''फुटपाथ पर चलना नागरिकों का मौलिक अधिकार, जो वाहनों के अधिकार से कहीं ऊपर हैं'' : Supreme Court
punjabkesari.in Friday, Jun 19, 2026 - 06:41 PM (IST)
नेशनल डेस्क: सुप्रीम कोर्ट ने आज एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि फुटपाथ पर सुरक्षित चलने के अधिकार को नागरिकों का मौलिक अधिकार घोषित किया है। कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि किसी भी सड़क पर गाड़ियों से पहले पैदल चलने वालों का हक है। साथ ही यह भी कहा कि सुरक्षित फुटपाथ न मिलने के कारण किसी नागरिक के अधिकारों का हनन होता है, तो वह संबंधित सरकारी अधिकारियों या एजेंसियों के खिलाफ अदालत जाकर मुआवजे और कानूनी राहत की मांग कर सकता है।

कोर्ट के फैसले के पीछे का कारण
यह ऐतिहासिक फैसला एक दर्दनाक हादसे की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया है। दरअसल एक पिता अपने 5 साल के मासूम बच्चे को स्कूल छोड़ने जा रहे थे, तभी पीछे से आए एक तेज रफ्तार टैंकर ने बच्चे को कुचल दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। इस हादसे के लिए शुरुआत में ₹7.82 लाख का मुआवजा तय किया था। इसे दिल्ली हाईकोर्ट ने घटाकर ₹4.70 लाख कर दिया गया। दिल्ली हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने बदलते हुए पीड़ित पिता को कुल ₹11.45 लाख मुआवजा देने का आदेश दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने इस केस को सिर्फ एक एक्सीडेंट न मानकर, देश के बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए बड़ा दिशानिर्देश जारी कर दिया।

वाहनों के आविष्कार से पहले से चल रहा है इंसान
जस्टिस की पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जिस जगह यह दर्दनाक हादसा हुआ, वहां न तो कोई फुटपाथ था और न ही कोई पेडेस्ट्रियन क्रॉसिंग (Pedestrian Crossing)। कोर्ट ने कहा कि "ऐसे हादसे तब तक नहीं रुकेंगे जब तक हम सड़कों के इस्तेमाल के नजरिए को नहीं बदलते। इंसानी सभ्यता वाहनों के आविष्कार से बहुत पहले से पैदल चल रही है। इसलिए, 'चलने का अधिकार' सबसे मूल और प्राथमिक अधिकार है, जो कार या बाइक जैसे मोटर वाहनों के अधिकार से कहीं ऊपर है।"
