16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया बैन की तैयारी? मंत्री के खुलासे से मचा हड़कंप
punjabkesari.in Thursday, Jan 22, 2026 - 05:43 PM (IST)
नेशनल डेस्क: दुनिया भर में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर चिंता तेजी से बढ़ रही है। इसी कड़ी में ऑस्ट्रेलिया के ऐतिहासिक फैसले के बाद अब भारत में भी सोशल मीडिया को लेकर बड़ा कदम उठाने की तैयारी दिखाई दे रही है। संकेत मिले हैं कि आंध्र प्रदेश सरकार 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर सख्त नियम लागू करने की दिशा में काम कर रही है। यह जानकारी आंध्र प्रदेश के आईटी और मानव संसाधन विकास मंत्री नारा लोकेश ने स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दौरान दी।
ऑस्ट्रेलिया का फैसला बना वैश्विक मिसाल
ऑस्ट्रेलिया ऐसा पहला देश बन चुका है, जहां 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। इस कानून के तहत टिकटॉक, इंस्टाग्राम, फेसबुक, यूट्यूब, एक्स (ट्विटर) और स्नैपचैट जैसे प्लेटफॉर्म्स पर नाबालिग अकाउंट बनाना या इस्तेमाल करना प्रतिबंधित है।
यह नियम 10 दिसंबर 2025 से लागू हो चुका है। कानून का उल्लंघन करने पर सोशल मीडिया कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है और नियम तोड़ने वाले अकाउंट्स को बंद किया जाएगा। वैश्विक स्तर पर इस कदम को बच्चों को हानिकारक कंटेंट, साइबर बुलिंग और मानसिक दबाव से बचाने की दिशा में बड़ा फैसला माना जा रहा है।
आंध्र प्रदेश क्या करने की तैयारी में है?
ब्लूमबर्ग को दिए इंटरव्यू में नारा लोकेश ने कहा कि आंध्र प्रदेश सरकार ऑस्ट्रेलिया के अंडर-16 मॉडल का गहराई से अध्ययन कर रही है। उनके मुताबिक, छोटी उम्र के बच्चे सोशल मीडिया पर दिखने वाले कंटेंट को पूरी तरह समझ नहीं पाते, जिसका उनके मानसिक विकास पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि ऐसा कोई कानून लागू किया जाता है, तो उसके लिए मजबूत कानूनी ढांचा तैयार करना जरूरी होगा।
भारत में पहली बार राज्य स्तर पर सख्ती?
अगर आंध्र प्रदेश यह कानून लागू करता है, तो वह भारत का पहला राज्य होगा जहां 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर सख्त प्रतिबंध लगाया जाएगा।
तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता दीपक रेड्डी ने भी इस पहल का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया का कई बार गलत इस्तेमाल, खासकर महिलाओं और बच्चों के खिलाफ, देखने को मिला है। बच्चों की भावनात्मक परिपक्वता को देखते हुए वैश्विक स्तर की नीतियों को अपनाना जरूरी है।
भारत में अभी क्या है नियम?
फिलहाल भारत में न तो केंद्र सरकार और न ही किसी राज्य सरकार ने बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर कोई स्पष्ट प्रतिबंधात्मक कानून बनाया है। ज्यादातर मामलों में यह जिम्मेदारी माता-पिता पर ही छोड़ी गई है। ऐसे में आंध्र प्रदेश का प्रस्ताव अन्य राज्यों के लिए नीतिगत उदाहरण बन सकता है।
