 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' लंबे समय से संजोई गई राष्ट्रीय आकांक्षा और वास्तव में राजनीतिक क्षेत्र के सभी दलों के संयुक्त प्रयास का परिणाम है। उन्होंने खरगे को लिखे पत्र में कहा, ''यह देश भर की महिलाओं से किए गए सामूहिक वादे को दर्शाता है।'' संसद का बजट सत्र बढ़ा दिया गया है और सदन का तीन दिवसीय विशेष सत्र 16 से 18 अप्रैल तक बुलाया गया है, जिसमें 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' (जिसे आमतौर पर महिला आरक्षण अधिनियम के नाम से जाना जाता है) में संशोधन पेश किए जाएंगे ताकि इसे 2029 में लागू किया जा सके। हालांकि, खरगे ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि परिसीमन और अन्य पहलुओं के विवरण के बिना महिला कोटा कानून पर कोई सार्थक चर्चा करना 'असंभव' होगा और मांग की है कि 29 अप्रैल को राज्य चुनावों का मौजूदा दौर समाप्त होने के बाद इस मामले पर सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए।
रीजीजू ने 'एक्स' पर कहा, ''भारत की महिलाओं से किए गए वादे पर टालमटोल की राजनीति नहीं कर सकते। जब महिला आरक्षण अधिनियम को लागू करने का समय आया है, तो हिचकिचाहट है और सवाल उठाए जा रहे हैं। मैं इससे पूरी तरह असहमत हूं।'' केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार ने कानून को वास्तविकता में बदल दिया है और अब परिसीमन से जुड़े आवश्यक संशोधन यह सुनिश्चित करने के लिए अहम हैं कि देश की महिलाओं को 2029 से पहले उचित प्रतिनिधित्व मिले और इसे अनिश्चितता के भंवर में और अधिक ना धकेलें। रीजीजू ने खरगे को भेजे गए पत्र में लिखा, ''यह राजनीति का विषय नहीं है। यह भारत की बेटियों से किए गए वादे को निभाने का विषय है।
आइए, संकोच से ऊपर उठें और 'नारी शक्ति' के लिए मिलकर आगे बढ़ें।'' रीजीजू ने कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से विभिन्न दलों के नेताओं से संपर्क किया है, पत्र लिखे हैं और उनसे बातचीत की है। रीजीजू ने कहा, ''संवाद हुआ है और यह अभी जारी है, लेकिन किसी न किसी बिंदु पर, इरादे को कार्रवाई में बदलना होगा।'' उन्होंने कहा कि प्रक्रिया के नाम पर कार्यान्वयन में देरी करना लाखों महिलाओं के साथ न्याय में देरी करने के अलावा और कुछ नहीं है। खरगे को लिखे अपने पत्र में रीजीजू ने कहा कि जब 2023 में यह कानून पारित हुआ था, तब अधिकांश दलों और हितधारकों का यही मत था कि इसे यथाशीघ्र लागू किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, ''आज हम 2026 में हैं, और यदि हम अभी कार्रवाई नहीं करते हैं, तो संभव है कि 2029 के चुनावों तक महिला आरक्षण लागू न हो पाए। क्या हमें कार्यान्वयन में संभावित देरी को स्वीकार करना चाहिए या जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए इसे यथाशीघ्र लागू करने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए?'' उन्होंने कहा, ''इसलिए, हमारी विनम्र राय है कि आवश्यक संशोधनों के साथ आगे बढ़ने का यह सबसे उपयुक्त और तार्किक समय है।" संसदीय मामलों के मंत्री ने खरगे के इस सुझाव से असहमति जताई कि सरकार ने विपक्ष से बातचीत नहीं की है। उन्होंने कहा, '' मैंने 16 मार्च 2026 को ही विस्तृत चर्चा के लिए समय मांगने हेतु पत्र लिखा था।
इसके अलावा, मैंने राज्यसभा में कांग्रेस पार्टी के मुख्य सचेतक जयराम रमेश के साथ इस मुद्दे पर हालिया बजट सत्र के दौरान व्यक्तिगत रूप से चर्चा की थी।'' रीजीजू ने बताया कि 26 मार्च को ही उन्होंने खरगे को पत्र लिखकर यह स्पष्ट किया था कि कानून के कार्यान्वयन की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की देरी से इसके समय पर लागू होने के लक्ष्य में बाधा उत्पन्न होगी। तथ्यों का ब्योरा देते हुए मंत्री ने कहा कि 19 मार्च से अब तक सभी प्रमुख विपक्षी दलों और राजग के सहयोगियों के साथ कई औपचारिक बैठकें हो चुकी हैं।
रीजीजू ने कहा, ''हमने समाजवादी पार्टी, द्रमुक और वाईएसआरसीपी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, शिवसेना (उबाठा), एआईएमआईएम और बीजू जनता दल के नेताओं से परामर्श किया है। टीएमसी के दोनों सदनों के नेतृत्व से भी इसी तरह संपर्क किया गया, जिनमें श्री डेरेक ओ'ब्रायन और श्री सौगता रॉय शामिल हैं।'' रीजीजू ने बताया कि 23 मार्च से दो अप्रैल के दौरान सरकार ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग)से बाहर की अन्य पार्टियों के नेताओं से भी टेलीफोन पर विस्तृत बातचीत की है, जिनमें आम आदमी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, आईयूएमएल, जेएमएम, जेकेएनसी, सीपीआई, बीआरएस, सीपीआई (एमएल)एल, वीसीके, केरल कांग्रेस के दोनों गुट, आरएसपी, जेडपीएम, एमएनएम और कई निर्दलीय नेता शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि इनमें से कई नेताओं ने अपना समर्थन दिया है, जबकि अन्य ने अपनी-अपनी पार्टी के नेतृत्व से परामर्श करने के लिए समय मांगा है और जल्द ही जवाब देने का वादा किया है। सितंबर 2023 में संसद ने 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' पारित किया, जिसमें लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटों का आरक्षण निर्धारित किया है। यह अधिनियम 2027 की जनगणना के आधार पर परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लागू होना था। इसका मतलब यह था कि आरक्षण 2034 से पहले लागू नहीं हो पाता। इसे 2029 के लोकसभा चुनावों से लागू करने के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन की आवश्यकता थी, जिसके लिए सरकार कानून में संशोधन पारित करने के लिए विशेष बैठकें आयोजित कर रही है।
