क्या आरओ का पानी सच में है सुरक्षित? पीने से पहले जरूर करें ये जांच, नहीं तो सेहत के लिए हो सकता है खतरनाक, शोध में हुआ खुलासा

punjabkesari.in Tuesday, Jan 13, 2026 - 09:33 AM (IST)

नेशनल डेस्कः आजकल अधिकतर घरों में आरओ और वाटर फिल्टर लगे हैं, लेकिन क्या यह सुनिश्चित करता है कि पानी पूरी तरह से सुरक्षित है? विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ फिल्टर लगाने भर से काम नहीं चलता। अगर पानी का पीएच या टीडीएस स्तर सही नहीं है, तो यह धीरे-धीरे किडनी, लीवर और अन्य महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है। एएमयू के शोधकर्ता शिरजील अहमद सिद्दीकी ने चेतावनी दी है कि घर में पानी की नियमित जांच और सही टीडीएस व पीएच स्तर सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।

पानी के पीएच और टीडीएस के मानक

एएमयू के एग्रीकल्चर माइक्रोबायोलॉजी विभाग में शोध कर रहे शिरजील अहमद सिद्दीकी बताते हैं कि पीने के पानी के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) ने स्पष्ट मानक तय किए हैं। इन मानकों के अनुसार, पीने के पानी का पीएच लेवल 6.5 से 8.5 के बीच होना चाहिए। यदि पानी का पीएच इससे कम या ज्यादा है, तो यह शरीर पर दुष्प्रभाव डाल सकता है।

यदि पानी का पीएच बहुत कम है, यानी वह अधिक एसिडिक है, तो यह दांतों, पेट और पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचा सकता है। वहीं, अगर पानी का पीएच बहुत ज्यादा है यानी वह बेसिक है, तो पानी का स्वाद कड़वा हो जाता है और इससे पेट में जलन व इरिटेशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

Total Dissolved Solids

टीडीएस (Total Dissolved Solids) यानी टोटल डिज़ॉल्व्ड सॉलिड्स पानी में घुले हुए तत्वों की मात्रा होती है, जिसे मिलीग्राम प्रति लीटर (mg/L) में मापा जाता है। मानकों के अनुसार, 300 mg/L तक का टीडीएस आदर्श माना जाता है। हालांकि, 150 से 500 mg/L तक का टीडीएस भी स्वीकार्य सीमा में आता है। यदि टीडीएस इससे ज्यादा हो, तो वह नॉन-परमिसिबल श्रेणी में आता है और अधिक टीडीएस वाला पानी शरीर में अतिरिक्त सॉल्यूट्स जमा कर सकता है, जिसका सीधा असर किडनी और अन्य महत्वपूर्ण अंगों पर पड़ता है। लंबे समय तक ऐसे पानी का सेवन करने से किडनी संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

आरओ और वाटर फिल्टर का सही इस्तेमाल

शिरजील अहमद सिद्दीकी ने कहा कि घरों में लगे आरओ और वाटर फिल्टर का सही तरीके से रखरखाव करना बेहद जरूरी है। जिन घरों में आरओ सिस्टम है, उन्हें नियमित रूप से पानी का पीएच और टीडीएस चेक कराना चाहिए। हालांकि, अधिकांश सर्विस टेक्नीशियन भी इसे चेक कर देते हैं, लेकिन उपभोक्ताओं को खुद भी सतर्क रहना चाहिए।

पहले आरओ सिस्टम में पानी का टीडीएस 150 या 200 तक रखा जाता था, जिससे पानी से कई जरूरी मिनरल्स निकल जाते थे। इसके कारण शरीर को आवश्यक खनिज तत्व नहीं मिल पाते थे। अब कंपनियों ने अपनी पॉलिसी में सुधार करते हुए, आरओ पानी का टीडीएस बढ़ाकर करीब 300 से 350 तक करने का कदम उठाया है, जो एक सकारात्मक और बेहतर पहल मानी जा रही है।

खराब पानी के दुष्प्रभाव

शिरजील अहमद सिद्दीकी ने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति लंबे समय तक गलत पीएच या ज्यादा टीडीएस वाला पानी पीता है, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। ऐसे पानी में कई तरह के केमिकल्स हो सकते हैं, जो शरीर में अब्जॉर्ब होकर धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाते हैं। इससे न केवल किडनी और लीवर जैसे महत्वपूर्ण अंग प्रभावित हो सकते हैं, बल्कि कुछ मामलों में यह मस्तिष्क पर भी असर डाल सकता है और न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर जैसी समस्याएं उत्पन्न कर सकता है।


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Editor

Sahil Kumar

Related News