अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के ताजा सर्वे ने उड़ाई ट्रंप की नींद; 62% भारतीय-अमेरिकी डेमोक्रेट्स के साथ, रिपब्लिकन को सिर्फ 19% समर्थन
punjabkesari.in Tuesday, Nov 03, 2026 - 12:46 PM (IST)
Washington: अमेरिका में मंगलवार, 3 नवंबर को मध्यावधि चुनाव के लिए मतदान हो रहा है। इस चुनाव में रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टियों ने पूरी ताकत झोंक रखी है। चुनाव के नतीजे वॉशिंगटन में सत्ता का संतुलन बदल सकते हैं और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के अगले दो वर्षों की दिशा तय कर सकते हैं। ताजा सर्वेक्षण रिपब्लिकन पार्टी के लिए अच्छे संकेत नहीं दे रहे हैं। इनमें डेमोक्रेटिक पार्टी की लहर यानी 'ब्लू वेव' की संभावना जताई गई है। यदि यह अनुमान नतीजों में बदलता है तो डेमोक्रेटिक पार्टी को अमेरिकी संसद के दोनों सदनों- प्रतिनिधि सभा और सीनेट में बहुमत मिल सकता है। चुनाव में ट्रंप की पार्टी की मुश्किलें बढ़ती दिखाई दे रही हैं। चुनाव से पहले आए भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं के नए सर्वेक्षण में डेमोक्रेटिक पार्टी को बड़ी बढ़त मिली है। प्रतिनिधि सभा के चुनाव में 62 प्रतिशत भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं ने डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों का समर्थन करने की मंशा जताई है, जबकि रिपब्लिकन उम्मीदवारों के पक्ष में केवल 19 प्रतिशत मतदाता हैं। सीनेट के चुनाव में भी डेमोक्रेट्स 63 प्रतिशत समर्थन के साथ आगे हैं।
डेमोक्रेटिक उम्मीदवार 63 प्रतिशत समर्थन के साथ आगे
ये आंकड़े ट्रंप के लिए इसलिए अहम हैं, क्योंकि मध्यावधि चुनाव में कांग्रेस के दोनों सदनों का नियंत्रण बदलने से उनके राष्ट्रपति कार्यकाल के अगले दो साल की राजनीति प्रभावित हो सकती है। कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस और यूगोव की ओर से कराए गए 'इंडियन अमेरिकन एटिट्यूड्स सर्वे' में भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं का रुझान डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर दिखाई दिया है। सर्वेक्षण के अनुसार, प्रतिनिधि सभा के चुनाव में 62 प्रतिशत भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं ने डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों को वोट देने की मंशा जताई है, जबकि केवल 19 प्रतिशत मतदाताओं ने रिपब्लिकन उम्मीदवारों का समर्थन किया है। इस तरह डेमोक्रेट्स को 43 प्रतिशत अंकों की बढ़त मिली है। सीनेट के चुनाव में भी डेमोक्रेटिक उम्मीदवार 63 प्रतिशत समर्थन के साथ आगे हैं, जबकि रिपब्लिकन उम्मीदवारों को 21 प्रतिशत मतदाताओं का समर्थन मिला है। यह सर्वेक्षण 7 से 27 अक्टूबर के बीच 1,000 भारतीय-अमेरिकी वयस्कों के बीच ऑनलाइन कराया गया। इसमें त्रुटि की संभावित सीमा 3.87 प्रतिशत है।
2024 में ट्रंप को मिला था भारतीय-अमेरिकियों का समर्थन
सर्वेक्षण के नतीजे बताते हैं कि 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को भारतीय-अमेरिकियों के बीच जो बढ़त मिली थी, वह अब संसदीय चुनावों में कायम नहीं दिखाई दे रही। वर्ष 2024 में करीब 30 प्रतिशत भारतीय-अमेरिकियों ने ट्रंप का समर्थन किया था, जबकि 62 प्रतिशत मतदाताओं ने कमला हैरिस के पक्ष में मतदान किया था। जनवरी 2026 तक ट्रंप के प्रति समर्थन जताने वाले भारतीय-अमेरिकियों का आंकड़ा 25 प्रतिशत रह गया था, जबकि डेमोक्रेटिक पार्टी का समर्थन 57 प्रतिशत था। अब नए सर्वेक्षण में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों के समर्थन में फिर बढ़ोतरी दिखाई दे रही है। सर्वेक्षण के लेखकों सुमित्रा बद्रीनाथन, देवेश कपूर, एनाबेल मिलर, एंडी रोबैना और मिलन वैष्णव ने सोमवार को प्रकाशित लेख में कहा कि नए आंकड़े ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी के प्रति नाराजगी तथा डेमोक्रेटिक पार्टी के समर्थन में दोबारा बढ़ोतरी को दर्शाते हैं।
40 साल से अधिक उम्र के पुरुषों में भी बदला रुझान
सर्वेक्षण में उम्र और लिंग के आधार पर भी मतदाताओं की पसंद में बदलाव सामने आया है। 40 वर्ष और इससे अधिक उम्र के पुरुष मतदाताओं में डेमोक्रेटिक पार्टी का समर्थन जनवरी 2026 में 53 प्रतिशत था, जो अक्टूबर में बढ़कर 68 प्रतिशत हो गया। इसके विपरीत रिपब्लिकन पार्टी का समर्थन इसी अवधि में 32 प्रतिशत से घटकर 16 प्रतिशत रह गया। सर्वेक्षण में शामिल 46 प्रतिशत भारतीय-अमेरिकियों ने खुद को डेमोक्रेट बताया, जबकि 62 प्रतिशत ने डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों को वोट देने की मंशा जताई। इससे संकेत मिलता है कि पार्टी की पहचान से आगे बढ़कर भी मतदाता उसके उम्मीदवारों का समर्थन कर रहे हैं।
ट्रंप को सता रहा जांच का डर
दूसरी ओर, डोनाल्ड ट्रंप भी प्रतिनिधि सभा पर डेमोक्रेटिक पार्टी के संभावित नियंत्रण को लेकर तैयारी करते दिखाई दे रहे हैं। सोमवार को ट्रंप ने कहा कि यदि डेमोक्रेट्स प्रतिनिधि सभा पर नियंत्रण हासिल कर लेते हैं तो वह अरबपति कारोबारी एलन मस्क और अपने प्रशासन के सदस्यों को उनके खिलाफ संभावित जांच से बचाने के लिए तैयार रहेंगे। उन्होंने अपने सहयोगियों को राष्ट्रपति की ओर से माफी देने की संभावना का भी जिक्र किया। दरअसल, डेमोक्रेटिक नेताओं ने संकेत दिया है कि यदि उन्हें प्रतिनिधि सभा में बहुमत मिलता है तो वे ट्रंप प्रशासन से जुड़े कारोबारियों और अधिकारियों की जांच कर सकते हैं।इन संभावित निशानों में एलन मस्क का नाम भी शामिल है। मस्क ने ट्रंप प्रशासन के सरकारी खर्च में कटौती के प्रयासों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसके अलावा उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी के चुनाव अभियानों में भी बड़ी रकम खर्च की थी।
बुधवार सुबह तक सामने आ सकती सत्ता संतुलन की तस्वीर
अमेरिका में मंगलवार, 3 नवंबर को मतदान हो रहा है। शुरुआती नतीजे मंगलवार शाम से आने की उम्मीद है। हालांकि, कांग्रेस के दोनों सदनों में किस पार्टी का नियंत्रण होगा, इसकी शुरुआती तस्वीर बुधवार सुबह तक सामने आ सकती है। जिन राज्यों में मुकाबला बेहद करीबी है, वहां नतीजों के लिए कुछ दिन इंतजार करना पड़ सकता है। खासकर डाक से भेजे गए मतपत्रों की गिनती में अधिक समय लगने की आशंका है।हालांकि, सर्वेक्षणों में डेमोक्रेट्स की बढ़त के बावजूद विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि चुनाव पूर्व अनुमान वास्तविक नतीजों से अलग हो सकते हैं।
