गुलामी और अत्याचारों को लेकर ब्रिटेन माफी मांगने को तैयार, PM एंडी का मुआवजे से इनकार, बोले-इसके लिए नई पीढ़ी जिम्मेदार नहीं

punjabkesari.in Sunday, Nov 01, 2026 - 12:23 PM (IST)

London: ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने अटलांटिक पार गुलामों के व्यापार में ब्रिटेन की ऐतिहासिक भूमिका को लेकर औपचारिक माफी की मांग पर बातचीत करने की इच्छा जताई है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि ब्रिटेन आर्थिक मुआवजा देने के लिए तैयार नहीं है। बर्नहम ने यह बात 'द गार्जियन' में प्रकाशित अपने लेख में कही है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब अगले सप्ताह एंटीगुआ और बारबुडा में राष्ट्रमंडल देशों के शासनाध्यक्षों की बैठक होने जा रही है। इसमें कैरेबियाई देशों के नेता ब्रिटेन से गुलामी के ऐतिहासिक अपराधों के लिए माफी और क्षतिपूर्ति की मांग उठा सकते हैं। ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार अटलांटिक पार गुलामों के व्यापार से प्रभावित लोगों और समुदायों के साथ व्यवस्थित बातचीत शुरू करने के लिए तैयार है।

 

इस बातचीत में ब्रिटिश राज्य की ओर से औपचारिक माफी की मांग भी शामिल होगी।बर्नहम ने कहा कि वह माफी की मांग को खुले मन से सुनने और उस पर विचार करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने माना कि अतीत में हुई क्रूरता की छाप आज भी बाकी है और इससे प्रभावित लोगों के दर्द को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हालांकि, उन्होंने आर्थिक मुआवजे की मांग को स्वीकार नहीं किया। उनका तर्क है कि आज के ब्रिटिश नागरिकों को उन ऐतिहासिक घटनाओं के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, जिनमें उनकी कोई व्यक्तिगत भूमिका नहीं थी। उनके मुताबिक, पिछली पीढ़ियों के अपराधों के लिए वर्तमान पीढ़ी पर आर्थिक जिम्मेदारी डालना उचित नहीं होगा।

 

ब्रिटेन ने गुलामी से कमाया पैसा 
ब्रिटेन के औपनिवेशिक इतिहास में गुलामों का व्यापार एक बड़ा और विवादित अध्याय रहा है। ट्रांस-अटलांटिक स्लेव ट्रेड डेटाबेस के मुताबिक, 15वीं से 19वीं शताब्दी के बीच कम से कम 1.25 करोड़ अफ्रीकियों का अपहरण कर उन्हें गुलामी के लिए बेचा गया था। इनमें से लगभग 32 लाख लोगों को ब्रिटेन ने अटलांटिक पार पहुंचाया था। ब्रिटेन ने इस व्यापार से भारी आर्थिक लाभ कमाया। हालांकि, बाद में उसने गुलामी की व्यवस्था खत्म करने की दिशा में भी कदम उठाए। 1833 में ब्रिटिश संसद ने ब्रिटिश साम्राज्य के अधिकांश हिस्सों में गुलामी समाप्त करने के लिए कानून पारित किया, जो 1834 से प्रभावी हुआ। लेकिन गुलामी खत्म करने के बाद भी ब्रिटेन ने दूसरे देशों पर अपना औपनिवेशिक शासन जारी रखा। भारत समेत कई देशों में ब्रिटिश शासन के दौरान आर्थिक और राजनीतिक शोषण का इतिहास रहा है।

 

किंग चार्ल्स ने भी गुलामी के इतिहास का किया जिक्र
ब्रिटेन के राजा चार्ल्स तृतीय भी इस समय कैरेबियाई देशों के दौरे पर हैं। उन्होंने बहामास में गुलामी के इतिहास का उल्लेख किया और ब्रिटिश शासनकाल में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी। राष्ट्रमंडल बैठक से पहले राजा चार्ल्स के प्रवक्ता ने कहा कि वह ब्रिटेन के औपनिवेशिक अतीत के सबसे शर्मनाक पहलुओं का सामना करने से पीछे नहीं हटेंगे। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि राजा ब्रिटिश सरकार की विशिष्ट नीतियों पर टिप्पणी नहीं करेंगे। गौरतलब है कि ब्रिटेन की ओर से अब तक गुलामी के इस ऐतिहासिक अध्याय को लेकर औपचारिक सरकारी माफी नहीं मांगी गई है। ऐसे में बर्नहम के बयान को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

 

मुआवजे के बजाय कर्ज में राहत का प्रस्ताव
कैरेबियाई देश ब्रिटेन से केवल औपचारिक माफी नहीं, बल्कि क्षतिपूर्ति की भी मांग कर रहे हैं। इसमें आर्थिक सहायता, कर्ज में राहत, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में निवेश तथा जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए मदद शामिल है। बर्नहम ने सीधे मुआवजे के बजाय कमजोर देशों को कर्ज चुकाने के लिए अधिक समय और बेहतर ब्याज दरें देने का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन इस दिशा में नई पहल शुरू कर सकता है। एंटीगुआ और बारबुडा के प्रधानमंत्री गैस्टन ब्राउन ने बर्नहम के बयान और व्यावहारिक सहायता के प्रस्ताव का स्वागत किया है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि कैरेबियाई देशों की क्षतिपूर्ति की मांग पहले की तरह कायम है।

 

जल्द भारत आ सकते PM एंडी बर्नहम
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम भारत का दौरा करने के भी इच्छुक हैं। उनकी यात्रा जल्द हो सकती है। भारत में कार्यवाहक ब्रिटिश उच्चायुक्त बेन मेलर ने बृहस्पतिवार को पीटीआई-भाषा को यह जानकारी दी। मेलर ने बताया कि प्रधानमंत्री पद संभालने के तुरंत बाद बर्नहम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत की थी। इस दौरान उन्होंने खुद भारत आने की इच्छा जताई थी। बेन मेलर ने कहा, "मुझे पता है कि एंडी बर्नहम भारत आने के लिए बहुत उत्सुक हैं।"उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के साथ बातचीत में बर्नहम ने सीधे तौर पर भारत आने की इच्छा जाहिर की थी। मेलर ने उम्मीद जताई कि दोनों देशों के बीच बढ़ती साझेदारी के मद्देनजर यह यात्रा जल्द देखने को मिल सकती है। 


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Content Writer

Tanuja

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