राजनीतिक लाभ के लिए महिला आरक्षण पर बुलाई गई संसद की बैठक, परिसीमन पर गहन चर्चा हो: खरगे
punjabkesari.in Friday, Apr 10, 2026 - 05:42 PM (IST)
नेशनल डेस्क: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नीत केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के विधानसभा चुनावों में राजनीतिक लाभ लेने के लिये महिला आरक्षण कानून में संशोधन करने के लिए संसद की तीन दिवसीय बैठक बुलाई है, जो आचार संहिता का उल्लंघन है। उन्होंने कांग्रेस कार्य समिति (CWC) की बैठक में यह भी कहा कि लोकसभा और विधानसभाओं की सीटों की संख्या में 50 प्रतिशत के अनुपात में वृद्धि को लेकर जिस परिसीमन की बात हो रही है, उसके गंभीर परिणाम होंगे, ऐसे में परिसीमन को लेकर गहन विचार-विमर्श की जरूरत है।
खरगे ने निर्वाचन आयोग पर ''गृह मंत्रालय के अधीनस्थ कार्यालय'' की तरह काम काम करने का आरोप लगाया और कहा कि उससे यह उम्मीद करना बेमानी है कि वह आचार संहिता के उल्लंघन के इस मामले पर गौर करेगा। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ''मोदी सरकार लंबी खामोशी के बाद महिला आरक्षण पर अचानक सक्रिय हो गई है। इसी कड़ी में लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण के मसले पर 16 से 18 अप्रैल के बीच संसद की बैठक होने जा रही है।
सरकार की ओऱ से इस बारे में अभी तक हम लोगों के पास कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं आया है। प्रधानमंत्रीजी के लिखे लेख को पढ कर हमें कुछ बातें पता चली हैं।'' उन्होंने आरोप लगाया कि इस सत्र में सरकार महत्वपूर्ण संविधान संशोधन विधेयक को पास कराना चाहती है, ताकि इस बार के विधानसभा चुनावों में वे इसका श्रेय और फायदा ले सकें। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ''अभी तक जो जानकारियां मिली हैं, उसके मुताबिक सरकार महिला आरक्षण को 2029 के चुनावों से लागू करना चाहती है।
इसके अलावा वह लोकसभा और विधानसभाओं की मौजूदा सीटों को 50 प्रतिशत बढ़ाना चाहती है। वह लोकसभा की सीटों को 543 से बढ़ाकर 816 करना चाहती है। विधानसभाओं में भी इसी अनुपात में बढोतरी होगी।'' खरगे ने दावा किया कि इस पीरसीमन के गंभीर परिणाम होंगे। उन्होंने कहा, ''इसलिए परिसीमन पर बहुत गहरे विचार-विमर्श की जरूरत है। कांग्रेस अध्यक्ष ने यह आरोप दोहराया, ''संसद की बैठक मोदी सरकार अपने राजनीतिक फायदे की मंशा से बुला रही है।
वह जल्दी से जल्दी संविधान संशोधन विधेयक पारित करना चाहती है।'' खरगे ने कहा, ''हमने और विपक्षी दलों के सदन के नेताओं ने संसदीय कार्य मंत्री को तीन बार लिख कर कहा था कि 29 अप्रैल को पश्चिम बंगाल चुनाव के लिए मतदान के आखिरी दिन के बाद सरकार सर्वदलीय बैठक बुलाए और गंभीरता से चर्चा की जाये। हम सबके अनुरोध के बाद भी सरकार ने केवल विमर्श बदलने और चुनावी लाभ के लिए हमारी बातों को नहीं माना।'' उन्होंने कहा कि यह चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन है।
